रिखणीखाल/नैनीडांडा – ये कैसा दुर्भाग्य है कंडलसेरा-द्वारी-भौन सड़क मार्ग का?
लैंसडौन विधानसभा के रिखणीखाल प्रखंड के अंतर्गत कंडलसेरा-द्वारी-भौन सड़क मार्ग एक बहुत बड़ी आबादी की जीवनरेखा है। यह सड़क कंडलसेरा, मेलधार, सिद्धपुर, इंदिरा कॉलोनी (हरिजन बस्ती), द्वारी, भातखाल, भंडूखाल, नावेतल्ली, चन्दनपुर, हरपाल तथा नैनीडांडा प्रखंड के चैड-चैनपुर, मल्ला खोला, तल्ला खोला, मंजखोला, छुड़खोला, सुकिलधार, चैबाडा, देदार, असनेत, डंडधार, सुखरौ, अन्दरोली, भौन तक जाती है।
इस सड़क मार्ग की कुल लंबाई लगभग 29 किलोमीटर है और इसका उद्घाटन वर्ष 2003-2004 में ही हो गया था। इस मुख्य मार्ग से कई गाँवों के लिए संपर्क मार्ग भी कटे हैं, जैसे डल्ला, क्वीराली, सिलगांव, नावेतल्ली, तोलियोडांडा आदि। इस सड़क पर कई स्कूल, कॉलेज, ग्राम पंचायतें और घनी आबादी आश्रित है।
यह सड़क तत्कालीन विधायक लेफ्टिनेंट जनरल (अवकाश प्राप्त) टी.पी.एस. रावत जी के कार्यकाल में स्वीकृत हुई थी। तब से लगभग 22-23 साल पूरे होने को हैं, लेकिन आज तक यह सड़क पूरी तरह से यातायात के लिए सुचारू नहीं हो पाई है।
दुर्दशा की स्थिति –
- इन 22-23 वर्षों में केवल 12-13 किलोमीटर तक ही डामरीकरण हो पाया है, वह भी घटिया गुणवत्ता का। सड़क पर जगह-जगह गड्ढे और मलबा पड़ा है।
- चैड-चैनपुर से आगे भौन तक तो सड़क की हालत अत्यंत जर्जर और दयनीय है, यातायात के लिए बिल्कुल भी सुलभ नहीं है।
- आज तक इस पूरे मार्ग पर नियमित यातायात चालू नहीं हुआ। अभी सिर्फ तोलियोडांडा तक दिन में एक बार 20-25 सीटर छोटी बस चलती है। यात्री भेड़-बकरियों की तरह ठूंस-ठूंस कर सफर करने को मजबूर हैं।
- जबकि तोलियोडांडा तो मुख्य सड़क मार्ग पर भी नहीं है, वह एक संपर्क मार्ग है। बस मालिकों की मनमर्जी से मुख्य मार्ग को छोड़कर संपर्क मार्ग पर बस चलाई जा रही है, जो जनता की इच्छा के विपरीत है। इससे क्षेत्र की जनता में भारी रोष है।
- सड़क पर पड़ा मलबा और पत्थर कभी नहीं हटाया जाता। आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। गैस आपूर्ति के वाहन भी इस सड़क पर आने से कतराते हैं।
यह क्षेत्र की जनता की उदासीनता कही जाए या जनप्रतिनिधियों और लोक निर्माण विभाग की लापरवाही, दोनों ही बराबर के दोषी हैं।
प्रश्न यह है कि –
क्या शासन, प्रशासन और विभाग के बड़े-बड़े ओहदेदार इस सड़क को सुचारू यातायात के लिए चालू कर सकेंगे? 23 साल बाद भी अगर एक सड़क यातायात के लिए नहीं खुल पाई, तो यह विकास के दावों पर एक बड़ा सवाल है।
