*लहंगा, आधी वर्दी – तीन पीढ़ी का समर्पणशादी के मंडप से रिटायरमेंट तक, और अब बेटा अग्निवीर – एक पहाड़ी फौजी परिवार की पूरी कहानी:महेंद्र पाल सिंह रावत (अध्यक्ष पूर्व सैनिक संघर्ष समिति)*

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लहंगा, आधी वर्दी – तीन पीढ़ी का समर्पण
शादी के मंडप से रिटायरमेंट तक, और अब बेटा अग्निवीर – एक पहाड़ी फौजी परिवार की पूरी कहानी

आज एक महिला के उस जीवंत पहलू पर लिख रहा हू जो समाज के लिए प्रेरणा और देश के लिए गर्व का विषय है वो है जिसे फौजी की पत्नी (या देशी भाषा में फौजन कहते) है…….

आलेख – महेंद्रपाल सिंह रावत पूर्व सैनिक, कोटद्वार✍️

 *सात फेरे और आठवां वचन 2001* – धारकोट गाँव के शिव मंदिर में रितु की डोली सजी। सामने खड़ा था नायक दीपक सिंह - फौजी टोपी, आँखों में देश का सपना। सात फेरे हुए, और आठवां फेरा रितु ने खुद लिया - "मैं घर संभालूँगी, तुम सरहद संभालना।"  

उसी दिन रितु ‘फौजी की पत्नी’ से ‘बिना वर्दी की सैनिक’ बन गई।
पहला मोर्चा – घर और जिम्मेदारी 2001-2004 –
शादी के 20 दिन बाद ही दीपक की पोस्टिंग कारगिल हो गई। पीछे रह गए बूढ़े सास-ससुर, कच्चा घर और गाय- भैंस। रितु ने कभी ‘दीपक घर पर नहीं है का अहसास अपने बूढ़े सास ससुर को नहीं होने दिया। राशन की लाइन, बैंक के चक्कर, ससुर की दवाई – सब अकेले संभाला। फौजी की तनख्वाह से हर महीने 500 रुपये बचाकर बेटे अर्जुन के नाम RD करवाई। बोली – मेरे दीपक फौज में है, ये भी जाएगा।”
माँ भी, बाप भी 2004-2015– दीपक साल में 2 महीने आता, 10 महीने सरहद पर। अर्जुन को बुखार होता तो रितु रात-रात भर माथे पर पट्टी रखती। स्कूल में ‘फादर्स डे’ आया तो खुद फौजी कैप पहनकर गई। टीचर ने पूछा तो बोली – “इसका बाप 130 करोड़ की रखवाली कर रहा है।” घर में ‘बेडू पाको’ गूँजता, दीवार पर बद्रीनाथ की फोटो और दीपक की वर्दी टँगी रहती।

बक्से में बंद जिंदगी– 8 पोस्टिंग, 8 घर पठानकोट, तेजपुर, जम्मू, बठिंडा, जोधपुर और देहरादून… 25 साल में 8 बार घर बदला। हर बार बच्चों का स्कूल टूटा, रितु का सिलाई का काम छूटा। पर हर क्वार्टर में सबसे पहले तुलसी लगाई और रसोई में मंडुवे की रोटी बनाई। पड़ोस की फौजी पत्नियों के लिए रितु ‘दीदी’ थी – AWWA में सबको साथ लेकर चलती। सेना में रहते हर जाति, धर्म और पंथ को समझा और सीखा क्योंकि हमारी सेना का स्वरूप धर्म निरपेक्ष है जिसके कारण इसकी बगिया मे हर तरह की संस्कृतियाँ जीवंत रहती है रितु ने मराठियों महिलाओं का नृत्य लावणी पंजाबियों गिद्दा मद्रासी भरतनाट्यम नृत्य आदि सीखे।
वो 11 दिन– कारगिल II, 2020 में गलवान घाटी में दीपक की यूनिट गई। 11 दिन तक फोन नहीं आया। टीवी पर नाम चलता, सास बेहोश हो जाती। रितु ने सबके सामने गीता पढ़ी, रात को अकेले रोई। 12वें दिन फोन आया – “ठीक हूँ।” रितु ने सिर्फ कहा – “दवाई टेम पर ले लेना।” फिर घंटों हाथ जोड़कर खड़ी रही।
15 अगस्त का प्रण– आधा लहंगा, आधी वर्दी – 2023 में यूनिट के कार्यक्रम में रितु मंच पर आई – आधा लाल जोड़ा, आधा दीपक की वर्दी। नाम पट्टिका पर ‘RITU’। बोली “ये साड़ी मेरी पहचान है कि मैं माँ हूँ, पत्नी हूँ। ये वर्दी मेरा प्रण है कि मेरा पति जहाँ देश के लिए खड़ा है, मैं भी वहीं खड़ी हूँ। समर्पण एक ही है – भारत माता। “कमान अधिकारी 8 गढ़वाल खड़े होकर सैल्यूट मारते है पूरा महिला शिक्षा केंद्र तालियों से गूंज उठता है धन्य है गढ़वाल की नारी आपके समर्पण को सलाम करते है।
रिटायरमेंट– जंग जारी है:2026
25 साल बाद सूबेदार मेजर दीपक सिंह रिटायर होकर गाँव लौटे। गांव के बस अड्डे पर लोगो का स्वागत के लिए जमावड़ा रितु ने आरती उतारी और फूल माला से स्वागत किया ग्रामीणों ने भारत माता के जयकारे के साथ दीपक का स्वागत किया पर कहानी खत्म नहीं हुई। दीपक अब ‘ पूर्व सैनिक संघर्ष समिति कोटद्वार’ का सदस्य हैं। जो पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और आम नागरिकों की समस्याओं के समाधान के लिए स्वेच्छा से काम करते है दीपक ने 24 जिन 2026 को रक्त दान भी किया। रितु ‘वीर नारी सहायता समूह’ चलाती है – शहीदों की पत्नियों को सिलाई सिखाती है।
तीसरी पीढ़ी बेटा अग्निवीर – दीपक ओर रितु फौजन का बेटा अर्जुन इसी साल भारतीय सेना में ‘अग्निवीर’ भर्ती हो गया। जिसे गढ़वाल राइफल्स मिली है जिस आँगन से एक बार दीपक की वर्दी निकली थी, आज उसी आँगन से अर्जुन की वर्दी निकली है। रितु ने अर्जुन के माथे पर दही-टीका लगाया और वही वर्दी पहनाई – आधी साड़ी, आधी फौज। बोली – “तेरे बाबा ने कारगिल लड़ा, तेरे पिता ने गलवान। अब तेरी बारी है बेटा।”_
ये है देवभूमि की असली परंपरा
यहाँ डोलियाँ उठती हैं तो जिम्मेदारी भी उठती है।
यहाँ रिटायरमेंट अंत नहीं, नई शुरुआत है।
यहाँ माँ बेटों को रोकर नहीं, वर्दी पहनाकर विदा करती है।

रितु की मेहनत, त्याग और समर्पण को प्रणाम परिवार इसी लिए कहते है जिस गत की महिला जागरूक हो उसका परिवार सफल होता है सबल होता है। कह सकते है
“दीपक ने देश बचाया बंदूक से, रितु ने घर बचाया हिम्मत से, अर्जुन अब देश बचाएगा दोनों की विरासत से।”

लहंगा, आधी वर्दी – पूरा हिंदुस्तान।आलेख महेंद्र पाल सिंह रावत, अध्यक्ष पूर्व सैनिक संघर्ष समिति।
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