भारत नेपाल संबंध: प्रधानमंत्री बालेन शाह के बयानों से क्या बढ सकती है कडवहट, भारत-नेपाल संबंधों पर बयानबाज़ी से बढ़ सकती है कूटनीतिक दूरी, विशेषज्ञों ने संयम की आवश्यकता:*आलेख ऋषि कण्डवाल( लेखक उत्तराखण्ड सरकार में सिंचाई राज्य मंत्री हैं)*

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भारत-नेपाल संबंधों पर बयानबाज़ी से बढ़ सकती है कूटनीतिक दूरी, विशेषज्ञों ने संयम की दी सलाह

नई दिल्ली/काठमांडू। भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक, सामाजिक और पारिवारिक संबंधों को लेकर समय-समय पर दोनों देशों के राजनीतिक घटनाक्रम चर्चा का विषय बनते रहे हैं। हाल के दिनों में नेपाल के प्रमुख राजनीतिक नेताओं द्वारा दिए गए कुछ बयानों को लेकर दोनों देशों के संबंधों पर बहस तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भारत और नेपाल जैसे घनिष्ठ पड़ोसी देशों के बीच किसी भी प्रकार की बयानबाज़ी को अत्यंत सावधानी और कूटनीतिक परिपक्वता के साथ किया जाना चाहिए।

विशेषज्ञों के अनुसार भारत और नेपाल के बीच ऐतिहासिक रूप से “रोटी-बेटी” का संबंध रहा है। दोनों देशों के नागरिकों के बीच सांस्कृतिक, धार्मिक और पारिवारिक रिश्ते सदियों से स्थापित हैं। उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार और नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के बीच सामाजिक और आर्थिक संबंध आज भी मजबूत बने हुए हैं। कई भारतीय और नेपाली परिवारों के बीच वैवाहिक संबंध भी लंबे समय से स्थापित रहे हैं।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा व्यवस्था दोनों देशों की मित्रता और विश्वास का प्रतीक रही है। हालांकि सुरक्षा विशेषज्ञ समय-समय पर इस बात को लेकर चिंता जताते रहे हैं कि खुली सीमा का दुरुपयोग असामाजिक एवं आपराधिक तत्वों द्वारा किया जा सकता है। ऐसे में दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय और सहयोग को और मजबूत बनाने की आवश्यकता है।

विश्लेषकों का मानना है कि भारत और नेपाल के संबंध केवल राजनीतिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक, धार्मिक, आर्थिक और सामरिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। दोनों देशों के बीच किसी भी प्रकार के मतभेदों का समाधान संवाद और कूटनीतिक माध्यमों से किया जाना चाहिए, ताकि क्षेत्रीय स्थिरता और आपसी विश्वास बना रहे।

विदेश नीति के जानकारों का कहना है कि दक्षिण एशिया में बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य के बीच भारत और नेपाल के संबंधों को कमजोर करने वाली किसी भी गतिविधि या गलतफहमी से दोनों देशों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। उनका मानना है कि साझा इतिहास, संस्कृति और जनसंपर्क की मजबूत नींव भविष्य में भी भारत-नेपाल मित्रता को मजबूती प्रदान करती रहेगी।

नेपाल में पाकिस्तानी आईएसआई की मौजूदगी के समाचार भारतीय मीडिया में लगातार प्रकाशित होते रहते हैं, यद्यपि व्यक्ति, संगठन या विदेशी एजेंसी की भूमिका संबंधी आरोपों की पुष्टि संबंधित सुरक्षा एवं जांच एजेंसियों द्वारा ही की जा सकती है।)

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