भगवान भाव के भूखे: ‘गोकुल का मेरा कांडा रे’ गाने वाली अंजान महिला सोशल मीडिया पर बनी चर्चा का विषय

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देहरादून/गढ़वाल। सोशल मीडिया पर इन दिनों एक अंजान महिला का भजन तेजी से वायरल हो रहा है। महिला भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में भाव-विभोर होकर प्रसिद्ध भजन “गोकुल का मेरा कान्हा रे” को अपने सहज भाव में “गोकुल का मेरा कांडा रे” गाती हुई सुनाई देती है। यही सरल और निष्कपट भक्ति लोगों के दिलों को छू रही है और महिला देखते ही देखते पूरे गढ़वाल-कुमाऊँ में चर्चा का विषय बन गई है।

Credit- Social Media

मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण को नाम से अधिक भक्त का भाव प्रिय होता है। इसी भावना को यह घटना भी दर्शाती है। बताया जा रहा है कि महिला ने किसी प्रसिद्धि, आय या सोशल मीडिया पर लोकप्रिय होने की इच्छा से नहीं, बल्कि ईश्वर के प्रति अपने सच्चे प्रेम और श्रद्धा के कारण यह भजन गाया।

यह भजन मूल रूप से संत शिरोमणि गौपाल मणि जी महाराज द्वारा अपनी कथाओं में गाया जाता है। उसी भजन से प्रेरित होकर महिला ने अपने स्थानीय उच्चारण और सहज भाव में “कान्हा” के स्थान पर “कांडा” शब्द का प्रयोग किया, जिसे लोगों ने श्रद्धा और अपनत्व के साथ स्वीकार किया।

गढ़वाल और कुमाऊँ में “कांडा” नाम से कई गांव भी हैं। वहीं भगवान श्रीकृष्ण के अनेक नाम—कान्हा, गोपाल, गिरधर, लीलाधर, रणछोड़, माखनचोर और जगदीश—प्रचलित हैं। धार्मिक मान्यता भी यही कहती है कि भगवान नाम से अधिक भक्त की निष्ठा और भावना को स्वीकार करते हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस भजन को हजारों लोग सुन और साझा कर रहे हैं। कई श्रद्धालुओं का कहना है कि इस महिला की सरल भक्ति और निष्कपट भाव ने ही उसे लोगों के बीच लोकप्रिय बना दिया है। उनका मानना है कि सच्ची श्रद्धा और ईश्वर के प्रति समर्पण ही भक्ति का सबसे बड़ा स्वरूप है।

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