मेरा गाँव मेरी जन्म भूमि माटि का कर्ज* *आलेख और संकलन विमल भट्ट*

Date:

Share post:

*मेरा गाँव मेरी जन्म भूमि माटि का कर्ज* : आलेख और संकलन विमल भट्ट, (आप कहानी और आलेख, स्मरण विधा में बेहतरीन लेखनी के लिए जाने जाते हैं साहित्य के साथ पौड़ी जिले के बेतालधार में फार्मेसी अधिकारी के पद पर सेवा दे रहे हैं आप का जन्म पौड़ी जनपद के विकास खण्ड कोट के अन्तर्गत सितोंस्यू पट्टी के फलस्वाडी़ गाँव में हुआ । )

बीरू की उम्र 60 के पार हो चुकी थी !!! जीवनभर कभी दिल्ली तो कभी देहरादून में ही नौकरी की !! पितृ देवताओं और नरसिंह भेरों की कृपा से एक दुमंजिला गमले से सजा मकान भी देहरादून में था !! बच्चे दिल्ली में सटल हो चुके थे और पति पत्नी देहरादून में ही दिनभर टीवी सीरियल और समाचार देखकर समय काट रहे थे !!!

बीरू का पुश्तेनी मकान पहाडों में बसे एक गांव में था जहाँ आज सड़क,बिजली ,पानी, सबकुछ था पर कई वर्षों पूर्व गाँव छोड़कर वो देहरादून जा बसा था ताकि बच्चो को अच्छी एजुकेशन दे सके !! जिस एजुकेशन की वजह से आज हर संपन्न व्यक्ति देहरादून और हल्द्वानी की तरफ दौड़ रहा है।
बीरू ने भी बच्चों को देहरादून में पढ़ाया लिखाया और आज बच्चे अपने बच्चों के साथ व्यस्त हो चुके थे !!!
अब बीरू का बुजुर्ग मन बार बार अपने गांव की तरफ खिंच रहा था !!! उम्र के इस पड़ाव पर उसे बार बार गांव की पुरानी यादें आती रहती थी।। कभी काफल बुरांश याद आते तो कभी गाय चराने वाले दिन।
आखिरकार एकदिन मन बनाकर बीरू अपनी पत्नी को लेकर गाँव पहुँच गया।। उनके हिस्से का घर तो बंजर पड़ चुका था इसलिए अपने ही कुटुम्ब के दीवान चाचा के घर में दोनो रुक गए !!
सुबह सबसे पहले अपने खण्डहर पड़े मकान में गए तो देखा जगह जगह कंडाली उगी थी और इस खंडहर मकान के कोने में कुछ जंग लगे त्रिशूल और चिमटे गड़े हुए थे !!! आज इस खंडहर मकान में उस चूल्हे के निशान भी थे जिसमे कभी बीरू की ब्वे (मां) रोटी पाथकर अपने बीरू को खिलाती थी । कोदे की रोटी, भंगजीरै की चटनी और छांस का गिलास अपनी बीरू को देते हुए माँ बड़ा दुलार करती थी।

इस खंडहर मकान को एकटक देखते हुए बीरू को माँ ,पिताजी और दादी की याद आने लगी और आंखों से झरझर अश्रुधारा बहने लगी , पत्नी का हाथ पकड़कर रोने लगे !! रात को सपने में (ब्वे)माँ आई और अपने बीरू को दुलारती रही !!!
अगले दिन ही सुबह ही बीरू ने एक ठेकेदार को बुलाकर मकान का काम शुरू करवा दिया । अब दिनभर खुद खड़े होकर काम देखने लगे !! खण्डहर से मिलने वाली माँ की दथली (दरांती), ओखली, पर्या, पिता का हुक्का, ताकुली ,कल्हाडी आदि को संभालकर ख़ुद साफ करने लगे !! इन चीजों को देखकर धीरू को ब्वे बाबा की बहुत खुद (याद) आने लगती !!


कुछ ही महीनों में पहाड़ी आकृति में ही ढलुवा छत वाला मकान बनकर तैयार हो गया !! जिसमे उन्होंने पुरानी चीजों को सरंक्षित करके रखा । गृहप्रवेश में बच्चो को भी दिल्ली से बुलाया पर छुट्टी नही है…. पापा…!!! बोलकर बच्चे न आ पाए !!!
अब बीरू पूरी तरह से गाँव मे ही रहने लगा!! पति पत्नी दोनों पहले टीचर थे तो शीघ्र ही एक प्राइवेट स्कूल गाँव मे खोल दिया !!निर्धन बच्चो को निःशुल्क पढाने लगे और जो बच्चे अनाथ थे उनको अपने ही साथ रखकर पढाने लगे !!! गांव में ही होमस्टे ही शुरू करके दो चार नौजवानों को रोजगार भी दे रहे थे वहीं जानकर थे तो ऐसी जड़ी बूटियां उगाने के लिए गांववालो को प्रेरित कर रहे थे जिन्हे बंदर सुंवर नुकसान नही करते।। कुलमिलाकर आज बीरू उम्र के इस पड़ाव पर अपने इस गांव को जहां से वो वर्षो पहले पलायन कर चुके थे आबाद करके एक मॉडल विलेज बना चुके थे ।।

बीरू का कहना था कि आज वो अपनी जन्मभूमि का कर्ज लौटा रहे हैं और अपने पितरों की शांति के लिए इन सुंदर पहाड़ों के शांत और खुशनुमा वातावरण में अपना बाकी का जीवन गुजार रहे हैं !!!
इस प्रकार पलायन कर चुका एक परिवार, रिवर्स पलायन की दिशा में गांव को पुनः आबाद करने आ गया था !!!
पुनः एक दूसरी प्रस्तुति के साथ 🙏🙏

Holi advertisement
Holi Advertisement
spot_img

Related articles

*अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस : समानता, सम्मान और सशक्तिकरण का प्रतीक- मानव सभ्यता के विकास में नारी का अतुलनीय योगदान*: *आलेख ख्याति प्राप्त शिक्षक जे०पी०...

अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस : समानता, सम्मान और सशक्तिकरण का प्रतीक- मानव सभ्यता के विकास में नारी का योगदान...

जीवन का सर्जन, श्रृंगार, विकास एवं ममता का आधार सभी महिलाओं को अंतर्राष्ट्रीय दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं ।

जीवन का सर्जन, श्रृंगार, विकास एवं ममता का आधार सभी महिलाओं को अंतर्राष्ट्रीय दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं ।डॉ...

पूर्व सैनिक संघर्ष समिति के अध्यक्ष महेन्द्र पाल सिंह रावत ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर प्रेषित की शुभकामनाएँ;...

महंगा हुआ सिलेंडर अभी महंगाई के और लग सकते हैं झटके!: अजय तिवाड़ी

महंगा हुआ सिलेंडर अभी महंगाई के और लग सकते हैं महंगाई के झटके: ईरान अमेरिका युद्ध का प्रभाव...