संघर्ष, सेवा और समर्पण का पर्याय: ऋषि कण्डवाल

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राजनीति केवल सत्ता प्राप्ति का माध्यम नहीं होती, बल्कि वह समाज और राष्ट्र के प्रति समर्पण की साधना भी हो सकती है। ऐसे व्यक्तित्व विरले ही देखने को मिलते हैं, जिन्होंने अपने जीवन का स्वर्णिम काल व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं के बजाय समाज, संस्कृति और राष्ट्र के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। उत्तराखंड की देवभूमि में यदि ऐसे व्यक्तित्वों की चर्चा होती है तो उनमें ऋषि कण्डवाल का नाम प्रमुखता से लिया जाता है।

समाज, संस्कृति और संगठन के लिए समर्पित जीवन का प्रतीक हैं ऋषि कण्डवाल

किशोरावस्था वह समय होता है जब एक युवा अपने भविष्य के सपने संजोता है, उच्च शिक्षा, रोजगार और पारिवारिक जीवन की कल्पना करता है। यही जीवन का सबसे सुनहरा और ऊर्जा से भरपूर दौर भी माना जाता है। किंतु कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जिनकी सोच स्वयं तक सीमित नहीं रहती। वे अपने जीवन का उद्देश्य राष्ट्र, समाज और संस्कृति की सेवा को बना लेते हैं। ऋषि कण्डवाल का सार्वजनिक जीवन इसी विचारधारा का उदाहरण माना जाता है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की वैचारिक पृष्ठभूमि से प्रेरित होकर उन्होंने सामाजिक जीवन की शुरुआत की और आगे चलकर विश्व हिंदू परिषद सहित विभिन्न संगठनों में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया। समर्थकों के अनुसार उन्होंने समाज में संगठन की भावना को मजबूत करने, सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध जनजागरण चलाने तथा हिंदू समाज को संगठित करने के लिए वर्षों तक निरंतर कार्य किया। जनजातीय और दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा के प्रसार के लिए शिक्षा भारती के माध्यम से किए गए प्रयासों का भी उल्लेख किया जाता है।

जीवन में ऐसे अवसर भी आए होंगे जब वे अन्य युवाओं की तरह स्थायी सरकारी सेवा या व्यक्तिगत उन्नति का मार्ग चुन सकते थे। लेकिन उनके समर्थकों का कहना है कि उन्होंने राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानते हुए सेवा और संगठन के कठिन पथ को चुना। यह मार्ग सुविधाओं का नहीं, बल्कि त्याग, अनुशासन और निरंतर संघर्ष का मार्ग था।

सार्वजनिक जीवन का सबसे कठिन पक्ष यह होता है कि व्यक्ति को अपने परिवार और समाज के बीच संतुलन बनाना पड़ता है। समर्थकों का मानना है कि ऋषि कण्डवाल ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा सामाजिक कार्यों को समर्पित किया, जिसके कारण उनका अधिकांश समय जनसेवा और संगठनात्मक दायित्वों में व्यतीत हुआ। इस यात्रा में उनके परिवार ने भी उनके निर्णयों का सम्मान करते हुए सहयोग दिया।

लगभग साढ़े चार दशकों से अधिक समय से सामाजिक और संगठनात्मक जीवन में सक्रिय ऋषि कण्डवाल आज उत्तराखंड सरकार में सिंचाई सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष (राज्य मंत्री दर्जा) के रूप में दायित्व निभा रहे हैं। समर्थकों का विश्वास है कि संगठनात्मक अनुभव और जनसंपर्क के आधार पर वे यमकेश्वर विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों को गति देने का प्रयास कर रहे हैं।

किसी भी जनप्रतिनिधि या सार्वजनिक व्यक्ति का वास्तविक मूल्यांकन समय करता है। योजनाएँ, निर्णय, विकास कार्य और जनता का विश्वास ही उसके सार्वजनिक जीवन की वास्तविक कसौटी होते हैं। आने वाले समय में भी जनता की अपेक्षाएँ यही रहेंगी कि विकास की धारा अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे, ग्रामीण क्षेत्रों की मूलभूत समस्याओं का समाधान हो और सामाजिक समरसता के साथ क्षेत्र का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो।

राष्ट्र निर्माण केवल सरकारों के प्रयासों से नहीं होता, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भागीदारी से होता है। यदि सार्वजनिक जीवन में कार्यरत व्यक्ति सेवा, समर्पण और जवाबदेही के मूल्यों के साथ आगे बढ़ते हैं तथा जनता भी सकारात्मक सहभागिता निभाती है, तो विकास का लक्ष्य अधिक सशक्त रूप से प्राप्त किया जा सकता है। यही किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी शक्ति भी है।

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