*लोकप्रियता के शिखर छूने जा रही गढ़वाली फीचर फिल्म मिशन देवभूमि, 13 जून से कोटद्वार के phalanx सिनेमा में होगी प्रदर्शित, पहाड़ के स्वाभिमान और लव जेहाद को लेकर सामाजिक तानेबाने पर आधारित सशक्त पटकथा, शानदार अभिनय और बेजोड़ संवाद फिल्म का मुख्य आकर्षण फिल्म के संदर्भ में बोले प्रवेन्द्र सिंह रावत*

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गढ़वाली फिल्म मिशन देवभूमि13 जून से कोटद्वार के phalanx सिनेमा मैं लगने जा रही है ,पिछली सभी गढ़वाली फिल्मों से हटकर, मुंबईया तर्ज पर, डायरेक्टर और हीरो, रवि ममगाईं जी ने, स्टोरी, थ्रिलर, सस्पेंस और एक्शन के साथ उत्तराखंड के गांवों से, लव जेहाद की बढ़ती समस्या की शिकार अपनी बहु बेटियों की वास्तविक हकीकत को, केरला स्टोरी की तरह फिल्म बनाने की भरपूर कोशिश की है, और इसमें ममगई जी काफी हद तक सफल भी हुए हैं। फिल्म पूरे 2 घंटों तक दर्शकों को बांधे रखने में कामयाब हो रही है। विशेषकर पहाड़ों से लापता होती जा रही अपनी बहन बेटियों की पीड़ा से समाज और विशेषकर बहू बेटियों को जागरूक और सचेत करने की कोशिश की है। कारण स्पष्ट है, पहाड़ों में बेरोजगार युवकों से लड़कियां शादी कर नहीं रही, उन्हें देहरादून या शहरी कमाऊ युवा या सरकारी नौकर चाहिए।और अनजान और भोली – भाली बहु बेटियों के इन्हीं हसीन ख्वाब को ये विशेष धर्म के युवा, एक संगठित सिंडिकेट के रूप में, इन्हीं हसीन ख्वाब को बहुत ऊंचे रहन सहन के सब्जबाग दिखाकर, हिन्दू नामों से बेवकूफ बनाकर, अपने जाल में फंसाने में कामयाब होते जा रहे हैं। और यहां तक कि कुछेक बहुएं भी इन हसीन ख्वाब की शिकार बन रही हैं।और घरवाले इज्जत के नाम पर और ये सोचकर कि बदचलन थी, कोई पुलिस रिपोर्ट नहीं करवाते।
इसी सामाजिक समस्या पर बनी बहुत अच्छी फिल्म है। केरल स्टोरी को तो राज्य सरकारों ने tax free किया था, लेकिन उसी तर्ज पर बनी अपने उत्तराखंड की इस सामाजिक समस्या को दिखाने वाली इस फिल्म को केरल स्टोरी को तो वेडिंग प्वाइंट में भी प्रतिनिधियों और सम्मानित लोगों द्वारा फ्री में लोगों को फिल्म दिखलाई गई, जब की मुंबईया फिल्म बनाने वालों के पास संसाधनों की कमी नहीं होती। लेकिन साधारण परिवार के एक होनहार कलाकार द्वारा अपनी पूरी सामर्थ्य से अपने उत्तराखंड की भाषा की पहचान भी एक गंभीर मुद्दा बन गया है। तो हम ही क्यों ना इस फिल्म को बढ़ चढ़कर देखें।
फिल्म उत्तराखंड की घटनाओं को उजागर करती है, एक सच्ची कहानी को फिल्म के माध्यम से जनता को जागरूक करने के लिए निर्माता ने पेश किया।
फिल्म कहीं से भी निराश नहीं करती है। भारतवर्ष के शहरों में चंडीगढ़ गाजियाबाद दिल्ली आदि में प्रदर्शित हो चुकी है और प्रवासी उत्तराखंडी भारी संख्या में फिल्म को देख रहे हैं। फिल्म की सभी तारीफ कर रहे हैं,
फिल्म में अभिनय कर रहे क्षेत्रीय पार्षद प्रवेन्द्र सिंह रावत ने बताया । जनता से अनुरोध है कि अपने युवा पीढ़ी को यह फिल्म जरूर दिखाएं।

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