कोटद्वार: भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर – सीख, सृजन का अनूठा संगम

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कोटद्वार के गाड़ी घाट में स्थित प्रतिष्ठित विद्यालय ब्लूमिंग वेल पब्लिक स्कूल में आयोजित सात दिवसीय “भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर” का समापन दिनाँक 04/06/2026 को अत्यंत उत्साहपूर्वक एवं आनंदमय वातावरण में संपन्न हुआ। इस शिविर का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारत की भाषाएं एवं सांस्कृतिक विविधता से परिचित कराना एवं उनमें संप्रेषण कौशल का विकास करके विभिन्न भारतीय भाषाओं के प्रति सम्मान एवं रुचि का भाव उत्पन्न करना था।

इस दौरान विद्यार्थियों ने तमिल, पंजाबी तथा अन्य भारतीय भाषाओं के दैनिक प्रयोग में आने वाले शब्दों का अभ्यास किया तथा विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक परंपराओं एवं विशेषताओं का ज्ञान प्राप्त किया। श्रव्य दृश्य सामग्री के माध्यम एवं आभासी यात्राओं ने बच्चों के ज्ञानवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ।

शिविर के प्रथम दिन विद्यार्थियों को पंजाबी भाषा के शब्द सिखाए गए तथा उच्चारण का अभ्यास भी कराया गया। सांकेतिक भाषा के माध्यम से संवाद करने, अपना नाम बताने, संख्या पहचान एवं संख्या अभ्यास करने की रोचक गतिविधियां भी संचालित हुई। छात्रों के द्वारा शब्द कार्ड भी बनवाए गए।

शिविर का दूसरा दिन उत्साह और सीख से परिपूर्ण रहा। विद्यार्थियों को तमिल भाषा से परिचित कराया गया। तमिलनाडु से संबंधित श्रव्य दृश्य सामग्री के माध्यम से छात्रों ने राज्यों की संस्कृति और विशेषताओं को जाना। छात्रों को दैनिक उपयोग के तमिल शब्दों का अभ्यास कराया गया। परिचारक तथा ग्राहक के बीच होने वाले संवाद बच्चों द्वारा अभिनय के रूप में प्रस्तुत किया गया जिसे देखकर सभी अत्यंत प्रसन्न हुए।

इसी क्रम में बच्चों को पंजाबी भाषा का ज्ञान करा कर दैनिक जीवन में प्रयोग किए जाने वाले प्रमुख पंजाबी शब्दों से परिचय कराया गया। प्रश्नोत्तरी के माध्यम से विद्यार्थियों की जिज्ञासा और ज्ञानवृद्धि की गई। साथ ही विद्यार्थियों ने पंजाब राज्य का आभासी पर्यटन श्रव्य- दृश्य माध्यम से किया जिसमें उन्होंने पंजाब के विभिन्न शहरों की विशेषताओं को जाना। तमिल व पंजाबी भाषाओं की गतिविधियों ने बच्चों के भाषाई कौशल, सांस्कृतिक ज्ञान और व्यावहारिक संप्रेषण क्षमता को समृद्ध किया।

भारतीय संस्कृति, लोक कला एवं पारंपरिक विरासत को समर्पित शिविर के तृतीय दिवस का मुख्य विषय पारंपरिक चित्रकला एवं नृत्य प्रतियोगिता रहा। इस अवसर पर विद्यार्थियों को भारत की समृद्धि सांस्कृतिक परंपराओं से परिचित करने के साथ-साथ उनकी रचनात्मक एवं कलात्मक प्रतिभाओं को अभिव्यक्ति देने का अवसर प्रदान किया गया। उत्तराखंड, पंजाब व तमिल की कला एवं संस्कृति के विषय में श्रव्य सामग्री के माध्यम से बच्चों को जानकारी प्रदान की गई। साथ ही साथ बच्चों को कुछ कलाचित्र के माध्यम से पंजाब और तमिलनाड़ु राज्य के प्रसिद्ध एवं महत्वपूर्ण कला से परिचित कराया गया। पंजाब एवं तमिलनाडु राज्य के वाद्य यंत्रों के चित्र दिखाकर उनके विषय में विस्तार से जानकारी दी गई। तत्पश्चात तमिलनाडु राज्य में उत्सवों के प्रति अपनी खुशी व्यक्त करने वाले ”कर्म के ताल में झूमें” गीत पर छात्रों ने समां बांध दिया।

छात्रों ने अपनी मधुर आवाज के माध्यम से तमिल भाषा में सुंदर ढंग से गीत को गाया। इन प्रस्तुत प्रस्तुतियों ने उपस्थित सभी छात्रों को भारतीय लोक-संस्कृति की जीवंतता और सौंदर्य का अनुभव कराया। पंजाबी जीवन दिन की शुरुआत करने वाले ‘शब्द’ के माध्यम से परमात्मा को याद किया गया। पंजाब के प्रसिद्ध लोक नृत्य ‘भांगड़ा ‘से संबंधित गीत ‘’भांगडे नू चार चनन लाई जादे ने” में छात्र-छात्राओं ने नृत्य करके सबका मन मोह लिया ।

