*मां नर्मदा के उद्गम की सुंदर कथा जिसे हरेक सनातनी को अवश्य सुननी चाहिए* कैसे हुआ नर्मदा का नामकरण* *आलेख और संकलन ऋषि कण्डवाल ( लेखक उत्तराखण्ड सरकार में सिंचाई राज्यमंत्री हैं)*

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कहा जाता है कि अंधकासुर राक्षस का वध करने के बाद भगवान शिव बहुत थक गए थे और अमरकंटक की पहाड़ियों पर विश्राम कर रहे थे। उनके माथे से गिरे पसीने की बूंदों से एक अत्यंत सुंदर कन्या का जन्म हुआ। चूँकि उन्होंने शिव के मन को ‘नर्म’ (सुख) प्रदान किया, इसलिए शिव ने उनका नाम ‘नर्मदा’ रखा। शिव ने उन्हें आशीर्वाद दिया कि प्रलय के समय भी उनका अस्तित्व समाप्त नहीं होगा।नर्मदा का विवाह सोनभद्र (सोन नद) के साथ तय हुआ था। दोनों के बीच प्रेम था, लेकिन विवाह से पहले नर्मदा के मन में अपने होने वाले पति को देखने की इच्छा हुई।नर्मदा ने अपनी प्रिय सखी और दासी जुहिला को अपना संदेश और उपहार लेकर सोनभद्र के पास भेजा। साथ ही उन्होंने जुहिला को अपने आभूषण भी पहना दिए ताकि वह राजकुमारी जैसी लगे।जब सोनभद्र ने जुहिला को सजे-धजे रूप में देखा, तो वे उसे ही नर्मदा समझ बैठे और उसके सौंदर्य पर मोहित हो गए। जुहिला के मन में भी पाप आ गया और उसने सोनभद्र को सच नहीं बताया।अगर आपको कथा संग्रह की पोस्ट पसंद आती है तो आज ही सब्सक्राइब करें कथा संग्रह जब बहुत देर तक जुहिला वापस नहीं आई, तो नर्मदा स्वयं सोनभद्र से मिलने चल पड़ीं। वहाँ पहुँचकर उन्होंने देखा कि सोनभद्र और जुहिला एक-दूसरे में मग्न हैं। अपने प्रेमी और अपनी दासी का यह विश्वासघात देखकर नर्मदा क्रोध और ग्लानि से भर गईं।उन्होंने उसी क्षण निर्णय लिया कि वे अब कभी विवाह नहीं करेंगी और अकेली (कुमारी) ही रहेंगी।उन्होंने अपना रास्ता बदल लिया और सोनभद्र (जो पूर्व की ओर बहते हैं) के विपरीत पश्चिम की ओर मुड़ गईं। यही कारण है कि भारत की अधिकांश नदियाँ पूर्व की ओर बहती हैं, लेकिन नर्मदा पश्चिम की ओर बहती हैं।पौराणिक मान्यताओं में एक और चौंकाने वाली बात यह है कि गंगा में स्नान करने से जो पुण्य मिलता है, वह नर्मदा के केवल दर्शन मात्र से मिल जाता है। कथाओं के अनुसार, जब गंगा स्वयं पापियों के पाप धोकर काली हो जाती हैं, तो वे एक काली गाय का रूप धरकर नर्मदा में स्नान करने आती हैं ताकि खुद को शुद्ध कर सकें।नर्मदा की कहानी एक ऐसी स्त्री की कहानी है जिसने धोखे के आगे झुकने के बजाय अपनी राह खुद चुनी। आज भी नर्मदा का “उल्टा बहना” उनके उसी स्वाभिमान और क्रोध का प्रतीक माना जाता है।

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