*बीरोंखाल: पहाडी़ शादी समारोह, सहभागिता परंपराओं का अनूठा समागम* *पहाड़ी शादी – जहाँ संस्कृति संगीत बनकर बजती है: महेन्द्र पाल सिंह रावत (लेखक पूर्व संघर्ष समिति के अध्यक्ष हैं)*

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पहाड़ी शादी – जहाँ संस्कृति संगीत बनकर बजती है 🏔️🎶

पहाड़ की शादी सिर्फ दो लोगों का मिलन नहीं… यह हमारी जड़ों, हमारी बोली और हमारे अपनत्व का उत्सव है। 🌿

आज जब शादियाँ चकाचौंध और दिखावे की हो रही हैं, तब भी पहाड़ (बीरोंखाल) की शादी हमें याद दिलाती है कि *सच्ची खुशी सादगी और साथ में होती है*।  

क्या खास है पहाड़ी शादी में?मंगल गीत न कोई ऑटो-ट्यून, न रिकॉर्डिंग… सिर्फ माँ-बहनों के कंठ से निकले वो शब्द जो दुल्हन की आँखों में आँसू और होंठों पर मुस्कान दोनों ला देते हैं।
गढ़वाली बैंड– ढोल-दमौं की थाप सुनते ही बूढ़े भी जवान हो जाते हैं। यह धुन हमारे पहाड़ की धड़कन है। जिया कोरी कोरी खादूं…….., रम दई का होटला नैनीताल मा………….. आदि
सामुदायिक सहयोग– यहाँ शादी एक परिवार की नहीं, पूरे गाँव की होती है। कोई लकड़ी लाता है, कोई खाना बनाता है – यही है असली “हम” की भावना।
सादा लेकिन समृद्ध भोजन– मंडुवे की रोटी, भट्ट की चुरकानी, झंगोरे की खीर… प्रकृति का स्वाद और प्यार एक थाली में।
💡 नागरिकों के लिए संदेश
आइए, हम अपनी संस्कृति को भूलें नहीं, बल्कि उसे गर्व से अपनाएं।
महंगा दिखावा नहीं, अपनेपन का रिवाज बचाएं
जब हम अपनी परंपराओं को सम्मान देंगे, तभी हमारी पहचान और हमारी जड़ें मजबूत होंगी।
पहाड़ की शादी सिखाती है – खुशी वो नहीं जो खर्च करने से मिले, खुशी वो है जो बाँटने से बढ़े। ❤️

आपकी शादी या आपके गाँव की शादी का सबसे यादगार पल कौन सा था? कमेंट में जरूर बताइए 👇  

महेंद्र पाल सिंह रावत अध्यक्ष
पूर्व सैनिक संघर्ष समिति।

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