जीवन का सर्जन, श्रृंगार, विकास एवं ममता का आधार सभी महिलाओं को अंतर्राष्ट्रीय दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं ।

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जीवन का सर्जन, श्रृंगार, विकास एवं ममता का आधार सभी महिलाओं को अंतर्राष्ट्रीय दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं ।
डॉ अनुराग शर्मा, असिस्टेंट प्रोफेसर वाणिज्य,राजकीय महाविद्यालय कण्वघाटी कोटद्वार, पौड़ी गढ़वाल उत्तराखंड।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं एवं हार्दिक बधाई ।आज का दिन सभी महिलाओं की उन्नति एवं उपलब्धियों को उजागर करने का दिन है। महिलाओं के संघर्ष, सपने उम्मीदें और एकता को मनाने का दिन है। यह दिन महिलाओं की सामाजिक,आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक उपलब्धियां को उजागर करने के साथ-साथ समानता, अधिकारों, त्याग, सशक्तिकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है । आज का दिन महिलाओं के प्रति सम्मान और भेदभाव समाप्त करने के प्रयासों को समर्पित है। अगर ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की बात की जाए तो 20 वीं शताब्दी के प्रारंभ में कामकाजी महिलाओं द्वारा बेहतर वेतन, कार्य करने के घंटों को कम करने तथा मतदान के अधिकार के आंदोलन के साथ प्रारंभ हुआ । पहली बार महिला दिवस क्लारा जेटकिन के प्रयासों के प्रस्ताव पर 19 मार्च 1911 को ऑस्ट्रिया, डेनमार्क,जर्मनी और स्विट्जरलैंड में मनाया गया । इस दौर में महिला दिवस अलग-अलग तिथि पर विश्व के अनेक देशों में मनाया जाता था, परंतु बाद में वर्ष 1917 में रूसी महिलाओं की एक ऐतिहासिक हड़ताल जो कि ‘रोटी और शांति’ के मांग के लिए थी उसको सम्मान देने के लिए 8 मार्च की तिथि निश्चित की गई। वर्ष 1922 में सोवियत संघ के नेता व्लादिमीर लेनिन ने 8 मार्च को आधिकारिक रूप से अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की घोषणा की , इसके बाद धीरे-धीरे यह तारीख दुनिया के कई देशों द्वारा स्वीकार कर ली गई और वर्ष 1975 में संयुक्त राष्ट्र ने इसे आधिकारिक मान्यता प्रदान की तब से 8 मार्च को प्रति वर्ष अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस संपूर्ण विश्व में मनाया जाता है । इस वर्ष 2026 में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की थीम GIVE TO GAIN (गिव टू गेन) घोषित की गई है जिसका अर्थ है कि यदि हम महिलाओं को उन्नति एवं प्रगति के अवसर प्रदान करते हैं तो इसका लाभ केवल एक महिला को ना मिलकर संपूर्ण समाज को मिलता है। कहा भी गया है कि अगर एक पुरुष शिक्षित होता है तो उसका लाभ केवल एक घर को मिलता है, परंतु यदि एक महिला शिक्षित होती है तो वह अपने घर अपने परिवार और संपूर्ण समाज को इसका लाभ प्रदान करती है । आज का दिवस यह भी विचार करने पर है कि महिलाओं के प्रति सम्मान हम सभी सुनिश्चित कर सकें और एक ऐसे समाज का निर्माण कर सकें जहां महिलाएं स्वतंत्र हो अपने सपनों को पूरा करने में, वो स्वतंत्र हो निर्णय लेने में,कहीं भी और कभी भी आने जाने में उनके मन में डर ना हो, किसी भी महिला के लिय अपमानजनक शब्द ना आएं । आज का दिन हमारी सोच में परिवर्तन करने का दिन है तथा सभी महिलाओं को सुरक्षित समाज देने का भी दिवस है ।अंतर्राष्ट्रीय दिवस पर एक स्व रचित कविता के माध्यम से सभी महिलाओं को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं ।
कविता का शीर्षक है – ” महिला

महिला को में क्या नाम दूं,
नहीं मिले वह शब्द जिनमें उन्हें बांध दूं।
मां बोलूं या पत्नी बोलूं,
या नटखट बेटी का नाम दूं ।
दादी, नानी उनको बोलूं,
या मां सा पावन नाम दूं।
जीवन की परिभाषा बोलूं,
या मानवता की भाषा बोलूं।
रंगों का इंद्रधनुष कहूं,
या महा मानुष उन्हें बोल दूं।
त्याग की मूरत उन्हें पुकारू,
या अमृत के रस में घोल दूं ।
महिला को मैं क्या नाम दूं …..
कभी वह लाल उल्लास सी,
कभी श्वेत उदास सी ,
कभी वह पीला यौवन,
कभी नीला आकाश सी,
उसके किस रंग को मैं देखूं,
हर रंग में वह खास सी,
हर रंग में बिंदास सी ।
महिला को मैं क्या नाम दूं ….
कभी वह ममता की मूरत,
कभी लगे हया की सूरत,
कभी लगती फौलाद है,
कभी अंगारों की आग है।
महिला को मैं क्या नाम दूं…..
कभी शान्त समंदर है,
कभी ममता का मंदिर है।
कभी युद्ध की ज्वाल सी,
कभी धरा विकराल सी।
कभी लावा ज्वालामुखी का,
कभी फूल चंद्रमुखी का।
महिला को में क्या नाम दूं ….
ईश्वर का अवतार लगे है,
जीवन का सारा सार लगे है ।
सारी श्रद्धा उसमें उतार दूं,
जीवन का सारा सार दूं,
जीवन का सारा सार दूं।।
महिलाएं उन्नति एवं प्रगति के पथ पर अग्रसर रहे और संपूर्ण विश्व में महिलाओं की आभा चमकती दमकती रहे और यह विश्व उनकी आभा से लाभान्वित हो इसी आशा के साथ पुनः सभी महिलाओं को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

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