*पेपर लीक से MiG-29 तक – ‘विश्वगुरु’ का ‘लीकेज मॉडल : महेन्द्र पाल सिंह रावत अध्यक्ष पूर्व सैनिक संघर्ष समिति*

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पेपर लीक से MiG-29 तक – ‘विश्वगुरु’ का ‘लीकेज मॉडल’

आलेख *महेंद्रपाल सिंह रावत, अध्यक्ष, पूर्व सैनिक संघर्ष समिति, कोटद्वार*

 सोशल मीडिया पर एक कार्टून का संवाद देखकर देश की परीक्षा व्यवस्था पर लिखना जरूरी हो गया। कार्टून में लिखा था - “रेलवे घाटे में चल रही है 😊”। पास में दो नेता मुस्कुरा रहे हैं, *तीसरा बेरोजगार युवक हताश खड़ा है।* फिर एक वीडियो सामने आया जिसमें घाटा पूरा करने का फॉर्मूला बताया गया - “25 लाख फॉर्म निकालो, 800 फीस लो, 200 करोड़ कमाओ, भर्ती रद्द कर दो”।

यह हंसी नहीं, व्यवस्था की कराह है। क्योंकि अब NEET का पेपर लीक होना ‘ब्रेकिंग न्यूज’ नहीं, ‘ब्रेकिंग सिस्टम’ बन चुका है।

  1. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) विश्वसनीयता से टालमटोल तक
    नेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा आयोजित NEET परीक्षा का प्रश्नपत्र साल 2015 से 2026 में तीन बार लीक हो चुका है। इनमें से वर्ष 2026 में पहली बार परीक्षा प्रणाली (NTA) द्वारा आधिकारिक तौर पर पेपर लीक के आरोपों को स्वीकार करते हुए परीक्षा रद्द की गई है एक बार लीक होना चूक हो सकती है, दो बार लापरवाही, लेकिन तीन बार लीक होना व्यवस्था की मिली भगत की ओर इशारा करता है। हर बार वही पटकथा – CBI जांच के आदेश, “दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा” का बयान। परिणाम? आज तक न किसी बड़े अधिकारी पर कार्रवाई हुई, न किसी मंत्री ने नैतिक जिम्मेदारी ली। जब संस्था की साख बार-बार तार-तार हो, तो उस पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
  2. ‘रेलवे घाटा मॉडल’ और NEET एक ही स्क्रिप्ट
    वायरल वीडियो का फॉर्मूला शिक्षा व्यवस्था पर भी लागू होता दिखता है
    चरण-I 24 लाख अभ्यर्थी × 1700 रुपये फीस = 408 करोड़ रुपये सीधे NTA के खाते में।
    चरण-II – प्रश्नपत्र 30-40 लाख रुपये में बेचे जाने की खबरें। 100 सीट का सौदा = 300 करोड़ का काला धन।
    चरण-III – लीक सामने आने पर जांच का लंबा नाटक, काउंसलिंग स्थगित, छात्रों का एक साल बर्बाद। इस पूरी प्रक्रिया में ईमानदार छात्र मानसिक अवसाद का शिकार होता है, जबकि व्यवस्था से खिलवाड़ करने वाला ‘डॉक्टर’ बन जाता है। यह स्थिति देश के स्वास्थ्य तंत्र के भविष्य पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाती है।
  3. जवाबदेही का अभाव – NTA का तर्क है कि वह केवल परीक्षा आयोजित करती है, पेपर छपाई की जिम्मेदारी उसकी नहीं। शिक्षा मंत्रालय NTA को स्वायत्त बताकर पल्ला झाड़ लेता है। सरकार CBI जांच का हवाला देती है। चार बार पेपर लीक होने के बावजूद न इस्तीफा, न बर्खास्तगी। यह स्थिति लोकतांत्रिक जवाबदेही के सिद्धांत के खिलाफ है। जब संविधानिक पदों पर बैठे लोग नैतिक जिम्मेदारी नहीं लेंगे, तो व्यवस्था कैसे सुधरेगी?
  4. युवा आक्रोश: बर्बादी के तीन आयामआर्थिक कोटा- दिल्ली में कोचिंग फीस 2 लाख, रहने-खाने का खर्च 1.5 लाख। गरीब अभिभावक खेत-जेवर बेचकर बच्चों को पढ़ाते हैं। पेपर लीक की खबर आते ही छात्र अवसाद में चले जाते हैं।
    मानसिक 16-16 घंटे पढ़ाई के बाद जब पता चलता है कि सीटें पहले ही बिक चुकी हैं, तो यह ‘प्रायोजित निराशा’ से कम नहीं।
    भविष्य जिसने धनबल से पेपर खरीदा, वह कल ऑपरेशन थियेटर में खड़ा होगा। यह केवल परीक्षा का नहीं, जनस्वास्थ्य का संकट है।
  5. MiG-29 से समाधान या नया तमाशा? – अब खबर है कि प्रश्नपत्रों को भारतीय वायु सेना के MiG-29 हेलीकॉप्टर से परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाया जाएगा। इस पर चार बुनियादी सवाल उठते हैं –
    (क) सेना का कार्य सीमा की रक्षा है या नागरिक परीक्षा की ड्यूटी?
    (ख) MiG-29 उड़ान का खर्च लगभग 1 लाख रुपये प्रति घंटा है। यह अतिरिक्त भार किस पर डाला जाएगा?
    (ग) यदि हेलीकॉप्टर ही एकमात्र सुरक्षित विकल्प है, तो यह पुलिस और प्रशासन की सामूहिक विफलता स्वीकार करना हुआ।
    (घ) आज MiG-29, कल क्या प्रधानमंत्री कार्यालय से परीक्षा नियंत्रित होगी?
    जब एक नागरिक परीक्षा कराने के लिए लड़ाकू विमान की जरूरत पड़े, तो यह ‘विश्वगुरु’ के दावे पर गंभीर टिप्पणी है।
  6. पांच सूत्री सुधार का मार्ग
    (क) NTA का पुनर्गठन चार बार विफल संस्था को जवाबदेह बनाए बिना व्यवस्था नहीं सुधरेगी।
    (ख) जिम्मेदारी तय हो शिक्षा मंत्री से लेकर NTA अध्यक्ष तक की भूमिका की जांच हो।
    (ग) शुल्क वापसी पेपर लीक होने पर अभ्यर्थियों को ब्याज सहित फीस लौटाई जाए।
    (घ) फास्ट ट्रैक न्याय पेपर लीक को संगठित अपराध मानकर 6 माह में न्यायिक प्रक्रिया पूरी हो।
    (ड) सेना को उसके कार्यक्षेत्र में रहने दें परीक्षा संचालन नागरिक प्रशासन की जिम्मेदारी है। निष्कर्ष – रेलवे घाटे के नाम पर फॉर्म फीस की वसूली, NEET लीक के नाम पर योग्यता की नीलामी, और MiG-29 के नाम पर नाकामी का प्रदर्शन – यह घाटा नहीं, व्यवस्था का दोहन है। कथनी में ‘स्टार्टअप इंडिया’, करनी में पेपर लीक इंडिया। कथनी में ‘युवा शक्ति’, करनी में युवा की हताशा। परीक्षा की शुचिता लोकतंत्र की शुचिता से जुड़ी है। अब निगरानी ऊपर से नहीं, जनता की ओर से चाहिए। वरना कल यह भी सुनने को मिल सकता है कि लोकतंत्र भी विशेष विमान से चलेगा।

जय हिंद

महेंद्र पाल सिंह रावत अध्यक्ष पूर्व सैनिक संघर्ष समिति

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