नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ में जान गवानें वाले लोगों के लिए संवेदना परिवारों, इस तरह की हिर्दय विदारक त्रासदियों को रोकने के लिए गंभीर प्रयासों की आवश्यकता।

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नई दिल्ली में भीड़ तंत्र जीवन पर भारी (अजय तिवारी) : नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ में अठारह के लगभग जिंदगियां जिसमें बच्चे, महिलायें और पुरुष शामिल हैं भीड़ तंत्र की भयावहता के भेंट चढ़ गये, जैसे कि बताया जा रहा है ये सभी लोग प्रयागराज में कुम्भ स्नान के निमित्त जा रहे थे लेकिन काल के क्रूर हाथ इन लोगों की जिंदगी लील गये, यद्यपि इस तरह की दुर्घटनाओं के लिए किसी सरकार, संस्थान अथवा समूह को जिम्मेदार नही ठहराया जाना चाहिए लेकिन इस तरह की त्रासदी को रोकने के लिए उपाय जरूर होने चाहिए। प्रिंट मीडिया, सोशलमीडिया और इलैक्ट्रॉनिक मीडिया ने प्रयागराज में आयोजित इस महाकुम्भ को अत्यधिक प्रचारित प्रसारित किया जिसका कारण रहा कि इस कुम्भ मे लगभग 50 करोड़ के आसपास श्रद्धालुओं के प्रयागराज पंहुचने का अनुमान लगाया गया है। कुम्भ में पुण्य की डुबकी लगाने से स्वर्ग और पुण्य की प्राप्ति के लिए श्रद्धालु जैसे भी हो प्रयागराज पंहुचने को लालायित हैं, बसों, निजी कारों रेल जिसको जो माध्यम मिल रहा है उससे पुण्य की कामना के साथ प्रयागराज पंहुच रहा है। बताया जा रहा है कि यह महाकुम्भ का दिव्य संयोग लगभग 144 साल में एक बार आता है, इसकी सच्चाई तो धार्मिक जानकर या ईश्वर ही जानते होंगे लेकिन इसके महत्व को स्वीकार करते हुए लोग आव देखा ना ताव और परिवार सहित प्रयागराज पंहुचने की बेताबी दिखा रहे हैं और इस प्रकार की दुखद त्रासदी के शिकार हो रहे हैं। यद्यपि मैं धार्मिक मामलों में कुछ लिखने से बचता हूँ लेकिन केदारनाथ त्रासदी, और अब महाकुम्भ को लेकर नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर घटी दुर्घटनाओं के बाद यह नितांत आवश्यक हो जाता है कि मानवीय त्रासदी से बचने, जीवन के इस तरहा समाप्त होने से बचने के लिए भीड़ पर नियंत्रण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए जितनी जगह उपलब्ध हो जितनी क्षमता रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों में उपलब्ध हो उतने ही लोगों को यात्रा कराई जाए इसका एक उदाहरण श्री अमरनाथ श्राइन वोर्ड की व्यवस्था जैसे होना चाहिए। आगे चारधाम यात्रा शुरू होनी है जून से बरसात भी लगभग शुरू होती है यात्रा मार्ग पर व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण के लिए यात्रियों का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन और क्षमता के हिसाब से यात्रियों को धर्म स्थलों पर भेजा जाना चाहिए, यात्रियों को तय संख्या में भेजकर यात्रा को सरल और सुगम बनाया जा सकता है इससे जहाँ भीड़ पर नियंत्रण स्थापित होगा वहीं मानवजनित त्रासदी से बचा जा सकेगा यद्यपि इसको लेकर विरोध के स्वर भी उठेंगे लेकिन जीवन को इस तरह दुर्घटनाओं से बचाना सबसे पहले है। एक बार पूर्व प्रधानमंत्री रहे स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री जी जब रेलमंत्री थे तो कहा जाता है कि एक रेल दुर्घटना के बाद नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने अपने पद से त्याग पत्र दे दिया था खैर ये उस दौर की बात है जब पद से अधिक नैतिकता का महत्व था लेकिन यद्यपि इस प्रकार की दुर्घटनाओं के लिए व्यक्ति विशेष को जिम्मेदार नही ठहराया जा सकता लेकिन इस प्रकार की दुखद घटनाओं को किस तरह रोका जा सकता है इसके लिए गम्भीर उपाय किए जाने चाहिए यह जरूरी है।

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