मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय से मुख्य फार्मेसी अधिकारी के पद पर सेवानिवृत्त ग्राम पापड़ी नौदानू विकास खण्ड रिखणीखाल निवासी हरीश चन्द्र बुडाकोटी को सहयोगियों ने बताया कार्यकुशल, व्यावहारिक, तथा बेहतरीन इंसान, प्रेषित की शुभकामनाएं।

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हरीश चन्द्र बुडाकोटी आत्मज स्वर्गीय जगदीश प्रसाद बुडाकोटी ग्राम पापड़ी पैनौ पोस्ट आफिस नौदानू वाया रिखणीखाल जनपद पौड़ी गढ़वाल उत्तराखण्ड, द्वारा फार्मेसी का डिप्लोमा राजकीय पालिटैक्निक श्रीनगर पौड़ी गढ़वाल से पूर्ण कर दिनांक 5,2,1986 में फार्मेसी अधिकारी के पद पर कार्यालय मुख्य चिकित्सा अधिकारी टिहरी गढ़वाल के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र टाइप ए कोडरना में योग दान सूचना देकर फार्मेसी अधिकारी के पद का कार्य भार ग्रहण कर अपने पद का कार्य करना सुनिश्चित किया,

तथा कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचना, के विचार को अपने जीवन का लक्ष्य मानकर टिहरी गढ़वाल के टाइप ए कोडरना व जनपद पौड़ी गढ़वाल के विभिन्न चिकित्सालयों प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र मोटाढाक, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र रथुवाढाब, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र भृगुखाल, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बडियारगांव, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र सेंधीखाल, में सेवा दी तथा केन्द्रीय औषधि भण्डार अधीन मुख्य चिकित्सा अधिकारी पौड़ी गढ़वाल में मुख्य फार्मेसी अधिकारी के पद पर सेवा दी तथा दिनांक 31,12,2024 को मुख्य फार्मेसी अधिकारी के पद से केन्द्रीय औषधि भण्डार के केन्द्र से सेवानिवृत्त हुए हैं, अपने सहकर्मियों अधिकारियों तथा जिन चिकित्सा केन्द्रो में उन्होंने सेवा दी बडे़ ही भाईचारे तथा आत्मीयता के साथ अपना व्यवहार बनाये रखा तथा जनता के बीच भी बडे़ सौहार्द पूर्ण वातावरण बनाकर चिकित्सा सेवा दी यही उनका व्यवहार तथा सद्भावना रही, सेवानिवृत्त होने के बाद वे बताते हैं कि वै अभी अपने कार्य क्षेत्र से अवकाश लेकर आये है तथा पुनः कार्य क्षेत्र में दीन दुखियों बीमारी से ग्रस्त लोगों की सेवा में जाना है। वे बताते हैं कि मुझे धीरे धीरे अहसास होने लगा है कि मैं अब सेवानिवृत्त हो गया हूँ क्योंकि जो सेवा हम देते थे वह सेवा अब छूट चुकी है साथियों से मिलना बातें करना ना के बराबर हो चला है वार्तालाप का माध्यम केवल और केवल दूरभाष ही रह गया जो कहीं ना कहीं एकाकी पन का अहसास करा जाता है, जीवन में असफलता हमारी परीक्षा लेती है लेकिन विकास के पथ पर अग्रसर भी करती है

, तथा शिक्षा भी देती है साथ ही पूर्ण ज्ञान की ओर ले जाती है। इसलिए असफलता से भय नही करना चाहिए वह तो जीवन पथ पर मित्र की तरह आती है और सफलता के लिए प्रेरित करती है कि कहीं ना कहीं प्रयास पूरे मन से नही हुआ है। तथा जब हम अपने मस्तिष्क को समृद्ध करेंगे तब अपने शरीर की देखभाल भी बेहतर ढंग से कर पायेंगे तथा सार्थक जीवन का मतलब कि वर्तमान को गले लगाकर आगे बढ़ना है, अपनी इच्छाओं को छोड़कर अस्तित्व की सुंदरता में ही आनन्द को खोजने की जरूरत है, अतीत और भविष्य के प्रति हमारा जुनून हमारे जीवन में कहीं ना कहीं दुख देता है इसलिए खुद को वर्तमान के प्रति समर्पित कर देना चाहिए, पूर्व फार्मेसी अधिकारी हरीश बुडाकोटी कहते हैं कि यह मुझे अपने कार्यक्षेत्र से सेवानिवृत्ति के पश्चात महसूस हुआ।पौड़ी जिले के बेतालधार में सेवा दे रहे फार्मेसी अधिकारी श्री विमल भट्ट ने पूर्व फार्मेसी अधिकारी हरीश बुडाकोटी को एक मेहनती, कर्मठ तथा अच्छे व्यवहार कुशल फार्मेसी अधिकारी बताते हुए सेवानिवृत्ति पर उन्हें शुभकामनाएँ प्रेषित की है ं

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