चाक्यूसैण: बाल लेखन कार्य शाला का दूसरा दिन बच्चों ने सीखे विज्ञान के कई खेल

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चाक्यूसैण बाल लेखन
कार्यशाला का दूसरा दिन

चाक्यूसैण बाल लेखन
कार्यशाला का दूसरा दिन

बच्चों ने सीखे विज्ञान के कई खेल

सब्जियों को संरक्षित करने, दूध से मक्खन बनने आदि लोक विज्ञान को बच्चों ने समझा

बच्चे नृत्य के साथ सीख रहे हैं पहाड़े

द्वारीखाल (पौड़ी) । बालसाहित्य संस्थान अल्मोड़ा द्वारा उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी परिषद के सहयोग से राजकीय इंटर कॉलेज चाक्यूसैण में चल रही बच्चों की 5 दिवसीय बाल लेखन कार्यशाला के दूसरे दिन की शरूआत ‘ज्ञान का दीया जलाने’ समूह गीत से हुई। आज अध्यक्ष मंडल में मनदीप, अनुराग, हनी, नीरज व साक्षी को शामिल किया गया। आज संपन्न शब्द लेखन प्रतियोगिता,अंग्रेजी लेखन प्रतियोगिता, पहाड़ा लिखो प्रतियोगिता व खेल प्रतियोगिताओं में साहिल, मयंक, नीरज, अलक्षित, कनिष्का, साक्षी, वंदना, सोनिया व आदित्य को पुरस्कार में बालसाहित्य दिया गया। आज बच्चों को तोता कहता है, बच्चे से बच्चा, नेताजी की खोज, जैसा में कहूं, कितने भाई कितने, कितना बड़ा पहाड़, पिज्जा हट, एक दो तीन आदि खेल कराए गए। देहरादून से आए भारत ज्ञान विज्ञान समिति के अग्रिम सुंदरियाल ने बच्चों को विज्ञान के कई खेल कराए । आग खाने, मंत्र द्वारा नारियल में आग पैदा करने, मनचाही मिठाई का स्वाद चखने, पौलीथीन की थैली को आग के ऊपर रखकर चाय बनाने आदि विज्ञान के कई प्रयोगों की जानकारी बच्चों को दी गई। भारत ज्ञान विज्ञान समिति उत्तराखंड के प्रांतीय महासचिव कमलेश खंतवाल ने कहा कि कुछ लोग हाथ में बभूत पैदा करने आदि चमत्कार करके गांव की भोलीभाली जनता को ठगते हैं। उन्होंने कहा कि ये कोई चमत्कार नहीं बल्कि विज्ञान के साधारण से प्रयोग हैं। उन्होंने कहा कि विज्ञान के आज के युग में भी हमारे समाज में कई अंधविश्वास व कुरीतियां व्याप्त है। इसके लिए बच्चों के मन में बचपन से ही वैज्ञानिक सोच जाग्रत करने की आवश्यकता है।
शिक्षाविद् एवं भारत ज्ञान विज्ञान समिति की समता की राज्य संयोजिका डॉ. उमा भट्ट ने बच्चों को कविता लेखन की बारीकियां सिखाई। उन्होंने महिला दिवस की अग्रिम शुभकामनाएं देते हुए कहा कि महिला व पुरुष एक गाड़ी के दो पहिए हैं। एक पहिए के बिना गाड़ी नही चल सकती है परंतु महिलाओं को आज भी दोयम दर्जे का समझा जाता है। उन्होंने बालिकाओं से कहा कि उन्हें अपनी पढ़ाई पूरी करके सबसे पहले आत्मनिर्भर होना होगा। अपनी सुरक्षा के लिए भी तत्पर रहना होगा।
राजकीय इंटर कालेज के प्रधानाचार्य जगमोहन सिंह बिष्ट ने कहा कि गैर शैक्षणिक गतिविधियों से भी बच्चे काफी कुछ सीखते हैं। उन्होंने संस्था में बाल लेखन कार्यशाला आयोजित करने के लिए राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद देहरादून का आभार व्यक्त किया।
बालसाहित्य संस्थान अल्मोड़ा के सचिव व बालप्रहरी पत्रिका के संपादक उदय किरौला ने निबंध लेखन की जानकारी देते हुए कहा कि निबंध साहित्य की वह विधा है जिसके लेखन में कोई बंधन नहीं होता है। उन्होंने कहा नि का आशय नहीं तथा बंध का आशय बंधन से होता है। ‘पुस्तक’ विषय पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि यदि पुस्तक पर निबंध लिखा जाएगा तो सबसे पहले पुस्तक की पृष्टभूमि यानी जब पुस्तक नहीं थी। उसके बाद पुस्तक के आकार प्रकार, पुसतक के भाग , पुस्तक की उपयोगिता और अंत में उपसंहार लिखा जाएगा।
आज बच्चों ने अपनी हस्तलिखित पुस्तक के लिए दूध से मक्खन बनने की प्रक्रिया, घर गांव में सब्जियां संरक्षित करने, अचार बनने व कंपोस्ट खाद बनने आदि विषयों पर निबंध तैयार किए।
कविता सत्र में बच्चों ने मेरा स्कूल, मेरा गांव, कूड़ेदान, मोबाइल, फूल, कंप्यूटर, बादल, भोजन की बरबादी, बेटी बचाओ,इंद्रधनुष, बेटियां नहीं हैं कम तथा विज्ञान आदि विषयों पर कविताएं तैयार की। बच्चों ने पहले दिए हुए शब्दों के आधार पर कविता तैयार की। बाद में दिए हुए शब्दों के आधार पर कविता तैयार की। बाल कवि सम्मेलन के लिए संचालक,अध्यक्ष तथा मुख्य अतिथि का चुनाव खुले मतदान के आधार पर कराया गया। इस बहाने बच्चों ने लोकतांत्रिक प्रणाली को समझते हुए बच्चों की प्रस्तुति के आधार पर खुले मतदान से संचालकों का चुनाव किया।
बच्चों की रचनाओं को जोड़कर पंकज सिंह रावत द्वारा संपादित दीवार पत्रिका ‘बाल मन’ तथा मीना कुकरेती द्वारा संपादित दीवार पत्रिका ‘बाल विचार’ दो दीवार पत्रिकाओं का लोकार्पण अतिथियों द्वारा किया गया।
इस अवसर पर जय रतन नेगी, सुनीता बडौला, राकेश तिवाड़ी, आबिद अहमद, विवेक डबराल, सुरेंद्र सिंह रावत आदि शिक्षक व शिक्षिकाएं उपस्थिति थी। कार्यशाला में 73 बच्चे प्रतिभाग कर रहे हैं।

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