मेहनत, संघर्ष और समर्पण की मिसाल हैं ऋषि कण्डवाल, संगठन के प्रति निष्ठा ने बनाया भाजपा का भरोसेमंद चेहरा

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देहरादून। किसी भी राजनीतिक संगठन की असली ताकत उसके कार्यकर्ताओं से होती है और जब कोई कार्यकर्ता वर्षों तक बिना थके संगठन के लिए काम करता है, अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाता है और हर चुनौती को स्वीकार करते हुए आगे बढ़ता है, तो वह केवल एक पदाधिकारी नहीं रहता, बल्कि संगठन की पहचान बन जाता है। ऋषि कण्डवाल जी का सफर इसी समर्पण, मेहनत, संघर्ष और संगठन के प्रति निष्ठा की कहानी है।

ऋषि कण्डवाल जी ने अपने संगठनात्मक जीवन में लंबे समय तक जमीनी स्तर पर काम करते हुए विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। नगर स्तर से शुरू हुआ उनका सफर धीरे-धीरे जिला, विभाग और प्रदेश स्तर की जिम्मेदारियों तक पहुंचा। इस दौरान उन्होंने संगठनात्मक कार्यों के साथ-साथ विभिन्न चुनावों में भी महत्वपूर्ण दायित्व निभाए और पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा के साथ निभाया।

उनकी कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषता जिम्मेदारी मिलने के बाद उसे पूरा करने के लिए पूरी तरह समर्पित हो जाना रही है। हरिद्वार और टिहरी लोकसभा से लेकर अल्मोड़ा-पिथौरागढ़, पश्चिम बंगाल, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश तक विभिन्न चुनावी जिम्मेदारियों में सक्रिय भूमिका निभाने का अनुभव उनके व्यापक संगठनात्मक अनुभव को दर्शाता है।

नगर से प्रदेश तक जिम्मेदारियों का सफर

ऋषि कण्डवाल जी की राजनीतिक एवं संगठनात्मक यात्रा में कई महत्वपूर्ण पड़ाव आए। उन्होंने चुनावी अभियानों में पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में काम किया और अलग-अलग क्षेत्रों में संगठन को मजबूती देने के लिए समय दिया। वर्ष 2017 में अल्मोड़ा जिले में शताब्दि विस्तारक के रूप में जिम्मेदारी निभाने से लेकर वर्ष 2018 में अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ संसदीय क्षेत्र में चुनावी दायित्व और वर्ष 2019 में पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा में विस्तारक के रूप में कार्य करना उनके समर्पित संगठनात्मक जीवन को दर्शाता है।

वर्ष 2020 में दिल्ली कैंट विधानसभा में प्रवासी पूर्णकालिक के रूप में जिम्मेदारी निभाने के बाद वर्ष 2021 में पश्चिम बंगाल के राणाघाट में चुनावी भूमिका निभाई। इसी अवधि में उत्तराखंड में प्रदेश स्तर की संगठनात्मक जिम्मेदारियां भी संभालीं। इसके बाद रुद्रप्रयाग जिला संगठन प्रभारी के रूप में भी उन्होंने संगठनात्मक कार्यों को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई।

वर्ष 2022 और 2023 में हिमाचल प्रदेश के चुनावों में पूर्णकालिक प्रवासी के रूप में उनकी सक्रियता रही। सोलन जिले से लेकर हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र तक संगठनात्मक एवं चुनावी जिम्मेदारियों को निभाने के बाद वर्ष 2024 में उन्हें पौड़ी जिले की संगठनात्मक जिम्मेदारी मिली।

वर्ष 2025 में नगरनिगम कोटद्वार के चुनाव संयोजक के रूप में जिम्मेदारी निभाने के साथ उन्हें सिंचाई सलाहकार समिति उत्तराखंड सरकार के उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी मिली। वर्ष 2026 में प्रदेश सहसंयोजक, पं. दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान तथा वर्तमान में प्रदेश सहसंयोजक, प्रदेश प्रशिक्षण विभाग की जिम्मेदारी उनके संगठनात्मक सफर का महत्वपूर्ण पड़ाव है।

