कोटद्वार। नगर निगम के एक कार्यक्रम में पार्षदों को अपेक्षित सम्मान न मिलने को लेकर असंतोष सामने आया है। पार्षदों ने कार्यक्रम की व्यवस्था एवं कार्यशैली पर नाराज़गी व्यक्त करते हुए कहा कि कार्यक्रम नगर निगम का होने के बावजूद जनप्रतिनिधियों की भूमिका को सीमित कर दिया गया।
पार्षदों की उपेक्षा पर नाराज़गी, नगर निगम कार्यक्रम की कार्यशैली पर उठे सवाल
पार्षदों का कहना है कि उन्हें मंच पर केवल “शोपीस” बनाकर बैठा दिया गया, जबकि कार्यक्रम में अतिथियों के स्वागत एवं माल्यार्पण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में भी शामिल नहीं किया गया। इतना ही नहीं, कई पार्षदों को मंच पर आमंत्रित तक नहीं किया गया, जबकि मंच संचालन भी पार्षद द्वारा ही किया जाना था।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कार्यक्रम के दौरान पार्षदों को मूलभूत सम्मान तक नहीं दिया गया और उनकी उपेक्षा की गई। इस पूरे घटनाक्रम को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए पार्षदों ने भविष्य में नगर निगम के कार्यक्रमों के आयोजन हेतु पार्षदों की एक समिति गठित करने की मांग की है, ताकि जनप्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
पार्षदों ने कहा कि नगर निगम बोर्ड में सभी प्रस्ताव पार्षदों की सहमति से पारित होते हैं और बोर्ड के प्रथम जनप्रतिनिधि पार्षद ही होते हैं। ऐसे में उनकी गरिमा एवं सहभागिता का सम्मान किया जाना आवश्यक है।
