*कोटद्वार: अधिकार से नही उत्तरदायित्व से। अधिकारी’ नहीं, ‘उत्तरदायी’ — प्रशासनिक सोच में बदलाव की पहल : शिक्षक महेन्द्र जदली*

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‘अधिकारी’ नहीं, ‘उत्तरदायी’ — प्रशासनिक सोच में बदलाव की पहल
लोकतांत्रिक व्यवस्था में शासन का मूल आधार जनता होती है। ऐसे में प्रशासनिक पद केवल अधिकार का प्रतीक न होकर उत्तरदायित्व का दायित्व भी निभाते हैं। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए पौड़ी गढ़वाल के ग्राम मेरुड़ा निवासी महेन्द्र जदली ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया है।
उन्होंने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि स्वतंत्रता के दशकों बाद भी सरकारी पदनामों में ‘अधिकारी’ शब्द का व्यापक प्रयोग होता है। यह शब्द अधिकार और प्रभुत्व का बोध कराता है, जबकि लोकतंत्र में प्रत्येक पद का मूल उद्देश्य जनता के प्रति जवाबदेही और सेवा भाव होना चाहिए।
महेन्द्र जदली का सुझाव है कि ‘अधिकारी’ शब्द के स्थान पर ‘उत्तरदायी’ शब्द का प्रयोग किया जाए। उदाहरणस्वरूप — ‘जिला अधिकारी’ के स्थान पर ‘जिला उत्तरदायी’, ‘चिकित्सा अधिकारी’ के स्थान पर ‘चिकित्सा उत्तरदायी’ तथा ‘कृषि अधिकारी’ के स्थान पर ‘कृषि उत्तरदायी’। उनका मानना है कि इस प्रकार का परिवर्तन केवल शब्दों का नहीं, बल्कि मानसिकता का परिवर्तन होगा, जो प्रशासन में जवाबदेही और पारदर्शिता को सुदृढ़ करेगा।
‘आज़ादी के अमृतकाल’ में जब देश नई सोच और नई दिशा की ओर अग्रसर है, तब ऐसे सुझाव प्रशासनिक संस्कृति में सकारात्मक बदलाव का आधार बन सकते हैं। यह पहल न केवल भाषा के स्तर पर, बल्कि शासन की कार्यप्रणाली में भी जनता-केंद्रित दृष्टिकोण को मजबूत कर सकती है।

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