एक लम्बे संघर्ष की कहानी है ..
अनसुलझी,अनकही,रुग्णदायी.
शब्दों से शायद ही पूरी होगी..?
एक दर्द है पीढ़ी-दर-पीढ़ी का..
जो वंशानुगत सालता ही रहा है..
क्या कभी इस दर्द की दवा मिल या बन पायेगी???
राजस्व ग्राम तैड़िया कॉर्बेट नेशनल पार्क के कोर जोन में बसे प्रखण्ड रिखणीखाल का सीमावर्ती गांव जो अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ते शायद क हीं स्वयं शहीद न हो जाए की रुग्ण दास्तां है। सरकार /शासन या जनप्रतिनिधियों की हीलाहवाली का कोर जोन ग्रास बनी। जिनमें निम्न कारण समेत प्रश्नचिन्ह बनते रहे….
वर्ष 1992 में धारा झिरना कोठीरौ की तर्ज पर तैड़िया पाण्ड व चुकुम गांवों को भी वन्यजीवों हेतु चौड़ के रूप में विकसित किया जाये।
1998 में कॉर्बेट नेशनल पार्क के निदेशक व डीएफओ द्वारा गांव में पहुंच कर स्वयं गांव से अन्यत्र विस्थापित करने की बैठक रखी गई।
शर्तें मंजूरी पर ग्रामीणों ने सहमति जताई लेकिन वह परवान न चढ़ पाई।
2000 में ग्राम विस्थापन सभा का गठन ग्रामीणों ने मिलकर किया जिसके प्रथम अध्यक्ष फ्लाइट लेफ्टिनेंट पूर्णानन्द ध्यानी बनाए गये।
2000से 2005-2006 तक वनाधिकारी कालागढ़ टाइगर रिजर्व /पार्क निदेशक राजीव भर्तृहरि द्वारा गांव में पहुंच कर बड़ी बैठक आहूत की गई और 2007 को विस्थापन हेतु पूर्ण रूप से तैयार किया।और रामनगर काशीपुर वन प्रभाग में ग्रामीणों को जमीन दिखाई गई।
2008-10 में पुनः कार्रवाई करते हुए विविध अधिकारियों जैसे श्री रामकृष्ण साही,श्री गिरधर सोनार, डॉ समीर सिन्हा तथा ग्रामीण श्री गुणानन्द ध्यानी व अन्य के नेतृत्व मे रामनगर काशीपुर, जसपुर,पतरामपुर ,तुमड़िया रिवाइंस 1/2 आदि जगहों के अवलोकनोपरांत भी बात मुआवजा व अन्य मुद्दों पर सहमति नहीं बनी।
2011-12 से 2016 तक पुनः विस्थापन सम्बन्धी फाइल को आगे बढ़ाया गया पुनः मुख्यमंत्री, व उत्तराखंड सरकार , दिल्ली सरकार में सत्तारूढ़ जनप्रतिनिधियों में विधायक लैंसडौन श्री दलीप सिंह रावत, राज्य सभा सांसद श्री अनिल बलूनी व लोकसभा सांसद श्री तीरथ सिंह रावत से तत्कालीन अध्यक्ष डॉ ए पी ध्यानी द्वारा प्रश्न उठावाया गया। विस्थापन समिति के प्रतिनिधि तैड़िया पाण्ड की सचिव स्तरीय वार्ता सचिवालय में हुई।
1016-18 इसी दौरान गांव में विद्युतीकरण नहीं होने को लेकर श्रीमती बिनीता ध्यानी के प्रतिरोध स्वरूप अनुरोध पीएमओ/सीएमओ व सूचनांतर्गत गैर विद्युतीकृत गांव तैड़िया पाण्ड में सोलर पैनल स्थापित हुए।
तैड़िया गांव का चालीस लोगों का प्रतिनिधिमंडल अंतिम बार सचिव स्तरीय व मुख्यमंत्री स्तरीय वार्ताओ में शामिल रहा।
तैड़ियाखाल वन चौकी से तैड़िया ख्यूणीख्यात वन चौकी तक वन मोटर वाहन मार्ग हेतु ग्रामीणों व वनविभाग लोनिवि अधिकारियों के समक्ष सर्वेक्षण हुआ जिसमें कहीं भी किसी तरह से वनसम्पदा को हानि नहीं।
शासन में लम्बित मामलों से क्षुब्ध होकर ग्रामीणों ने विस्थापन का मुद्दा छोड़ कर विकास को गति देनी चाही 2021में भव्य एवं दिव्य श्री बद्रीनाथ जी का मंदिर पुनर्निर्माण करवाया और स्मरणीय साप्ताहिक पूजन भण्डारा, जागरण सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया।
पुनः गांव के श्री प्रकाश चन्द्र ध्यानी जी के उत्तराखण्ड पॉवर कॉरपोरेशन लिमिटेड व पॉवर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड के एम डी नियुक्त होने पर अपनी व्यथा ग्राम पंचायत प्रधान श्रीमती बिनीता ध्यानी के द्वारा पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
माननीय मुख्यमंत्री उत्तराखंड सरकार श्री पुष्कर सिंह धामी जी को माननीय विधायक लैंसडौन के द्वारा ज्वलंत जनहितकारी विषय पर गहन विचार हेतु निवेदन किया गया।
वन मंत्री माननीय श्री सुबोध उनियाल जी द्वारा समस्या निराकरण को प्रयास व तबतक बीस सोलर लाइटें गांव में स्थापित करने को आदेशित किया गया।
एमडी यूपीसीएल व पिटकुल द्वारा ग्रिड लाइन द्वारा विद्युतीकरण की उपयुक्त सुझाव का प्रयास बताया गया है।
शेष देखते हैं आगे ऊंट किस करवट बैठता है ???
प्रसंग को मात्र छेड़ा है, उकेरना बहुत बाकी रह गया..!!! आलेख डॉ। ए पी ध्यानी।
