*स्मृतियों के झरोखे से – 1975-76 की एक अमिट छाया चित्र यादों के झरोखे से: आलेख महेन्द्र पाल सिंह रावत अध्यक्ष पूर्व सैनिक संघर्ष समिति*
यह छायाचित्र केवल एक तस्वीर नहीं, मेरे जीवन का एक पवित्र पृष्ठ है। सन् 1975-76 में राजकीय इंटर कॉलेज, बीरोंखाल के प्रांगण में एक भव्य रामलीला का मंचन हुआ था। इस आयोजन की अध्यक्षता मेरे पूज्य पिताजी स्वर्गीय श्री मनवर सिंह गोर्ला रावत जी ने की थी। उस समय मेरी आयु मात्र 12 वर्ष की थी। स्मरण है, मैं अपने पिताजी के चरणों के पास बैठा था और वही क्षण कैमरे में कैद हो गया। आज जब इस चित्र को देखता हूँ, तो पिताजी का वात्सल्य, उनका अनुशासन और संस्कारों की वह छाया मुझे आज भी प्रेरणा देती है।

इस चित्र में दिखने वाली प्रत्येक पुण्यात्मा अपने आप में एक संस्था थी। बरबस ही इन माननीयों की याद ने मुझे बाल्यकाल की उन सुनहरी स्मृतियों में लौटा दिया है। इस तस्वीर में ऐसे अनेक व्यक्तित्व हैं जिन्होंने अपने जीवनकाल में ज्ञान, सेवा और कर्म की ऊंचाइयों को छुआ श्री खुशहाल सिंह जी – सम्मानित शिक्षाविद, स्वर्गीय महावीर सिंह जी – शिक्षाविद, स्वर्गीय सुल्तान सिंह जी, स्वरूप सिंह जी, पृथ्वीधर घोलाखंडी जी, थमन सिंह जी, शंकर सिंह जी, सत्येंद्र सिंह जी, हरदयाल सिंह जी, भगत सिंह जी, ज्ञान सिंह जी, राय सिंह जी, पान सिंह जी, बीरेंद्र सिंह जी, स्वरूप सिंह जी, ख्यात सिंह जी और भवान सिंह जी आदि।
ये सभी अपने समय के गुणी, यशस्वी और जन-जन में सम्मानित व्यक्तित्व थे। इनके आदर्श, इनकी कथनी-करनी और इनका समर्पण आज भी समाज के लिए मिसाल है।
इन सबकी मधुर स्मृतियां आज भी मेरे मन-मस्तिष्क को उद्वेलित करती हैं, प्रफुल्लित करती हैं और जीवन-पथ पर मार्गदर्शन का काम करती हैं। ये स्मृतियां केवल अतीत नहीं हैं, ये हमारी धरोहर हैं। ये हमें हमारे जीवन के सच्चे उद्देश्यों की याद दिलाती हैं और हमें अपने लक्ष्यों की ओर निरंतर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती हैं।
वृक्ष कितना भी बड़ा हो जाए, जड़ें नहीं भूलता।
ये चित्र, ये चेहरे, ये नाम – मेरी जड़ें हैं, मेरी पहचान हैं।
सादर नमन उन सभी पुण्यात्माओं को।
महेंद्र पाल सिंह रावत, अध्यक्ष पूर्व सैनिक संघर्ष समिति।

