उत्तराखंड परिवर्तन अब विकल्प नहीं, अपरिहार्य कर्तव्य……….. महेन्द्र पाल सिंह रावत अध्यक्ष पूर्व सैनिक संघर्ष समिति*

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*उत्तराखंड परिवर्तन अब विकल्प नहीं, अपरिहार्य कर्तव्य……….. महेन्द्र पाल सिंह रावत अध्यक्ष पूर्व सैनिक संघर्ष समिति* पूर्व सैनिक संघर्ष समिति के अध्यक्ष महेन्द्र पाल सिंह रावत ने कहा है कि पहाड़ के लोगों के पास अब विकल्प शेष नही है बेरोजगारी, हिंसक वन्य जीवों द्वारा मानव भक्षण, चिकित्सा सुविधाओं का घोर अभाव तथा कृषि की बुरी दशा ने हालात बिगाड़ दिये हैं प्रदेश की जनता का भरोसा उत्तराखण्ड पर शासन करने वाले दलों ने तार तार कर दिया है, अब जनता ने परिवर्तन को ही विकल्प के रूप में चुन लिया है।


उत्तराखंड के अस्तित्व और कल के लिए अब चुप रहना विकल्प नहीं रहा। यह समय की पुकार है कि पूर्व सैनिक, अर्धसैनिक बलों के जांबाज, उनके परिजन और सजग नागरिक अपनी राजनीतिक जिम्मेदारी को नए सिरे से समझें और आगे आएं।

देश आज आर्थिक दबाव, सामाजिक तनाव और शासन की शिथिलता से गुजर रहा है। महंगाई, बेरोजगारी और अनिश्चितता ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। पहाड़ी राज्यों पर यह मार दोगुनी पड़ती है। उत्तराखंड तो पहले से ही पलायन, रोजगार का सूखा, भ्रष्ट तंत्र, संसाधनों की खुली लूट, बदहाल अस्पताल- स्कूल और जंगल- आबादी के टकराव से कराह रहा है।

अगर उत्तराखंड के लोग, खासकर फौजी-अर्धसैनिक परिवार, अब भी एकजुट होकर मोर्चा नहीं संभालते तो कल हालात और बेकाबू होंगे। केवल भाषण, भावुक नारे और चुनावी वादे उत्तराखंड को नहीं बचा सकते। यहां जरूरत है ऐसे नेतृत्व की जो ईमानदार हो, अनुशासित हो और देश-प्रदेश के हित को पहले रखे।

हमारे पूर्व सैनिकों और अर्धसैनिक बलों के पास संगठन का हुनर है, अनुशासन रगों में है, त्याग की मिसाल है और नेतृत्व का तजुर्बा है। यही ताकत उत्तराखंड को एक साफ-सुथरा, ईमानदार और जनोन्मुखी सियासी विकल्प दे सकती है। अब किनारे खड़े होकर तमाशा देखने का वक्त खत्म। अब उत्तराखंड को गढ़ने के लिए मैदान में उतरने का वक्त है सिस्टम बदलना अब सिर्फ नारा नहीं, उत्तराखंड की सांस है।
आओ, एक ऐसा उत्तराखंड बनाएं जहां राजनीति की बुनियाद ईमानदारी हो, विकास उसकी रफ्तार हो, स्वाभिमान उसकी पहचान हो और जनता की चिंता उसका धर्म हो।

बद्री विशाल लाल 
     की जय

महेंद्र पाल सिंह रावत अध्यक्ष
पूर्व सैनिक संघर्ष समिति।

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