भारतीय संविधान की प्रस्तावना क्या है (Preamble of Indian Constitution)-“✍️”हम भारत के लोग- आलेख और संकलन शिक्षक जे. पी. कुकरेती। लेखक ख्याति प्राप्त शिक्षक हैं।

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“भारतीय संविधान की प्रस्तावना क्या है (Preamble of Indian Constitution)-“

✍️”हम भारत के लोग-………..”

✍️ “प्रस्तावना के चार घटक-Four Components of Preamble-“
1️⃣यह इस बात की ओर इशारा करता है कि, संविधान के अधिकार का स्रोत भारत के लोगों के साथ निहित है।।
2️⃣यह इस बात की घोषणा करता है कि, भारत एक, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक और गणतंत्र राष्ट्र है।।
3️⃣यह सभी नागरिकों के लिए न्याय, स्वतंत्रता, समानता को सुरक्षित करता है तथा राष्ट्र की एकता और अखंडता को बनाए रखने के लिए भाईचारे को बढ़ावा देता है।।
4️⃣इसमें उस तारीख (26 नवंबर 1949) का उल्लेख है, जिस दिन संविधान को पूर्णता तैयार कर आत्मार्पित किया गया था।।

✍️ संप्रभुता (Sovereignty) – प्रस्तावना यह दावा करती है कि, भारत एक संप्रभु देश है। सम्प्रुभता शब्द का अर्थ है कि, भारत किसी भी विदेशी और आंतरिक शक्ति के नियंत्रण से पूर्णतः मुक्त सम्प्रुभता सम्पन्न राष्ट्र है। भारत की विधायिका को संविधान द्वारा तय की गयी सीमाओं के अंतर्गत कानून बनाने का पूर्ण अधिकार है।।

समाजवादी – Socialist- “समाजवादी” शब्द संविधान के 1976 में हुए 42 वें संशोधन अधिनियम द्वारा प्रस्तावना में जोड़ा गया। समाजवाद की प्राप्ति लोकतांत्रिक तरीकों से होती है। भारत ने ‘लोकतांत्रिक समाजवाद’ को अपनाया है। लोकतांत्रिक समाजवाद एक मिश्रित अर्थव्यवस्था में विश्वास रखती है। जहां निजी और सार्वजनिक दोनों क्षेत्र मिलकर कार्य करते हैं।

धर्मनिरपेक्ष-Secular “धर्मनिरपेक्ष” शब्द संविधान के 1976 में हुए 42वें संशोधन अधिनियम द्वारा प्रस्तावना में जोड़ा गया। भारतीय संविधान में धर्मनिरपेक्ष शब्द का अर्थ है कि- भारत में सभी धर्मों को राज्यों से समानता, सुरक्षा और समर्थन पाने का अधिकार है। संविधान के भाग-III के अनुच्छेद 25 से 28 एक मौलिक अधिकार के रूप में धर्म की स्वतंत्रता को सुनिश्चित करता है।

✍️लोकतांत्रिक – Democratic लोकतांत्रिक शब्द का अर्थ है कि- संविधान की स्थापना एक सरकार के रूप में होती है,जिसे चुनाव के माध्यम से लोगों द्वारा निर्वाचित होकर अधिकार प्राप्त होते हैं। प्रस्तावना इस बात की पुष्टि करती हैं कि, भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जिसका अर्थ है कि-सर्वोच्च सत्ता लोगों के हाथ में है। लोकतंत्र शब्द का प्रयोग राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक लोकतंत्र के लिए प्रस्तावना के रूप में प्रयोग किया गया है। सरकार के जिम्मेदार प्रतिनिधि, सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार, एक वोट एक मूल्य, स्वतंत्र न्यायपालिका आदि भारतीय लोकतंत्र की विशेषताएं हैं।

✍️ गणराज्य-Republic- एक गणतंत्र अथवा गणराज्य में, राज्य का प्रमुख प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से लोगों द्वारा चुना जाता है। भारत के राष्ट्रपति को लोगों द्वारा परोक्ष रूप से चुना जाता है तथा संसद औऱ राज्य विधानसभाओं में प्रतिनिधियों को प्रत्यक्ष निर्वाचन से। इसके अलावा, एक गणतंत्र में, राजनीतिक संप्रभुता एक व्यक्ति, परिवार या कुछ वर्ग विशेष के बजाय लोगों के हाथों में निहित होती है।

✍️न्याय-Justice- प्रस्तावना में न्याय शब्द को तीन अलग-अलग रूपों में समाविष्ट किया गया है- सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक। जिन्हें मौलिक और नीति निर्देशक सिद्धांतों के विभिन्न प्रावधानों के माध्यम से हासिल करने की बात कही गई है।प्रस्तावना में सामाजिक न्याय का अर्थ- संविधान द्वारा बराबर सामाजिक स्थिति के आधार पर एक न्यायसंगत समाज बनाने से है। आर्थिक न्याय का अर्थ- समाज के अलग-अलग वर्ग, समुदाय, सदस्यों के बीच संपति के समान वितरण से है। जिससे संपति कुछ हाथों में ही केंद्रित नहीं हो सके। राजनीतिक न्याय का अर्थ- सभी नागरिकों को राजनीतिक भागीदारी में बराबरी के अधिकार से है। भारतीय संविधान प्रत्येक वोट के लिए सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार और समान मूल्य प्रदान करता है।।

✍️स्वतंत्रता-Liberty- राज्य के प्रत्येक नागरिक को अपने समुचित विकास हेतु लोकतांत्रिक मूल्यों के तहत सभी प्रकार की स्वतंत्रता संविधान प्रदान करता है।

✍️ समानता-Equality- समानता का अभिप्राय-समाज के किसी भी वर्ग के खिलाफ विशेषाधिकार या भेदभाव को समाप्त करने से है। संविधान की प्रस्तावना देश के सभी लोगों के लिए स्थिति और अवसरों की समानता प्रदान करती है। संविधान देश में सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक समानता प्रदान करने का पूरा प्रयास करता है।।

✍️भाईचारा-Fraternity- भाईचारे का अर्थ बंधुत्व की भावना से है। संविधान की प्रस्तावना व्यक्ति और राष्ट्र की एकता और अखंडता की गरिमा को बनाये रखने के लिए लोगों के बीच भाईचारे को बढावा देती है।

📒 …………..इस प्रकार स्वतंत्र भारत के संविधान की प्रस्तावना खूबसूरत शब्दों की भूमिका से बनी हुई है। इसमें बुनियादी आदर्श, उद्देश्य और दार्शनिक भारत की अवधारणा शामिल है। ये सब संवैधानिक प्रावधानों के लिए तर्कसंगतता अथवा निष्पक्षता प्रदान करते हैं.

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