*प्रणाम करने की भारतीय पद्धति आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व आलेख : ऋषि कण्डवाल जी( लेखक उत्तराखण्ड सरकार में सिंचाई राज्य मंत्री हैं) *

Date:

Share post:

प्रणाम करने की भारतीय पद्धति ……

भारत में हाथ जोड़ कर प्रणाम करने की प्रचलित पद्धति एक मनोवैज्ञानिक पद्धति है।
हाथ जोड़ कर आप जोर जोर से बोल नहीं सकते, आप अधिक क्रोध नहीं कर सकते और भाग भी नहीं सकते।

यह एक ऐसी पद्धति है जिसमें एक मनोवैज्ञानिक दबाव होता है। इस प्रकार प्रणाम करने से सामने वाला व्यक्ति अपने आप ही विनम्र हो जाता है। किसी को प्रणाम करने के फलस्वरूप आशीर्वाद की प्राप्ति होती है और उसका आध्यामिक विकास होता है।

आध्यात्मिक रहस्य :
दाहिना हाथ आचार अर्थात धर्म और बायां हाथ विचार अर्थात दर्शन का होता है। नमस्कार करते समय दायां हाथ बाएं हाथ से जुड़ता है। शरीर में दाईं ओर इड़ा और बांईं ओर पिंगला नाड़ी होती है तथा मस्तिष्क पर त्रिकुटि के स्थान पर शुष्मना का होना पाया जाता है। अत: नमस्कार करते समय इड़ा, पिंगला के पास पहुंचती है तथा सिर श्रृद्धा से झुका हुआ होता है।

हाथ जोड़ने से शरीर के रक्त संचार में प्रवाह आता है। मनुष्य के आधे शरीर में सकारात्मक आयन और आधे में नकारात्मक आयन विद्यमान होते हैं। हाथ जोड़ने पर दोनों आयनों के मिलने से ऊर्जा का प्रवाह होता है। जिससे शरीर में सकारात्मकता का समावेश होता है।

Related articles

कोटद्वार पीजी कॉलेज में ‘स्टार्टअप-चुनौतियां एवं संभावनाएं’ विषय पर पोस्टर प्रतियोगिता आयोजित

डॉ. पी. द. ब. हि. राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कोटद्वारउद्यमिता के अंतर्गत स्टार्टअप-चुनौतियां एवं संभावनाएं" विषय पर पोस्टर प्रतियोगिता...

राष्ट्रीय खेल दिवस पर कोटद्वार में उदीयमान हॉकी खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों का हुआ सम्मान

आज प्रदेश कांग्रेस सचिव बलबीर सिंह रावत के कैम्प कार्यालय मालवीय उद्यान कोटद्वार में राष्ट्रीय खेल दिवस एवं...

हैप्पी चिल्ड्रेन एकेडमी में पुस्तक मेले का आयोजन, विद्यार्थियों ने दिखाई पुस्तकों में विशेष रुचि

कोटद्वार। विकास नगर गाड़ीघाट स्थित ख्यातिप्राप्त विद्यालय हैप्पी चिल्ड्रेन एकेडमी में विद्या बुक फेयर, देहरादून की ओर से...