*महात्मा किसे कहते और दुरात्मा किसे कहते हैं* आलेख ऋषि कण्डवाल जी* *लेखक उत्तराखण्ड सरकार में सिंचाई राज्य मंत्री हैं*

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“महात्मा किसे कहते और दुरात्मा किसे कहते हैं!”…….

मनस्येकं वचस्येकं कर्मण्येकं महात्मनम् !
मनस्यन्यत् वचस्यन्यत् कर्मण्यन्यत् दुरात्मनाम्!!

भावार्थ – महात्मा उस सज्जन व्यक्ति को कहते हैं जो जैसा मन में सोचता है,वैसा ही मुख से बोलता है और जैसा मुख से बोलता है,वैसा ही कर्म भी करता है!

अर्थात जिसके जीवन में मन वाणी कर्म से एकरूपता होती है!

दुरात्मा उस व्यक्ति को कहते हैं जो जैसा मन में सोचता है वैसा मुख से बोलता नहीं है और जैसा मुख से बोलता है वैसा जमीन पर कर्म करता नहीं है!

अर्थात मन में कुछ और सोचता है!

वाणी से कुछ और बोलता है!
कर्म कुछ और प्रकार से करता है!

मन क्रम वाणी में एकता नहीं होती है!

जयतु जयतु हिन्दूराष्ट्रम् 🚩महात्मा किसे कहते और दुरात्मा किसे कहते हैं!”…….

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