ग्रीष्मकालीन शिविर के चौथे दिन रचनात्मक गतिविधि के अंतर्गत विद्यार्थियों ने उत्तराखंड की पारंपरिक थाली तैयार की, इसमें विभिन्न दालों से बने खाजा को प्रदर्शित किया गया। श्रव्य दृश्य सामग्री के माध्यम से छात्रों को उत्तराखंड के अनेक भोजनों से परिचित कराया गया। तत्पश्चात कहानी वाचन क्रियाकलाप के अंतर्गत “लालच बुरी बला है” नामक कहानी गढ़वाली में सुनाई गई। साथ ही छात्रों को गढ़वाली भाषा को बोलने के लिए प्रोत्साहित किया गया ।

ग्रीष्मकालीन शिविर के पांचवें दिवस पर विद्यार्थियों ने भाषाई विविधता के द्वारा एकता का परिचय देते हुए नाटक का प्रस्तुतीकरण किया। दृश्य श्रव्य सामग्री माध्यम से पंजाब तथा उत्तराखंड के वीर सेनानियों से जुड़ी जानकारियां प्रदान की गई। अंत में छात्रों को स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता का भाव विकसित करने के उद्देश्य से उत्तराखंड के महान स्वतंत्रता सेनानी एवं देश के प्रथम शहीद मंगल पांडे के व्यक्तित्व एवं देश के प्रति योगदान के बारे में विस्तार पूर्वक बताया गया।

विशेष रूप से विद्यार्थियों को उत्तराखंड के महान स्वतंत्रता सेनानी श्री वीर चंद्र सिंह गढ़वाली के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए उनके साहस देश भक्ति और त्याग क़ी प्रेरणादाई गाथा सुनाई गई। छात्रों को गढ़वाल के ”चिपको वूमेन” ”गौरा देवी” के द्वारा पेड़ों को बचाने के लिए किए गए कार्यों और उनके अभियान के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई । विद्यार्थियों ने इस सत्र को अत्यंत रुचि एवं उत्साह के साथ सुना तथा अनेक महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त की।

ब्लूमिंग वेल पब्लिक स्कूल में चल रहे सात दिवसीय ग्रीष्मकालीन शिविर के छठवें दिन विद्यार्थियों को ध्यान के महत्व और जीवन में उनकी उपयोगिता के बारे में बताया गया। सूर्य नमस्कार की विभिन्न स्थितियों के बारे में जानकारी दी गई। श्रव्य दृश्य माध्यमों के द्वारा कुछ आसनों को दिखाया गया तथा इसका अभ्यास कराया गया। तत्पश्चात भारत की ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों और भौगोलिक विशेषताओं की महत्वपूर्ण जानकारी साझा की गई। भारत की विविधता के विषय में बताते हुए नदियों हिमालय और पर्वतारोहण पर एक वीडियो दिखाया गई तथा उनसे जुड़ी चुनौतियों के विषय में जानकारी दी गई। इस प्रकार शिविर का छठवां दिन नई जानकारियों तथा अनुभव से परिपूर्ण रहा] जो विद्यार्थियों के लिए अत्यंत अत्यंत प्रेरणादायक एवं यादगार रहेगा।

ब्लूमिंग वेल पब्लिक स्कूल में चल रहे भारतीय भाषा शिविर का सातवां दिन खेल दिवस के रूप में मनाया गया। विद्यार्थियों के लिए तमिल एवं पंजाबी भाषाओं में रोचक खेलों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बच्चे तमिल भाषा के शब्दों का सही उच्चारण के साथ तेजी से बोलने का प्रयास कर रहे थे। कुछ समय बाद छात्रों को शब्द श्रृंखला की जानकारी दी गई। इस दौरान विद्यार्थियों ने पंजाबी एवं तमिल भाषा में शब्दों की अंताक्षरी खेल कर अपनी भाषाई दक्षता का परिचय दिया। प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम के दौरान छात्रों को अनेक जानकारियां प्रदान की गई।

शिविर के समापन समारोह के अवसर पर विद्यालय के प्रबंधक डॉक्टर सुभाष चंद्र चतुर्वेदी एवं विद्यालय निदेशका डॉक्टर कुमुद चतुर्वेदी के द्वारा प्रतिभागी विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र प्रदान कर उनके उत्कृष्ट सहभागिता एवं उत्साह का सम्मान किया गया, जिससे उनमें आत्मविश्वास तथा नई ऊर्जा का संचार हुआ।

यह सात दिवसीय भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, भाषाई दक्षता, सांस्कृतिक जागरूकता तथा रचनात्मक अभिव्यक्ति को सुदृढ़ करने की दिशा में एक सफल एवं सार्थक कदम है, जो उनके भविष्य में भी काम आएगा, ऐसी आशा की जाती है।

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