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प्रत्येक नवरात्र के पीछे है वैज्ञानिक आधारआयरन लेडी रीना सिंह

प्रत्येक नवरात्र के पीछे है वैज्ञानिक आधारआयरन लेडी रीना सिंह
पृथ्वी द्वारा सूर्य की परिक्रमा काल के दौरान एक साल में होती है चार संधियां_
रवीश पाण्डेय
जन संघ सेवक मंच और अंतरराष्ट्रीय मां विद्या ट्रस्ट महिला प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेत्री आयरन लेडी रीना सिंह ने एक प्रेस वार्ता के दैरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए सभी देशवासियों को चैत्र माह की नवरात्रि के प्रारंभ होते ही अपनी शुभकामनाएं दी और इसके वैज्ञानिक आधार पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि पृथ्वी द्वारा सूर्य की परिक्रमा काल में एक साल की चार संधियां होती हैं। जिनमें से मार्च व सितंबर माह में पड़ने वाली गोल संधियों में साल के दो मुख्य नवरात्र पड़ते हैं। इस समय रोगाणु आक्रमण की सर्वाधिक संभावना होती है।
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ऋतु संधियों में अक्सर शारीरिक बीमारियां बढ़ती हैं। अत: उस समय स्वस्थ रहने के लिए, शरीर को शुद्ध रखने के लिए, तन-मन को निर्मल रखने के लिए की जाने वाली प्रक्रिया का नाम ‘नवरात्र’ है।
अमावस्या की रात से अष्टमी तक या पड़वा से नवमी की दोपहर तक व्रत नियम के अनुसार चलने से नौ रात यानी ‘नवरात्र’ नाम सार्थक है। चूंकि यहां रात गिनते हैं इसलिए इसे नवरात्र यानि नौ रातों का समूह कहा जाता है।
रूपक के द्वारा हमारे शरीर को नौ मुख्य द्वारों वाला कहा गया है और, इसके भीतर निवास करने वाली जीवन शक्ति का नाम ही दुर्गा देवी है।
नवरात्रि में राशि अनुसार किन देवी-देवता का करें पूजन….इस बात पर भी अपने विचार व्यक्त करते हुए आयरन लेडी रीना सिंह ने पत्रकार रवीश पाण्डेय से बात करते हुए कहा कि मुख्य इन्द्रियों में अनुशासन, स्वच्छ्ता, तारतम्य स्थापित करने के प्रतीक रूप में एवं शरीर तंत्र को पूरे साल के लिए सुचारू रूप से क्रियाशील रखने के लिए नौ द्वारों की शुद्धि का पर्व नौ दिन मनाया जाता है। इनको व्यक्तिगत रूप से महत्व देने के लिए नौ दिन, नौ दुर्गाओं के लिए कहे जाते हैं।
हालांकि शरीर को सुचारू रखने के लिए विरेचन, सफाई या शुद्धि प्रतिदिन तो हम करते ही हैं किन्तु अंग-प्रत्यंगों की पूरी तरह से भीतरी सफाई करने के लिए हर 6 माह के अंतर से सफाई अभियान चलाया जाता है जिसमें सात्विक आहार के व्रत का पालन करने से शरीर की शुद्धि, साफ-सुथरे शरीर में शुद्ध बुद्धि, उत्तम विचारों से ही उत्तम कर्म, कर्मों से सच्चरित्रता और क्रमश: मन शुद्ध होता है, क्योंकि स्वच्छ मन मंदिर में ही तो ईश्वर की शक्ति का स्थायी निवास होता है।
नवरात्रि पूजन की सरलतम विधि
चैत्र और आश्विन नवरात्रि ही मुख्य माने जाते हैं इनमें भी देवी भक्त आश्विन नवरात्रि का बहुत महत्व है। इनको यथाक्रम वासंती और शारदीय नवरात्र कहते हैं। इनका आरंभ चैत्र और आश्विन शुक्ल प्रतिपदा को होता है। ये प्रतिपदा ‘सम्मुखी’ शुभ होती है।
नवरात्रि वर्ष में चार बार आती है। जिसमे चैत्र और आश्विन की नवरात्रियों का विशेष महत्व है। चैत्र नवरात्रि से ही विक्रम संवत की शुरुआत होती है। इन दिनों प्रकृति से एक विशेष तरह की शक्ति निकलती है। इस शक्ति को ग्रहण करने के लिए इन दिनों में शक्ति पूजा या नवदुर्गा की पूजा का विधान है। इसमें मां की नौ शक्तियों की पूजा अलग-अलग दिन की जाती है। पहले दिन मां के शैलपुत्री स्वरुप की उपासना की जाती है। इस दिन से कई लोग नौ दिनों या दो दिन का उपवास रखते हैं।
अंत में पुनः एक बार सभी देशवासियों को नवरात्र की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए मंगल और प्रसन्न जीवन प्रदान करने की मां दुर्गा से विनती की तथा इस पर्व को धूम धाम से मानने की अपील की।

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