*सेवा को मिला सम्मान – पूर्व सैनिकों की आवाज़ को सेना का सलाम लैंसडाउन, गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंटल सेंटर – वो पल ऐतिहासिक था जब वर्दी ने वर्दी के बाद की सेवा को सलाम किया*

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सेवा को मिला सम्मान – पूर्व सैनिकों की आवाज़ को सेना का सलाम

लैंसडाउन, गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंटल सेंटर – वो पल ऐतिहासिक था जब वर्दी ने वर्दी के बाद की सेवा को सलाम किया।

अध्यक्ष, पूर्व सैनिक संघर्ष समिति कोटद्वार, श्री महेंद्रपाल सिंह रावत को पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और वीर माताओं की समस्याओं के समाधान के लिए किए गए प्रशंसनीय कार्यों हेतु सम्मानित किया गया। यह सम्मान लेफ्टिनेंट जनरल दिनेश राणा, पीबीएसएम, एबीएसएम, पीवीएसएम, एवीएसएम, वाईएसएम, एसएम, कर्नल ऑफ द रेजिमेंट गढ़वाल राइफल्स एवं गढ़वाल स्काउट्स, स्ट्रेटिजिक फोर्स कमांडर द्वारा गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंटल सेंटर, लैंसडाउन में आयोजित एक आधिकारिक समारोह में प्रदान किया गया। हम कह सकते है कि सेना और समाज का सेतु बने महेंद्रपाल सिंह रावत – रिटायरमेंट के बाद अक्सर फौजी अपने परिवार तक सीमित हो जाता है। पर महेंद्रपाल सिंह रावत ने वर्दी उतारने के बाद दूसरी वर्दी पहन ली — सेवा की वर्दी
पूर्व सैनिक संघर्ष समिति कोटद्वार के माध्यम से उन्होंने सैकड़ों पूर्व सैनिकों की पेंशन, ईसीएचएस, कैंटीन, भूमि विवाद, वीर नारियों की सहायता और वीर माताओं के सम्मान से जुड़े मामलों को न सिर्फ उठाया, बल्कि समाधान तक पहुँचाया।

जब रुड़की में भू-माफिया एक पूर्व सैनिक की जमीन हड़प रहे थे, तो महेंद्रपाल जी संगठन के साथ खड़े हुए। जब कोटद्वार की अधजली लड़की के इलाज के लिए भटक रही थी, तो समिति उसका सहारा बनी। यही कारण है कि आज कोटद्वार ही नहीं, पूरे गढ़वाल में पूर्व सैनिक परिवार इन्हें अपना प्रतिनिधि मानता है।

*गढ़वाल राइफल्स ने दिया “अपने बेटे” को सम्मान* –समारोह में *लेफ्टिनेंट जनरल राजन सहरावत, कोर कमांडर 19 कोर*, नामित सेंटर कमांडेंट *ब्रिगेडियर मल्होत्रा* और रेजिमेंट के अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  
लेफ्टिनेंट जनरल दिनेश राणा ने सम्मान देते हुए कहा —  *“फौज का रिश्ता रिटायरमेंट पर खत्म नहीं होता। महेंद्रपाल सिंह रावत जैसे लोग रेजिमेंट और समाज के बीच जीवित पुल हैं। इन्होंने साबित किया कि एक सैनिक हमेशा सैनिक रहता है — सीमा पर भी और समाज में भी।”*  

सम्मान सिर्फ व्यक्ति का नहीं, विचार का है
यह सम्मान महेंद्रपाल सिंह रावत का व्यक्तिगत नहीं है। यह उन सभी पूर्व सैनिकों का सम्मान है जो रिटायरमेंट के बाद भी “समाज के लिए कुछ न कुछ करते रहते है” एवं एक जज़्बे से काम कर रहे हैं। यह सम्मान कोटद्वार के पूर्व सैनिकों, वीर नारियों का है जो अपने पति के बलिदान के बाद भी हिम्मत से खड़ी हैं।
यह सम्मान उन वीर माताओं का है जिन्होंने देश के लिए अपने लाल कुर्बान किए।
संदेश साफ है
गढ़वाल राइफल्स ने आज यह संदेश दिया कि सेना अपने पूर्व सैनिकों को भूलती नहीं है। और महेंद्रपाल सिंह रावत ने यह संदेश दिया कि रिटायरमेंट सेवा का अंत नहीं, सेवा के नए अध्याय की शुरुआत है

  पूर्व सैनिक संघर्ष समिति कोटद्वार  के अध्यक्ष का यह सम्मान पूरे उत्तराखंड के पूर्व सैनिक समाज के लिए प्रेरणा है। जब नेतृत्व ईमानदार हो, उद्देश्य साफ हो और जज़्बा फौजी हो — तो पहाड़ की हर समस्या का समाधान निकल सकता है।  

जय गढ़वाल राइफल्स। जय उत्तराखंड।
नमन है ऐसी सेवा और समर्पण को 🙏

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