सर्वपल्ली राधाकृष्णन, एक महान भारतीय दार्शनिक, शिक्षक और भारत के दूसरे राष्ट्रपति थे। उनका जन्म 05 सितंबर, 1888 को तमिलनाडु के तिरुत्तनि में हुआ था। उन्होंने भारतीय दर्शन को पश्चिमी दुनिया में परिचित कराया और भारतीय संस्कृति और दर्शन के प्रति उनके योगदान के लिए उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया।
प्रमुख योगदान:
- *शिक्षक और दार्शनिक:
- राधाकृष्णन ने भारतीय दर्शन, विशेष रूप से वेदांत, को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया। उन्होंने भारतीय दर्शन को न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से देखा, बल्कि उसे एक तार्किक और व्यावहारिक दृष्टिकोण से भी प्रस्तुत किया। उनके प्रमुख कार्यों में “इंडियन फिलॉसफी”, “द हिंदू व्यू ऑफ़ लाइफ”, और “भगवद गीता” की व्याख्या शामिल है।

- राधाकृष्णन एक महान शिक्षक थे, और उनका मानना था कि शिक्षा समाज के सुधार और उन्नति के लिए आवश्यक है।
- उनके सम्मान में, भारत में हर साल 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने कहा था कि “शिक्षक देश के वास्तविक निर्माता होते हैं,” और यह दिन उनके शिक्षकों के प्रति आदर व्यक्त करने के लिए समर्पित है।
- *राजनीतिक जीवन:
- उन्होंने भारत की स्वतंत्रता के बाद महत्वपूर्ण राजनीतिक भूमिकाएं निभाईं। वह 1952 से 1962 तक भारत के उप-राष्ट्रपति रहे और 1962 से 1967 तक भारत के राष्ट्रपति पद पर आसीन रहे।
- राष्ट्रपति के रूप में, उन्होंने एक सादगीपूर्ण जीवन जिया और भारतीय लोकतंत्र और मूल्यों को मजबूत किया।
- अंतरराष्ट्रीय सम्मान:
- उनके विद्वता और नैतिकता के कारण उन्हें कई देशों में सम्मानित किया गया। 1954 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया, जो भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है।…………………..जे. पी कुकरेती।



