देवप्रयाग-मलेथा में सिंचाई कार्यों का निरीक्षण, गुणवत्ता और समयबद्ध निर्माण पर दिया जोर: ऋषि कण्डवाल
देवप्रयाग/मलेथा। सिंचाई सलाहकार उपाध्यक्ष ऋषि कण्डवाल ने अपने देवप्रयाग भ्रमण के दौरान गंगा नदी तट पर सिंचाई विभाग द्वारा विकसित किए जा रहे महत्वाकांक्षी आस्था पथ निर्माण कार्य का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्माण कार्यों में उच्च गुणवत्ता, निर्धारित समयसीमा के भीतर कार्य पूर्ण करने तथा स्वच्छ एवं पारदर्शी कार्य संस्कृति अपनाने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान ऋषि कण्डवाल ने कहा कि उत्तराखण्ड जैसे हिमालयी राज्य में गंगा एवं यमुना घाटियां ही वर्षभर पर्याप्त जल उपलब्ध कराती हैं। इसके अतिरिक्त प्रदेश के अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि सिंचाई का प्रमुख आधार नहरें एवं पारंपरिक सिंचाई गूलें हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि किसानों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नहरों एवं गूलों में नियमित रूप से जल उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, जिससे कृषि गतिविधियां प्रभावित न हों।
इसके उपरांत सिंचाई सलाहकार उपाध्यक्ष ने उत्तराखण्ड की ऐतिहासिक धरोहर वीर भड़ माधोसिंह भण्डारी द्वारा निर्मित प्रसिद्ध मलेथा की गूल का भी निरीक्षण किया। उन्होंने सिंचाई विभाग द्वारा इस ऐतिहासिक जल संरचना के संरक्षण एवं पुनरोद्धार के लिए किए जा रहे कार्यों की समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।


ऋषि कण्डवाल ने कहा कि मलेथा की गूल केवल एक सिंचाई व्यवस्था नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड की समृद्ध सांस्कृतिक एवं तकनीकी विरासत का प्रतीक है। इसका संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि विकास कार्यों के साथ-साथ ऐतिहासिक धरोहरों की मूल पहचान एवं महत्व को भी सुरक्षित रखा जाए।

निरीक्षण के दौरान सिंचाई विभाग के अधिकारी एवं संबंधित कर्मचारी उपस्थित रहे।

