श्रीनगर: पुलिस द्वारा होमगार्ड प्रशिक्षण केन्द्र श्रीकोट श्रीनगर में प्रशिक्षणाधीन होमगार्ड को दंगा नियन्त्रण, यातायात प्रबन्धन व कानून व्यवस्था के सम्बन्ध में दी गयी जानकारी*

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श्रीनगर पुलिस द्वारा होमगार्ड प्रशिक्षण केन्द्र श्रीकोट श्रीनगर में प्रशिक्षणाधीन होमगार्ड को दंगा नियन्त्रण, यातायात प्रबन्धन व कानून व्यवस्था के सम्बन्ध में दी गयी जानकारी।

   होमगार्ड प्रशिक्षण केन्द्र श्रीनगर श्रीकोट में चल रहे होमगार्डों के 13 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में आज दिनाँक 11.08.2025 को होमगार्डों के कुशल संचालन ड्यूटी हेतु उच्चाधिकारीघणों के आदेशानुसार प्रभारी चौकी श्रीकोट उ0नि0 मुकेश गैराला द्वारा दंगा नियन्त्रण, यातायात प्रबन्धन व कानून व शान्ति व्यवस्था की जानकारी दी गयी



। सर्वप्रथम ट्रैनिंग में आये प्रशिक्षणार्थियों को बताया गया कि भारत देश में विभिन्न समुदाय व धर्मों के अनुयायी रहते हैं। सभी को भारतीय संविधान के तहत समानता का अधिकार (अनुच्छेद 14 से अनुच्छेद-18 तक) प्रदान किया हुआ है। विभिन्न समुदाय व धर्मों के लोगों के मध्य आये दिन झगड़े होते रहते हैं, कभी-कभी ये झगड़े बहुत बड़े दंगे का रुप धारण कर लेते हैं, जिस कारण देश में आन्तरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने वाली पुलिस के समक्ष कानून एवं शान्ति व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इसे साम्प्रदायिक दंगा इसलिये कहा जाता है, क्योंकि इस प्रकार के झगड़े से एक सम्प्रदाय दूसरे सम्प्रदाय के खिलाफ हो जाता है, जिस कारण हिंसक घटनायें करता है। उत्तराखण्ड में मुख्य रुप से ऊधमसिंहनगर, देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी गढ़वाल का कोटद्वार शहर आदि शहर संवेदनशील हैं। साम्प्रदायिक दंगे होने कारणों व उनसे काननू व्यवस्था कैसे बिगड़ती है, के बारे में विस्तृत रुप से बताया गया। साम्प्रदायिक दंगों पर नियन्त्रण करते हुये कैसे कानून व्यवस्था बनाये रखनी है के सम्बन्ध में भी विस्तृत रुप से बताया गया। 

दंगों को रोकने का उपाय-

  1. घटना की सूचना अपने उच्चाधिकारियों को तुरन्त देनी है। साथ ही कण्ट्रोल रुम को सूचना अवश्य देनी चाहिये।
  2. यदि सड़क दुर्घटना वाला मामला है तो घायलों को तत्काल अस्पताल पहुँचाना व मृतकों को मोर्चरी भेजना चाहिये।
  3. यदि घटना आगजनी से सम्बन्धित हो तो फायर सर्विस को तत्काल मौके पर पहुंचने के लिये बताना।
  1. जहाँ पर दंगा होने की पूर्ण सम्भावना है, यातायात को तत्काल अलग-अलग रुटों से डायवर्ट करना।
  2. त्योहारों पर मन्दिर, मस्जिदों में क्लीन स्वीप की कार्यवाही करना।
  3. घटना में दोषी व्यक्तियों के विरुध्द तत्काल निरोधात्मक कार्यवाही करते हुये, अपने निकटतम मजिस्ट्रेट को सूचना देना।
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