चम्पावत प्रकरण: ओछी राजनीति और षड्यंत्र का पर्दाफाश….
5 मई को चम्पावत में हुई घटना पर विपक्षी दल, विशेषकर कांग्रेस द्वारा अपनाए गए नकारात्मक रवैये ने प्रदेश की राजनीति को शर्मसार किया है। एक संवेदनशील मानवीय मामले को जिस तरह राजनीतिक लाभ के लिए हथियार बनाया गया, वह न केवल निंदनीय है बल्कि देवभूमि की संस्कृति के विरुद्ध भी है।
एक सुनियोजित षड्यंत्र का संकेत
मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र को लक्षित कर बदनाम करने की एक गहरी साजिश रची गई।
नेताओं की भूमिका: कांग्रेस नेताओ द्वारा मामले को जानबूझकर तूल देना संदेह पैदा करता है।
संदेहास्पद सक्रियता: पुलिस की आधिकारिक कार्रवाई और जांच से पहले ही नेताओं का इस कदर सक्रिय होना यह संकेत देता है कि पूरा प्रकरण “पूर्व नियोजित” था।
. मासूमियत के साथ खिलवाड़: नाबालिग का दुरुपयोग
इस पूरे प्रकरण का सबसे काला पक्ष एक मासूम बच्ची को राजनीतिक मोहरा बनाना रहा।
भ्रामक एजेंडा: बच्ची को डरा-धमकाकर और बहला- फुसलाकर झूठ बोलने के लिए प्रेरित किया गया।
सत्य की विजय: बच्ची के बयानों ने अंततः स्पष्ट कर दिया कि दुष्कर्म जैसी कोई घटना नहीं हुई थी। उसे केवल एक विशेष राजनीतिक एजेंडे के तहत ढाल बनाया गया था।
. छवि धूमिल करने का कुत्सित प्रयास
सोशल मीडिया पर भ्रामक वीडियो प्रसारित कर जनपद चम्पावत और मुख्यमंत्री की छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिगाड़ने की कोशिश की गई। यह कृत्य कांग्रेस की गिरती राजनीतिक नैतिकता और हताशा का परिचायक है।
निष्कर्ष: सत्यमेव जयते
न्याय के देवता गोल्ज्यू महाराज की इस पवित्र धरती पर अंततः सत्य की जीत हुई है और षड्यंत्रकारियों के चेहरे बेनकाब हुए हैं। कांग्रेस को अपनी इस घृणित राजनीति और मासूमों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने के लिए उत्तराखंड की जनता से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।
Ajaey Kumar
Mahendra Bhatt

