विदेशी प्रश्न, देसी प्रोपेगेंडा और “कथित निष्पक्षता” का वैश्विक मंच:उत्तराखंड के लोकप्रिय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट ने नार्वे की विपक्षी दल के मुख पत्र की तथाकथित पत्रकार के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नार्वे दोरे के दौरान पूछे गये भारत विरोधी ऐजेंडे के तहत किए गये प्रश्न पर विद्वान, राष्ट्रवादी चिंतक तथा उत्तराखण्ड सरकार में सिंचाई राज्य मंत्री ऋषि कण्डवाल से इस संदर्भ में उनके नजरिये को लेकर प्रश्न किया तो उन्होंने बिना लाग लपेट इस संदर्भ में अपने विचार अलग खबर डाटकाम से साझा किए
नार्वे की कथित पत्रकार के सवाल पर उठा विवाद, भारत विरोधी नैरेटिव गढ़ने के आरोप
कोटद्वार: सिंचाई राज्य मंत्री तथा विचारक ऋषि कण्डवाल कहते हैं कि
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता” का झंडा उठाने वाले कुछ विदेशी पत्रकारों की निष्पक्षता इस मुद्दे से एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है।ऋषि कण्डवाल कहते हैं कि हाल ही में नार्वे की एक कथित पत्रकार द्वारा भारत से जुड़ा पूछा गया प्रश्न सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा का विषय बन गया। उनका कहना है कि यह प्रश्न पत्रकारिता कम और पूर्व निर्धारित पटकथा का हिस्सा अधिक प्रतीत हुआ।
राष्ट्रवादी विचारक व उत्तराखण्ड सरकार में सिंचाई राज्य मंत्री ऋषि कण्डवाल के अनुसार प्रश्न की भाषा, प्रस्तुति और समय ने यह संकेत देने का प्रयास किया मानो भारत में लोकतंत्र सही स्थित की ओर नही है जबकि बंगाल राज्य में नब्बे प्रतिशत से अधिक का मत प्रतिशत इन ऐजेंडा धारकों के मुख पर भारत की जनता का सीधे तमाचा है और अगर बात करें अन्य देशों की तो पाकिस्तान में हिन्दू समाज पर अमानवीय अत्याचार होते हैं तब ये ऐजेंडा चलाने वाले चुप्पी साध लेते हैं इसके साथ ही विश्व के अनेक देशों में अभिव्यक्ति की स्थिति पर सुविधाजनक मौन साध लिया जाता है। विद्वान विचारक ऋषि कण्डवाल ने तंज कसते हुए कहा कि “भारत पर प्रश्न पूछना आजकल कुछ विदेशी तथा भारत की प्रगति तथा राजनीति स्थिरता से घबराये पत्रकारों का पसंदीदा स्टार्टअप मॉडल बन चुका है।” उन्होंने कहा कि भारत के मीडिया क्षेत्र से भी छन छन कर इस संदर्भ में जो रिपोर्ट आ रही हैं उसमें बताया जा रहा है कि
इस पूरे प्रकरण में भारत के कुछ राजनीतिक दलों के कथनों और सोशल मीडिया सामग्री का भी उपयोग किया गया। इसके साथ ही कुछ स्वयंभू यूट्यूब पत्रकारों पर आरोप लगा कि उन्होंने विदेशी मंचों को वही सामग्री परोसी, जिसमें भारत की समस्याओं को माइक्रोस्कोप से और उपलब्धियों को दूरबीन से देखने की पुरानी परंपरा निभाई गई। *अलग खबर के लिये अजय तिवाड़ी
विद्वान विचारक ऋषि कण्डवाल कहते हैं कि भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा चलाने वाले लोगों के साथ कुछ लोग उभय पक्ष से भी हैं वे कटाक्ष करते हुए कहते हैं कि “देश में अगर बारिश कम हो जाए तो उसका दोष भी भारत की निर्वाचित सरकार तथा भारत के लोकतंत्र पर डाल देते हैं।” वहीं राष्ट्रवादी विचारक तथा विद्वान ऋषि कणु यह भी कहते हैं कि भारत विरोधी विमर्श तैयार करने वालों को देश की उपलब्धियों से अधिक उसकी छवि धूमिल करने में रुचि दिखाई देती है। पत्रकार अजय तिवाड़ी की सिंचाई राज्य मंत्री ऋषि कण्डवाल के साथ वार्ता के महत्व पूर्ण अंश।।।
ऋषि कण्डवाल जी कहते हैं कि लोकतंत्र में प्रश्न पूछना आवश्यक है, किंतु प्रश्न और प्रोपेगेंडा के बीच की रेखा तब धुंधली हो जाती है जब निष्पक्षता केवल एक दिशा में दिखाई दे। फिलहाल यह विवाद अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की विश्वसनीयता और “चयनात्मक चिंता” पर नई बहस छेड़ चुका है।