दशकों से संगठन के लिए सक्रिय

ऋषि कण्डवाल जी की पहचान केवल हाल के वर्षों की राजनीतिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है। उनका संगठनात्मक जुड़ाव लंबे समय से रहा है। नगर स्तर से लेकर जिला और विभाग स्तर तक विभिन्न जिम्मेदारियां निभाते हुए उन्होंने संगठन के विस्तार और कार्यकर्ताओं के बीच काम करने का अनुभव हासिल किया।

बजरंगदल में नगर संयोजक कोटद्वार से लेकर जिला संयोजक पौड़ी, विभाग संयोजक पौड़ी, गढ़वाल संभाग संयोजक और प्रान्त स्तर की जिम्मेदारियों तक उनका सफर रहा। इसके बाद विश्व हिन्दू परिषद उत्तराखंड में भी उन्होंने विभिन्न संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभाईं। सामाजिक समरसता से जुड़े कार्यों में भी उनकी भूमिका रही।

पद से ज्यादा महत्वपूर्ण रहा संगठन

ऋषि कण्डवाल जी के सफर की सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने संगठन में मिलने वाली जिम्मेदारियों को केवल पद के रूप में नहीं, बल्कि दायित्व के रूप में स्वीकार किया। पहाड़ से लेकर मैदानी क्षेत्रों और उत्तराखंड से बाहर विभिन्न राज्यों तक लगातार संगठनात्मक एवं चुनावी कार्यों में सक्रिय रहना उनके समर्पण को दर्शाता है।

एक पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में लंबे समय तक घर-परिवार और व्यक्तिगत सुविधाओं से ऊपर संगठन के कार्य को प्राथमिकता देना आसान नहीं होता। अलग-अलग स्थानों पर रहकर चुनावी जिम्मेदारियां निभाना, कार्यकर्ताओं के बीच पहुंचना, संगठन को मजबूत करना और दिए गए लक्ष्य को पूरा करने के लिए लगातार काम करना उनकी कार्यशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।

भाजपा के लिए समर्पण और मेहनत की पहचान

ऋषि कण्डवाल जी को आज भाजपा की संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय और अनुभवी चेहरों में गिना जाता है। उनकी पहचान केवल वर्तमान जिम्मेदारियों से नहीं, बल्कि उन वर्षों की मेहनत से बनी है जिनमें उन्होंने अलग-अलग स्तरों पर संगठन के लिए काम किया।

उनकी यात्रा यह संदेश देती है कि संगठन में लंबे समय तक काम करने वाले कार्यकर्ता की सबसे बड़ी पूंजी उसका विश्वास, अनुभव, अनुशासन और निरंतर मेहनत होती है। यही कारण है कि नगर स्तर से शुरू हुआ उनका सफर आज प्रदेश स्तर की जिम्मेदारियों तक पहुंचा है।

नगर संयोजक से प्रदेश सहसंयोजक, प्रदेश प्रशिक्षण विभाग तथा उपाध्यक्ष सिंचाई सलाहकार समिति उत्तराखंड सरकार तक का यह सफर ऋषि कण्डवाल जी के जीवन में कई त्याग और समर्पण को परिभाषित करता है।

ऋषि कण्डवाल जी का सफर उन कार्यकर्ताओं के लिए भी प्रेरणा है, जो संगठन में पद की अपेक्षा किए बिना लगातार मेहनत करते हैं और जिम्मेदारी मिलने पर पूरी निष्ठा से उसका निर्वहन करते हैं। वर्षों की तपस्या, लगातार मेहनत और संगठन के प्रति अटूट समर्पण ने ऋषि कण्डवाल जी को एक ऐसे कार्यकर्ता के रूप में स्थापित किया है, जिनकी पहचान उसके पद से कहीं अधिक उसके काम और संगठन के प्रति निष्ठा से होती है।

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