कोटद्वार में व्यवसायिक कर – कितना न्याय संगत है या जबरदस्ती? *महेन्द्र पाल सिंह रावत (लेखक पूर्व सैनिक संघर्ष समिति के अध्यक्ष हैं) *

Date:

Share post:

कोटद्वार में व्यवसायिक कर – कितना न्याय संगत है या जबरदस्ती?

 कोटद्वार के नागरिक आज एक मौलिक प्रश्न के सामने खड़े हैं *यदि मूलभूत सुविधाओं में कोई सुधार नहीं हुआ है, तो कर लगाने का औचित्य क्या है?*  
  1. वादे और वर्तमान की विसंगति 2017 – 18 में नगर निगम गठन के समय तत्कालीन महापौर और बोर्ड ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर राज्य सरकार को भेजा था कि 35 नई ग्राम सभाओं में सड़क, गली, बिजली और सीवरेज जैसी बुनियादी सुविधाओं के पूर्ण विस्तार तक किसी भी प्रकार का संपत्ति या व्यवसायिक कर नहीं लगाया जाएगा। यह निर्णय सेवा-शुल्क के सिद्धांत पर आधारित था। वर्तमान नगर निगम इकाई का गठन 23 जनवरी 2025 को हुआ। चुनाव के दौरान वर्तमान प्रतिनिधियों ने भी सार्वजनिक रूप से कहा था कि नई ग्राम सभाओं से कोई कर नहीं लिया जाएगा। इसके विपरीत, गठन के तुरंत बाद ही इन 35 ग्राम सभाओं के व्यवसायियों को व्यवसायिक कर अदायगी के नोटिस जारी कर दिए गए। यहाँ दो प्रश्न खड़े होते हैं: –
    प्रथम – जब जमीनी स्तर पर सीवरेज, सड़क और बिजली की स्थिति पूर्ववत है, तो कर वसूली की तात्कालिकता क्यों?
    द्वितीय – बोर्ड बैठक में कर पर रोक लगाने का प्रस्ताव क्यों नहीं रखा गया? यह प्रक्रिया जनादेश के साथ विश्वासघात और प्रशासनिक पारदर्शिता के अभाव को दर्शाती है। मेयर और स्थानीय विधायक की मौन स्थिति इस संदेह को और गहरा करती है।
  2. सेवा-शुल्क के सिद्धांत का उल्लंघन
    कर का संवैधानिक और प्रशासनिक आधार क्विड प्रो क्वो अर्थात “सेवा के बदले शुल्क” है। जब नागरिकों को सीवरेज, जल निकासी, सड़क और प्रकाश जैसी न्यूनतम शहरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं, तो उनसे व्यवसायिक कर वसूलना संवैधानिक समानता के सिद्धांत का उल्लंघन है।
  3. आर्थिक और सामाजिक प्रभाव
    35 नई ग्राम सभाओं की अर्थव्यवस्था मुख्यतः लघु व्यवसाय, कृषि और स्वरोजगार पर आधारित है। इन क्षेत्रों पर अतिरिक्त कर लगाना उनकी सीमित आय पर प्रत्यक्ष बोझ है और स्थानीय अर्थव्यवस्था को कमजोर करेगा। साथ ही, यह ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के बीच असमानता को बढ़ावा देगा।
  4. प्रशासनिक विश्वास का क्षरण
    नगर निगम में शामिल होने का नागरिकों का समर्थन इस अपेक्षा पर था कि सुविधाओं में गुणात्मक सुधार होगा। यदि आरंभ में ही कर का बोझ थोप दिया जाए, तो प्रशासन और जनता के बीच का विश्वास टूटता है। एक बार टूटा हुआ विश्वास पुनः स्थापित करना कठिन होता है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करता है।
  5. जनप्रतिनिधियों की संवैधानिक जिम्मेदारी
    मेयर और पार्षद जनता के प्रतिनिधि हैं, न कि केवल कर वसूली के माध्यम। उनका प्राथमिक दायित्व है कि वे राज्य सरकार के समक्ष नागरिकों के हितों को प्रस्तुत करें और तब तक कर स्थगन की मांग करें जब तक बुनियादी ढांचे का विस्तार पूर्ण न हो जाए। यदि कर अपरिहार्य है तो इसे चरणबद्ध रूप से लागू किया जाए – पहले सुविधा, फिर शुल्क।
  6. विकास की परिभाषा–विकास का अर्थ केवल राजस्व संग्रहण नहीं, बल्कि जीवन की गुणवत्ता में सुधार है। कोटद्वार के नागरिक विकास के विरोधी नहीं हैं, वे असमय और असमान कराधान के विरोधी हैं। अतः सरकार और नगर निगम प्रशासन को चाहिए कि 35 नई ग्राम सभाओं में व्यवसायिक कर की प्रक्रिया पर तत्काल स्थगन लगाकर पहले आधारभूत संरचना का विस्तार सुनिश्चित किया जाए। विकास तभी लोकतांत्रिक और टिकाऊ होता है जब वह जनसहमति और सेवा-सुनिश्चितता पर आधारित हो, न कि प्रशासनिक जबरदस्ती पर।

महेंद्र पाल सिंह रावत अध्यक्ष
पूर्व सैनिक संघर्ष समिति।

Related articles

रितेश शर्मा सरस्वती शिशु विद्या मंदिर इंटर कॉलेज जानकीनगर, कोटद्वार में अमर शहीद मनदीप सिंह रावत जी की पुण्यतिथि पर आयोजित की गई श्रद्धांजलि...

कार्यक्रम संयोजक आचार्य रोहित बलोदी ने बताया कि विगत तीन वर्षों से अमर शहीद की पुण्यतिथि के अवसर...

*रिखणीखाल:प्रधान संगठन रिखणीखाल ने जमकर विरोध किया जीवीजीरामजी का* ***अजय तिवाड़ी****

प्रधान संगठन रिखणीखाल ने जमकर विरोध किया जीवीजीरामजी का…. केंद्र सरकार द्वारा थोपी गई मनरेगा से संशोधित जीवीजीरामजी योजना...

रोटरी क्लब कोटद्वार के तत्वावधान में राजकीय प्राथमिक विद्यालय न• 6 में निशुल्क दन्त चिकित्सा परीक्षण व दन्त स्वच्छता जागरूकता शिविर

रोटरी क्लब कोटद्वार के तत्वावधान में राजकीय प्राथमिक विद्यालय न• 6 में निशुल्क दन्त चिकित्सा परीक्षण व दन्त...

*राजकीय महाविद्यालय कण्वघाटी में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी होगी आयोजित, जिसमें सतत विकास व हरित हिमालयी वृद्धि पर होगी गहन चर्चा*।

राजकीय महाविद्यालय कण्वघाटी में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी होगी आयोजित, जिसमें सतत विकास व हरित हिमालयी वृद्धि पर...