उत्तराखंड: राशन कार्ड धारकों को दाल खरीदना अनिवार्य नहीं, डीलरों द्वारा राशन रोकना नियमों के खिलाफ

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29 जुलाई 2025 | अलग खबर |

उत्तराखंड: राशन कार्ड धारकों को दाल खरीदना अनिवार्य नहीं, डीलरों द्वारा राशन रोकना नियमों के खिलाफ

उत्तराखंड के कई जिलों में यह शिकायतें सामने आ रही हैं कि सरकारी राशन डीलर राशन कार्ड धारकों को मजबूर कर रहे हैं कि जब तक वे दाल नहीं खरीदेंगे, उन्हें अन्य राशन सामग्री जैसे चावल, गेहूं, चीनी आदि नहीं दी जाएगी। लेकिन क्या वाकई दाल खरीदना अनिवार्य है? क्या डीलर ऐसा कर सकते हैं?

👉 इस खबर में पढ़ें –

सरकारी नियम क्या कहते हैं?

मुख्यमंत्री दाल पोषित योजना का क्या उद्देश्य है?

क्या राशन डीलर का ऐसा व्यवहार कानूनी है?

शिकायत कहां करें?


क्या दाल खरीदना ज़रूरी है?

उत्तराखंड सरकार की मुख्यमंत्री दाल पोषित योजना के अंतर्गत राशन कार्ड धारकों को 2 किलो दाल प्रति माह (चना, अरहर, मसूर, उड़द आदि) सब्सिडी दरों पर उपलब्ध कराई जाती है।

यह योजना ऐच्छिक (वैकल्पिक) है, अनिवार्य नहीं।

कोई भी राशन कार्डधारी चाहे तो यह दाल ले सकता है या मना कर सकता है।


क्या डीलर राशन रोक सकता है?

नहीं, यदि कोई उपभोक्ता दाल नहीं लेता है तो राशन डीलर को उसे अन्य निर्धारित राशन सामग्री (जैसे चावल, गेहूं, नमक, चीनी) रोकने का कोई अधिकार नहीं है। यह सीधा-सीधा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 (NFSA) और उत्तराखंड के पीडीएस (PDS) नियमों का उल्लंघन है।


सरकारी नियमों की पुष्टि

तत्व नियम

दाल वैकल्पिक, ₹44 से ₹65 प्रति किलो तक
चावल-गेहूं NFSA के अंतर्गत कानूनी हक़
दाल न लेने पर राशन रोकना ❌ गैरकानूनी
कार्रवाई डीलर का लाइसेंस रद्द हो सकता है, शिकायत पर जांच होती है


सरकार द्वारा दिए गए अधिकार

हर पात्र परिवार को NFSA के तहत प्रति सदस्य चावल/गेहूं/नमक/चीनी की तय मात्रा मिलनी चाहिए।

किसी अन्य वस्तु को ज़बरदस्ती थोपना नियमों के विपरीत है।


📢 क्या करें यदि डीलर राशन देने से मना करे?

  1. डीलर से पर्ची (रसीद) लें और नाम, दुकान संख्या नोट करें।
  2. नजदीकी जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारी को लिखित शिकायत करें।
  3. आप टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-180-4188 पर भी शिकायत कर सकते हैं।
  4. https://fcs.uk.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें।

उपभोक्ता की आवाज़

“डीलर ने कहा कि जब तक दाल नहीं लोगे, राशन नहीं मिलेगा। लेकिन मैंने मना किया और अब शिकायत दर्ज कर रहा हूं। मैं अपने हक़ के लिए खड़ा हूं।” – एक राशन कार्ड धारक, पौड़ी गढ़वाल


📌 निष्कर्ष

उत्तराखंड सरकार की दाल योजना गरीबों के पोषण के लिए एक विकल्प है, बाध्यता नहीं। कोई भी राशन डीलर यदि इसके बदले चावल-गेहूं देने से मना करता है तो यह आपके संवैधानिक हक़ का हनन है। ऐसे मामलों में तुरंत शिकायत करें और अपने अधिकार की रक्षा करें।


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