मकरसंक्रांति (गिन्दी कौथिग) थलनदी “आलेख तथा संकलन शिक्षाविद् अजय पाल सिंह रावत”

Date:

Share post:

थलनदी गेंद मेला ( गिन्दी कौथिग) मात्र एक कौथिग ही नहीं है बल्कि यह हमारी पूर्वजों की सामाजिक व सांस्कृतिक परंपराओं और हमारी जड़ों का कौथिग है ,यह कौथिग हमारी सदियों पुरानी धरोहर है यह हमारे पूर्वजों की जीवन शैली वह भावनाओं से जुड़ा त्यौहार है। इसमें उन लोगों की जीवन शैली वह भावनाएं गुंथी हुई हैं।

इस गिंदी कौथिग से हमारे पूर्वजों की बहुत सारी यादें जुड़ी हुई है जिन्हें यदि हम याद करें या पीछे मुड़कर देखने की कोशिश करें तो यह आभास हो जाएगा कि उस समय संसाधनों की कितनी बड़ी कमी थी व उनका जीवन कितना सरल व अभावग्रस्त था। उस समय विद्यालयों में दो-तीन महीने पहले से गेंद मेले के लिए खेलों की तैयारी करना विशेष कर कबड्डी खेलने का अभ्यास करना बच्चों के मन में मेले के प्रति एक उत्साह स्वाभाविक रूप से भर देता था। उस बाल बाल मन की मेले में जाने की उत्सुकता खेलों के साथ- साथ अपने मनोरंजन की चीजों को खरीदना जैसे गुब्बारे वाले बाजे (पिपरे बाजे) जिसकी गूंज चारों तरफ के वातावरण को मनोहारी बना देता था। और जब तक वह गुब्बारे फूटते नहीं थे चाहे रात कितनी भी देर हो जाए उन्हें नींद नहीं आती थी।बच्चों को नए कपड़े पहनने व गुल्लू काका के झूला झूलने की उत्सुकता मेले का मुख्य आकर्षण था।

बुजुर्गों व विशेष कर महिलाओं में मां – बेटी, भाभी – ननद का मिलन का वह भावुक पल जिसमें वह अपने दुख सुख की बातें करके अपने मन को हल्का करते थे व एक दूसरे को गले मिलकर उनके मिलन की खुशी के आंसू उस क्षण को भावनात्मक बना देते थे। अन्य रिश्ते भी चाहे मौसी ,दीदी -भूली व भाई – भतीजो और अपने-अपने सगे संबंधियों के मिलन का वह भावुक क्षण सबके चेहरों पर एक अलग ही खुशी की चमक बिखेरती थी।

इस भौतिकवादी युग में जहां मनुष्य की आशाएं व तृष्णाएँ इतनी बलवती होकर उभर रही हैं कि उनकी पूर्ति के लिए वह मात्र एक मशीन बनकर रह गया है। तो मैं अपने भाई बहन ,सगे संबंधियों व मित्रों से विशेष कर आग्रह करना ,चाहता हूं कि इस मेले में अपनी उपस्थिति दर्ज करा कर आप इस मेले में अवश्य आए और इस मेले की भव्यता को बनाए रखने के साथ-साथ अपने पुरानी यादों को याद करते हुए अपनी जड़ों से जुड़ने की कोशिश करें ।
धन्यवाद।

अजय पाल सिंह रावत

(प्रबंधक)

ज्ञान भारती सीनियर सेकेंडरी स्कूल

कोटद्वार

मकरसंक्रांति (2026)की शुभकामनाएं "आलेख तथा संकलन शिक्षाविद् अजय पाल सिंह रावत
मकरसंक्रांति (2026)की शुभकामनाएं “आलेख तथा संकलन शिक्षाविद् अजय पाल सिंह रावत
Holi advertisement
Holi Advertisement
spot_img

Related articles

*अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस : समानता, सम्मान और सशक्तिकरण का प्रतीक- मानव सभ्यता के विकास में नारी का अतुलनीय योगदान*: *आलेख ख्याति प्राप्त शिक्षक जे०पी०...

अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस : समानता, सम्मान और सशक्तिकरण का प्रतीक- मानव सभ्यता के विकास में नारी का योगदान...

जीवन का सर्जन, श्रृंगार, विकास एवं ममता का आधार सभी महिलाओं को अंतर्राष्ट्रीय दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं ।

जीवन का सर्जन, श्रृंगार, विकास एवं ममता का आधार सभी महिलाओं को अंतर्राष्ट्रीय दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं ।डॉ...

पूर्व सैनिक संघर्ष समिति के अध्यक्ष महेन्द्र पाल सिंह रावत ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर प्रेषित की शुभकामनाएँ;...

महंगा हुआ सिलेंडर अभी महंगाई के और लग सकते हैं झटके!: अजय तिवाड़ी

महंगा हुआ सिलेंडर अभी महंगाई के और लग सकते हैं महंगाई के झटके: ईरान अमेरिका युद्ध का प्रभाव...