*एक शतायु वीर माता से मुलाकात – श्रीमती भूमा देवी वीरता और गर्व का जीवंत अहसास, मानो शहीद गुमान सिंह स्वयं पूर्व सैनिक संघर्ष समिति, कोटद्वार को अपना आशीर्वाद दे रहे हों* *महेन्द्र पाल सिंह रावत अध्यक्ष पूर्व सैनिक संघर्ष समिति*

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एक शतायु वीर माता से मुलाकात – श्रीमती भूमा देवी
वीरता और गर्व का जीवंत अहसास, मानो शहीद गुमान सिंह स्वयं पूर्व सैनिक संघर्ष समिति, कोटद्वार को अपना आशीर्वाद दे रहे हों!…………..

  आज कोटद्वार के ग्राम गिवाई स्रोत कोटद्वार  में हमारा सौभाग्य था कि हम एक जीवित इतिहास से मिले। *श्रीमती भूमा देवी*, उम्र लगभग 100 वर्ष, *वीर चक्र विजेता शहीद राइफलमैन गुमान सिंह, 3 गढ़वाल राइफल्स* की धर्मपत्नी से *स्नेह भेंट* की। 

  घर के बरामदे में खाट पर बैठी, सिर पर लाल साफा, आँखों में सौ साल का धैर्य, मौन और स्वाभिमान लिए यह वीर माता आज भी उसी आन-बान से जी रही हैं। उनकी हर साँस मानो अपने शहीद पति के जीवंत इतिहास की गाथा सुना रही है। उस मौन में रणभूमि की हुंकार थी, उस धैर्य में हिमालय सा अडिगत्व था।

*राइफलमैन गुमान सिंह, No 15844, 3 गढ़वाल राइफल्स*, ने मातृभूमि की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान दिया। राष्ट्र ने उन्हें *वीर चक्र* से सम्मानित किया। पर उनकी पत्नी भूमा देवी ने जो त्याग किया, उसके लिए कोई पदक नहीं बना। उनका त्याग पदकों से बहुत ऊपर है। वह त्याग है – एक पूरी उम्र की तन्हाई, एक पूरी उम्र का इंतज़ार, और फिर भी राष्ट्र के प्रति अटूट विश्वास।

  जवान पति को खोने के बाद इन्होंने अकेले ही परिवार संभाला, बच्चों को पाला, और आज 100 साल की उम्र में भी किसी के आगे हाथ नहीं फैलाया। इनके चेहरे की एक-एक झुर्री में एक पूरी शताब्दी का इतिहास दर्ज है। और आँखों में वो गर्व है जो सिर्फ एक शहीद की पत्नी के पास होता है – वह गर्व जो कहता है, "मेरा सुहाग देश पर कुर्बान हुआ"।

100 साल की उम्र में जब शरीर जवाब दे देता है, तब सिर्फ स्वाभिमान ही मनुष्य को खड़ा रखता है। भूमा देवी माता जी का स्वाभिमान आज भी हिमालय सा अडिग है। इनके आशीर्वाद में वो शक्ति है जो पूरी पलटन का हौसला बढ़ा दे, जो टूटते मनोबल को फिर से खड़ा कर दे। उनके आशीष में हमें शहीद गुमान सिंह का स्पर्श महसूस हुआ।

*आज इनसे मिलकर आँखें नम भी हुईं और गर्व से ऊँची भी।* नम इसलिए कि इस मिट्टी में ऐसी माताएं हैं जो अपने कलेजे के टुकड़ों को सीमा पर भेजकर खुद दशकों की तन्हाई ओढ़ लेती हैं। गर्व इसलिए कि हम उस परंपरा के वंशज हैं जहाँ माताएं अपने सुहाग को राष्ट्र पर कुर्बान कर देती हैं और फिर भी मुस्कुराकर कहती हैं – "देश से बड़ा कुछ नहीं"।

गढ़वाल राइफल्स का नारा है – “वीर भोग्य वसुंधरा” यानी वीर ही धरती को भोगते हैं। शहीद गुमान सिंह, वीर चक्र की वीरांगना श्रीमती भूमा देवी इस नारे की जीवित, बोलती मिसाल हैं। वे स्वयं में एक जीता-जागता वीर चक्र हैं।

*पूर्व सैनिक संघर्ष समिति, कोटद्वार* का यह सौभाग्य है कि आज हमें शतायु वीर माता का आशीर्वाद प्राप्त हुआ। यह आशीर्वाद समिति के हर सदस्य के लिए शहीद गुमान सिंह का आदेश है – कि हम अंतिम शहीद परिवार तक न्याय और सम्मान पहुँचाने के अपने संकल्प पर अडिग रहें।

 *शतायु वीर माता भूमा देवी को हमारा शत-शत नमन।*  

आपका आशीर्वाद ही गढ़वाल राइफल्स का सबसे बड़ा वीर चक्र है। आप स्वस्थ रहें, दीर्घायु हों। आपकी छाया हम सब पर बनी रहे। इस अवसर पर ठाकुर सिंह, त्रिलोक सिंह, सुरेश रावत, अनसूया प्रसाद सेमवाल, गोपाल सिंह, डीएसरावत, जीत सिंह और ताजबर सिंह रावत उपस्थित थे।

          जय हिंद

महेंद्र पाल सिंह रावत अध्यक्ष
पूर्व सैनिक संघर्ष समिति।

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