*वर्दी बदलती है कर्तव्य नही: महेन्द्र पाल सिंह रावत अध्यक्ष पूर्व सैनिक संघर्ष समिति कोटद्वार*

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प्रेस विज्ञप्ति

“वर्दी बदलती है, कर्तव्य नहीं” – एक नई शुरुआत का संकल्प

जय हिंद साथियों 🇮🇳

आज दिनांक 04 जून 2026 को कोटद्वार की पावन धरती पर एक ऐसा भावुक और प्रेरणादायी दृश्य देखने को मिला, जिसने साबित कर दिया कि फौजी कभी सेवानिवृत्त नहीं होता – वह सिर्फ मोर्चा बदलता है। 11 गढ़वाल राइफल्स के गौरवशाली पूर्व सैनिकों द्वारा आगामी 30 जून 2026 को भारतीय सेना से सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्त होने वाले अपने भाइयों के लिए एक गरिमामय विदाई समारोह का आयोजन किया गया। यह कोई साधारण विदाई नहीं थी। यह एक मशाल का हस्तांतरण था – सीमा की वर्दी से समाज की वर्दी तक का सफर। विदाई नहीं, नई जिम्मेदारी की शुरुआत है कार्यक्रम में जब सेवानिवृत्त होने वाले जवानों ने पूर्व सैनिकों के कंधों पर आदरपूर्वक हाथ रखकर कहा, “भाई, हम आने वाले दिनों में सेना की वर्दी उतार देंगे, लेकिन हम सामाजिक जीवन की वर्दी धारण कर लेंगे और आपके साथ संगठित होकर समाज के लिए कार्य करेंगे”, तो हर आंख नम और हर दिल गर्व से भर गया। सच है। सेना में हम देश की सीमाओं के प्रहरी थे। आज से हम समाज की सीमाओं के प्रहरी हैं – भ्रष्टाचार के खिलाफ, अन्याय के खिलाफ, नशे के खिलाफ, और टूटते हुए सामाजिक ताने-बाने के खिलाफ। अब जवाबदेही दोगुनी है सेना में हम आदेश का पालन करते थे। अब हमें समाज को दिशा देनी है। वहां हम दुश्मन से लड़ते थे। यहां हमें कुरीतियों, गरीबी, अशिक्षा और बेरोजगारी से लड़ना है।

 एक फौजी जानता है कि संगठित होकर लड़ने पर ही जीत मिलती है। इसीलिए आज 11 गढ़वाल राइफल्स के पूर्व सैनिकों ने संकल्प लिया है – अब गांव-गांव में ‘पूर्व सैनिक चौपाल’ लगेगी, शहीद परिवारों का दुख-दर्द बांटा जाएगा, अग्निवीर युवाओं को सही राह दिखाई जाएगी, और ‘वीरभूमि उत्तराखंड’ को नशामुक्त व स्वाभिमानी बनाया जाएगा।

सिविल लाइफ नहीं, ‘गौरवमयी सिविल लाइफ’ हमारे साथियों से हम सिर्फ इतना कहते हैं – सेवानिवृत्ति के बाद घर बैठना एक फौजी को शोभा नहीं देता। आपने 17-20 साल तक तिरंगे की आन के लिए सियाचिन की बर्फ और राजस्थान की धूप सही है। अब वही जज्बा, वही अनुशासन, वही नेतृत्व समाज को दीजिए। प्रधान बनो, शिक्षक बनो, कोच बनो, किसान बनो, उद्यमी बनो – पर हर जगह एक फौजी की तरह बनो। ताकि कल जब कोई बच्चा आपसे पूछे कि ‘सेवानिवृत्ति के बाद क्या किया?’, तो आप सीना तानकर कह सको – ‘देश की सेवा जारी है साहब, बस वर्दी का रंग बदल गया है।’

11 गढ़वाल राइफल्स का संदेश

“नमक, निशान, नाम” – ये गढ़वाल राइफल्स का ध्येय-वाक्य सिर्फ पलटन तक सीमित नहीं है। यह अब हर पूर्व सैनिक के जीवन का ध्येय-वाक्य है।

  • नमक: देश और समाज के प्रति वफादारी कभी न छोड़ना।
  • निशान: तिरंगे का मान और पलटन का गौरव हर कदम पर ऊंचा रखना।
  • नाम: ऐसा कार्य करना कि आने वाली पीढ़ी कहे – ‘वो देखो, फौजी जा रहा है।’ सेना से विदा ले रहे हमारे भाइयों, आपके स्वस्थ, सुखी और गौरवमयी नागरिक जीवन की हम कामना करते हैं। याद रखना, पलटन का गेट भले ही पीछे छूट जाए, पर पलटन का भाईचारा और पलटन का उसूल जिंदगी भर साथ चलता है। इस अवसर बीरेंद्र सिंह संयोजक, रवींद्र सिंह, अध्यक्ष, महेंद्र कोटनाला, ओम प्रकाश, जितेंद्र, महेंद्र, गाजे सिंह, गबर सिंह, महाबीर सिंह, शेर सिंह, मोहन सिंह, बिपिन सिंह और सुरेश सिंह आदि उपस्थित थे।

क्योंकि फौजी कभी मरता नहीं – वो सिर्फ मोर्चा बदलता है।

बद्री विशाल की जय जय हिंद
अजीत है, अभिजीत है – गढ़वाल राइफल्स

महेंद्र पाल सिंह रावत अध्यक्ष पूर्व सैनिक संघर्ष समिति
पूर्व सैनिक एवं उपाध्यक्ष
11 गढ़वाल राइफल्स पूर्व सैनिक संघ, कोटद्वार

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