समाजिक समरसता का ताना बाना ना बिगड़ने पाये: जातिवाद की राजनीति और उसका कुप्रभाव देश हित में तो बिल्कुल नही है, शोसल मीडिया से लेकर प्रिंट तथा इलैक्ट्रॉनिक मीडिया में तथाकथित उच्च जातियों तथा दलित समाज के कुछ बयान बीर इस तरह का वातावरण बना रहे हैं कि समाज में विघटन और अलगाव की खाई बढ रही है यह निश्चित रूप से समाज और देश हित में नही है और इसे कहीं ना कहीं देश विरोधी ताकतें खाद पानी उपलब्ध करा रही हैं। समय आ गया है कि सरकार को आरक्षण समर्थक और आरक्षण का विरोध या समीक्षा करने वाले लोगों के बीच उन तत्वों की धरपकड़ करनी चाहिए जो आंदोलन की आड़ में राष्ट्रीय हितों से खिलवाड़ करने, अराजकता की स्थिति पैदा करने का कार्य कर रहे हैं जिसमें सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी हैंडलर्स कहीं सवर्ण बनकर तो कहीं दलित बनकर समाज में वैमनस्य पैदा कर रहे हैं, सामाजिक भेदभाव पैदा करने वाले तत्वों पर निश्चित रूप से कठोर सजा से कठोर कार्यवाही होनी चाहिए, उन तत्वों की पहचान हो जो बाबा साहब भीमराव अंबेडकर जैसे महापुरुष के लिए असम्मान जनक शब्दों का प्रयोग करते हों, साथ ही मां सरस्वती, भगवान गणेश आदि देवताओं के विरुद्ध असभ्य और अमर्यादित शब्दों का प्रयोग करने वालों पल भी धार्मिक भावनाओं को आहत करने को लेकर कठोर से कठोर कानूनी कार्यवाही होनी चाहिए जिससे भविष्य में कोई इस तरह का दुस्साहस करने की हिम्मत ना कय सके, देश में चाहे दलित हों या तथाकथित रूप से उच्च वर्ग (जो कि आर्थिक रूप से अधिकांश कमजोर ही हैं) दोनों के बीच सामाजिक समरसता सदभाव बना रहे नफरत और जाति गत वैमनस्य पैदा करने वाले तत्वों को कठोर कार्यवाही कर सजा मिले जिससे इस तरह का प्रयास करने वाले तत्व हतोत्साहित हों, देश में सामाजिक समानता हो दलित या तथाकथित उच्च वर्ग (कमजोर आर्थिक रूप से पिछड़े) दोनों के बीच सद्भावना का विकास हो इसके प्रयास हो।
