मॉस्को। दुनिया भर में कैंसर से जूझ रहे करोड़ों मरीजों के लिए रूस से बड़ी राहत की खबर आई है। रूसी वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्होंने कैंसर के खिलाफ प्रभावी वैक्सीन विकसित कर ली है। रूस की फेडरल मेडिकल एंड बायोलॉजिकल एजेंसी (FMBA) की प्रमुख वेरोनिका स्कवोर्त्सोवा ने पूर्वी आर्थिक मंच पर घोषणा की कि नई वैक्सीन “एंटेरोमिक्स” (Enteromix) प्रीक्लिनिकल ट्रायल में 100 प्रतिशत प्रभावकारिता दिखाने के बाद उपयोग के लिए तैयार है।

प्रौद्योगिकी का अनोखा संगम
इस वैक्सीन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें दो आधुनिक तकनीकों का संयोजन किया गया है।
एंटेरोमिक्स वैक्सीन – यह चार हानिरहित वायरस का उपयोग कर कैंसर कोशिकाओं पर हमला करती है और साथ ही मरीज की इम्यूनिटी को मजबूत करती है।
व्यक्तिगत mRNA वैक्सीन – गामालेया सेंटर की यह वैक्सीन हर मरीज के ट्यूमर के जीनोमिक डेटा पर आधारित होती है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से सिर्फ एक सप्ताह में तैयार की जा सकती है।
क्लिनिकल ट्रायल और नतीजे
शुरुआती 48 स्वयंसेवकों पर किए गए ट्रायल में वैक्सीन ने 100% सुरक्षा और असर दिखाया।
प्रीक्लिनिकल अध्ययन में ट्यूमर का आकार 60 से 80% तक घटा और मरीजों की जीवित रहने की दर बढ़ी।
यह वैक्सीन फिलहाल कोलोरेक्टल कैंसर को लक्ष्य बनाती है, लेकिन भविष्य में इसे ग्लियोब्लास्टोमा और मेलेनोमा पर भी परखा जाएगा।
लागत और उपलब्धता
रूस सरकार ने ऐलान किया है कि वैक्सीन की प्रत्येक डोज़ की कीमत लगभग 3 लाख रूबल (करीब 2.5 लाख रुपये) होगी। हालांकि, नागरिकों को यह वैक्सीन निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी।
रूस में कैंसर की स्थिति
रूस में इस समय लगभग 40 लाख लोग कैंसर से पीड़ित हैं। हर साल 6.25 लाख नए मामले सामने आते हैं। सबसे आम प्रकारों में कोलोरेक्टल, स्तन और फेफड़ों का कैंसर शामिल हैं।
वैश्विक स्तर पर तुलना
ब्रिटेन की NHS ने BioNTech के साथ मिलकर कैंसर वैक्सीन पर काम शुरू किया है।
अमेरिका की Moderna और Merck कंपनियां mRNA-4157/V940 वैक्सीन बना रही हैं, जिसने मेलेनोमा में 44% तक दोबारा होने के मामलों को कम किया।
2014 से 2024 के बीच अमेरिका में 757 और चीन में 89 कैंसर वैक्सीन ट्रायल किए गए।
रूस की पहल विशेष है क्योंकि इसमें ऑन्कोलिटिक वायरस और mRNA दोनों तकनीकें शामिल हैं और सरकार ने इसे मुफ्त वितरण की योजना से जोड़ा है।
चुनौतियां और भविष्य की राह
वैक्सीन को अभी रूसी स्वास्थ्य मंत्रालय से अंतिम स्वीकृति का इंतजार है। शुरू में इसे मेलेनोमा मरीजों पर इस्तेमाल किया जाएगा और बाद में पैंक्रियाटिक, किडनी और लंग कैंसर पर विस्तार किया जाएगा। वैज्ञानिक समुदाय का मानना है कि इसके लिए बड़े स्तर पर फेज़ II और फेज़ III ट्रायल जरूरी होंगे।
निष्कर्ष
रूस की नई कैंसर वैक्सीन चिकित्सा जगत में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। यदि आने वाले परीक्षण भी सफल रहते हैं, तो यह खोज न केवल रूस बल्कि पूरी दुनिया के लिए कैंसर उपचार में नई उम्मीद बनेगी।



