उत्तराखण्ड सरकार के सिंचाई राज्य मंत्री ऋषि कण्डवाल ने पश्चिम एशिया में निरंतर गहराते युद्ध और वैश्विक अस्थिरता पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि समय रहते युद्ध की विभीषिका को नहीं रोका गया, तो सम्पूर्ण विश्व आर्थिक संकट, खाद्य असुरक्षा तथा व्यापक गरीबी के दलदल में धंस सकता है। उन्होंने कहा कि युद्ध किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं, बल्कि मानवता, अर्थव्यवस्था और सामाजिक संतुलन के लिए विनाश का मार्ग है।राज्य मंत्री ऋषि कण्डवाल ने अपने वक्तव्य में कहा कि पश्चिम एशिया केवल भौगोलिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा, व्यापार एवं आर्थिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र है। वहां उत्पन्न होने वाला कोई भी तनाव प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से विश्व के प्रत्येक राष्ट्र को प्रभावित करता है। युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि, व्यापारिक मार्गों में बाधा तथा आवश्यक वस्तुओं की महंगाई से विकासशील और गरीब देशों की स्थिति अत्यंत दयनीय हो सकती है।उन्होंने कहा कि आज विश्व पहले ही आर्थिक असमानता, बेरोजगारी, जलवायु परिवर्तन तथा खाद्य संकट जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे समय में युद्ध की आग मानव सभ्यता को और अधिक संकटग्रस्त बना सकती है। उन्होंने वैश्विक शक्तियों से आग्रह किया कि वे अहंकार और सामरिक प्रतिस्पर्धा से ऊपर उठकर शांति, संवाद और कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता दें।ऋषि कण्डवाल ने कहा कि भारत सदैव “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना का पक्षधर रहा है और विश्व शांति के लिए निरंतर प्रयास करता आया है। उन्होंने कहा कि मानवता की रक्षा तथा आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए यह आवश्यक है कि पश्चिम एशिया में तत्काल युद्धविराम हो तथा सभी पक्ष वार्ता के माध्यम से समाधान खोजें।उन्होंने अंत में कहा कि यदि विश्व को गरीबी, भुखमरी और आर्थिक अराजकता से बचाना है, तो युद्ध नहीं बल्कि शांति, सहयोग और मानवीय संवेदनाओं को अपनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।उपाध्यक्ष सिंचाई सलाहकार ऋषि कण्डवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अमेरिका तथा ईरान से युद्ध रोकने तथा बातचीत से मसले के हल की बात कही है तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही कह चुके हैं कि यह युद्ध दुनिया को गरीबी के मुहाने पर लाकर रख देगा।।
*कोटद्वार: पश्चिम एशिया में अमेरिका तथा ईरान का युद्ध दुनिया में गरीबी का बन सकता है कारण:ऋषि कण्डवाल सिंचाई राज्य मंत्री उत्तराखण्ड सरकार*
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