**धर्म का मार्ग:गेरुआ, भगवा कपड़े क्यों पहनते हैं साधु, संन्यासी?क्या है गेरुआ, केसरिया रंग का महत्व? आलेख ऋषि कण्डवाल ( विद्वान लेखक उत्तराखण्ड सरकार में सिंचाई राज्यमंत्री हैं)**

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गेरुआ, भगवा कपड़े क्यों पहनते हैं साधु, संन्यासी?

पहली चीज तो यह कि यह रंग एक प्रतीक है। गेरुआ रंग आप यह बताने के लिए पहनते हैं कि आपके जीवन में एक नया प्रकाश आ गया है। सुबह-सुबह जब सूर्य निकलता है, तो उसकी किरणों का रंग केसरिया होता है। आप केसरिया या जिसे भगवा, गेरुआ या नारंगी रंग भी कह सकते हैं, यही दिखाने के लिए पहनते हैं कि आपके जीवन में एक नया सवेरा हो गया है।

आज्ञा चक्र का रंग गेरुआ है

एक और बात है और वह यह कि हर चक्र का एक रंग होता है। हमारे शरीर में मौजूद सातों चक्रों का अपना एक अलग रंग है। भगवा या गेरुआ रंग आज्ञा चक्र का रंग है और आज्ञा ज्ञान-प्राप्ति का सूचक है।

तो जो लोग आध्यात्मिक पथ पर होते हैं, वे उच्चतम चक्र तक पहुंचना चाहते हैं इसलिए वे इस रंग को पहनते हैं। साथ ही आपके आभमंडल का जो काला हिस्सा होता है, उसका भी इस रंग से शु़द्धीकरण हो जाता है।

नारंगी रंग पकने का भी सूचक है। प्रकृति में जो भी चीज पकती है, वह आमतौर पर नारंगी रंग की हो जाती है। यानी अगर कोई व्यक्ति परिपक्वता और समझदारी के एक खास स्तर तक पहुंच गया है तो उसका मतलब है कि उसका रंग नारंगी हो गया। नारंगी रंग एक नई शुरुआत और परिपक्वता का सूचक है। यह आपके आभामंडल और आज्ञा चक्र से भी जुड़ा है, यह ज्ञान का भी सूचक है और यह भी बताता है कि इस इंसान ने एक नई दृष्टि विकसित कर ली है। जिसने नई दृष्टि विकसित कर ली, उसके लिए भी और जो विकसित करना चाहता है, उसके लिए भी नारंगी रंग पहनना अच्छा है।

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