टप,टप प्वडनी बूंद।मेरि आंख्यों बटी।
छट,छट,छुट्टि र्वट्टि मेर हाथु बटी।
जलम से करम तक,रैनी ई दिन,
कैमु जांण,क्या खाणं,कख राणं मिन।
२- झल्कां बोली छौ कैन,रे सूण्याल,
ब्वै,बाब तेरा कै गौं जयांन।
अब चेती मिन वो सिदनि कु गैनी।
मेरत अपड भि पर्या ह्वेनी।
टप,टप प्वडनी——
३- रूंद,रूंद गयूं पंदेरा,
मीकु बोलि,मुखडि छल्यो रुंदेरा।
सदनि यखीम रुणूं रौंदू,
घाम सौंदु,जड्डो बुकौंदू।
ब्वल्यूं मान अब,कैम न र्वेईई,
र्वे,र्वे कि तौं आंख्यों न ख्वयी।
४- रूंद देखी,मी तैं घुघतिन,
बोलि,लोल् तेर भि रैनी ई दिन।
र्वे,र्वे कि फुटि जांण,तौं आंख्यों न,
आंसु पूंजी ले मेरि पांख्योंन।
ब्वल्यूं मान अब,कैम न र्वेईई।
र्वे र्वे कि तौं आंख्यों न ख्वयी।
टप टप प्वडनी——
चित्रमणी पोखरियाल।
