बयानबाजी तक सीमित रह गया सयुंक्त राष्ट्र संघ: ईरान की आतंक परस्त नीति और अमेरिकी दादागिरी का परिणाम दुनिया भर को भुगतना पड़ रहा है: अजय तिवाड़ी (सम्पादकीय)

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बयानबाजी तक सीमित रह गया सयुंक्त राष्ट्र संघ: रूस यूक्रेन युद्ध से लेकर वर्तमान में ईरान द्वारा फैलाये गये आतंकवाद की रोकथाम के लिए चल रहे ईरान अमेरिका इजराइल युद्ध को देखें तो विश्व व्यापी संस्था सयुंक्त राष्ट्र संघ के वल एक बयान जारी करने वाली संस्था बनकर रह गयी है। बिगत दिवस संयुक्त राष्ट्र संघ ने बयान जारी करते हुए कहा कि फारस की खाड़ी में जारी इस युद्ध से लगभग 45 लाख लोगों के जीवन पर बड़ा प्रभाव पड़ा है। यह कहीं ना कहीं वास्तविक भी है होमूर्ज मार्ग से दुनिया भर में तेल का 20 प्रतिशत तेल तथा गैस का निर्यात होता है तथा ईरान अमेरिका युद्ध से इस मार्ग से एलपीजी और पट्रोलियम पदार्थों की आवाजाही प्रभावित हुई है कुछ देशों ने ईरान को भारी मात्रा में पैसे देकर अपने तेल और गैस टैंकर सुरक्षित जाने देने की जुगत लगाई है जिससे कि इन देशों की जनता को राहत मिल सके। पश्चिम ऐशिया में ईरान की आतंकवाद परस्त नीति और उसके साथ अमेरिका की दादागिरी दो सबसे महत्वपूर्ण बिषय हैं, इजराइल को जीने का अधिकार नही और उसके आधार पर निर्दोष यहूदियों के कत्लेआम की लम्बी कहानी हूती, हिजबुल्ला, तथा हमास जैसे आतंकी संगठन बनाने वाले ईरान ने बिगत 35 से अधिक बर्षो से बेगुनाह यहूदियों का कत्लेआम मचा रखा है। जिसका प्रतिकार इजराइल कर रहा है और निश्चित रूप से यहाँ विज्ञान का सिद्धांत योग्यतम् की उत्तरजीविता काम कर रही है लेकिन इजराइल यहाँ मानवीय ढंग से लड़ रहा है आर्थात के वल आतंकवाद और सैनिकों पर हमला कर रहा है दूसरी और ईरान कलस्टर बम और सेजल मिसाइल से मानवीय क्षेत्र पर हमले कर रहा है जिसकी प्रतिक्रिया बडे़ पैमाने पर ईरान कर रहा है। लेकिन होमूर्ज गलियारे से बाधित होने तथा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गलत टैरिफ नीतियों के चलते रूस आदि देशों से आने वाले तेल और गैस की मात्रा प्रभावित हुई है जिसके लिए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दोषी ठहराये जाने चाहिए, कुलमिलाकर ईरान की आतंकवाद समर्थक नीति तथा डोनाल्ड ट्रंप की दादागिरी ने दुनिया भर के लिए गैस और पट्रोलियम पदार्थ की समस्या के मुहाने पर ला खड़ा किया है वहीं सयुंक्त राष्ट्र संघ अमेरिका चीन रूस आदि देशों के नियंत्रण में एक बयान बाजी करने की हैसियत तक सीमित संगठन बन कर रह गया है। सम्पादकीय :अजय तिवाड़ी।

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