राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कोटद्वार में संस्कृत मास महोत्सव अंतर्जालीय संगोष्ठी का आयोजन
उत्तराखंड संस्कृत संस्थान द्वारा आयोजित संस्कृत मास महोत्सव , पौड़ी जनपद, अंतर्जालीय संगोष्ठी , हाइब्रिड रुप में राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कोटद्वार में दिनांक 10 सितंबर 2026 को बड़े उत्साहपूर्वक सम्पन्न हुई। संगोष्ठी का आरंभ माँ शारदा की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन तथा पुष्पार्चन, द्वारा किया गया जिसमें महाविद्यालय के यशस्वी प्राचार्य प्रोफेसर डी एस नेगी जी ,प्रोफेसर निरंजना शर्मा, डॉ अरविंद अवस्थी, प्रोफेसर प्रताप बिष्ट, डॉ मनीषा सिंह, डॉ ऐश्वर्या राणा तथा उपस्थित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। तत्पश्चात सरस्वती वंदना दिव्यांशी द्वारा, वैदिक मंगलाचरण नवीन बिष्ट द्वारा तथा स्वागत गीत मोनिका नौगाई द्वारा प्रस्तुत किया गया l कार्यक्रम के अध्यक्ष प्राचार्य प्रोफेसर डी एस नेगी जी द्वारा गोष्ठी की सफलता एवं संस्कृत भाषा के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए वैदिक एवं आध्यात्मिक चिंतन की आवश्यकता पर अपने विचार व्यक्त किए गए। कार्यक्रम की प्रस्तावना के रूप में उत्तराखंड संस्कृत संस्थान के सचिव प्रोफेसर विनय कुमार विद्यालंकार जी ने अंतर्जालीय संगोष्ठी में उपस्थित समस्त महानुभावों को अपना पाथेय प्रदान किया, साथ ही उत्तराखंड संस्कृत संस्थान के शोध अधिकारी डॉक्टर हरीश गुरुरानी जी ने भी अपना अमूल्य समय देकर संस्कृत के अनेक उपनिषदों के ध्येय वाक्यों से वेदों की ओर सभी का ध्यान आकर्षित किया जिससे संस्कृत भाषा का विकास हो सके ।विशिष्ट अतिथि डॉक्टर सीता जुयाल ने भागवत महापुराण के वृतांतों से भारतीय ज्ञान परंपरा पर अपने विचार व्यक्त किए l इसी श्रृंखला में संस्कृत संगोष्ठी के सहप्रवक्ता प्रोफेसर अरविंद अवस्थी जी ने दार्शनिक मर्मज्ञता के साथ मौलिक दर्शनशास्त्र पर अपनी ओजस्वी वक्तव्य से सबको ज्ञानरूपी पाथेय प्रदान किया l संगोष्ठी के मुख्य वक्ता डॉक्टर दिनेश चंद्र पांडे जी ने भारतीय परंपराओ में वेद से प्रारंभ करते हुये वैदिक संहिताओं ब्राह्मण , आरण्यक , उपनिषद तथा समकालीन षड्दर्शनों के माध्यम से सम्पूर्ण भारतीय ज्ञान परंपरा को एक श्रृंखला में बांधा। संस्कृत विभाग प्रभारी डॉ मनीषा सिंह ने उपस्थित समस्त प्राध्यापको को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए छात्र छात्राओं द्वारा संगोष्ठी को सफल बनाने के लिए उत्साहवर्धन किया। संगोष्ठी के जनपद संयोजक तथा संचालक डॉ मनोरथ प्रसाद नौगाई जी ने शांति पाठ द्वारा कार्यक्रम को विश्राम दिया। कार्यक्रम में महाविद्यालय परिवार से डॉ आशाराम बिजल्बाण, डॉ मीरा कुमारी, डॉ एम पी शर्मा, डॉ संदीप कुमार, डॉ प्रमोद सिंह, डॉ जितेंद्र सिंह, डॉ विनोद भंडारी , डॉ बिशन लाल, डॉ राकेश शाह , श्री अरविंद दूतपुड़ी इत्यादि समस्त प्राध्यापक उपस्थित रहे। संगोष्ठी को सफल बनाने में संस्कृत विभाग के प्राध्यापको डॉ मनीषा सिंह, डॉ गीता, डॉ मनोरथ प्रसाद नौगाई डॉ प्रियम अग्रवाल , तथा तकनीकी व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने हेतु डॉ ऐश्वर्या राणा तथा डॉ पवन भट्ट अरविन्द दुदपुड़ी का विशेष योगदान रहा।
