*राष्ट्रीयत एकता के महान शिल्पी सरदार बल्लभ भाई पटेल: आलेख और संकलन ख्याति प्राप्त शिक्षक जे पी कुकरेती* *अलग खबर डाटकाम*

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💫 “मैंने विभाजन को अंतिम उपाय मे रूप में तब स्वीकार किया था, जब संपूर्ण भारत के हमारे हाथ से निकल जाने की संभावना हो गई थी। मैंने यह भी शर्त रखी कि, देशी राज्यों के संबंध में ब्रिटेन हस्तक्षेप नहीं करेगा। इस समस्या को हम सुलझाएंगे।”_“सरदार”

✍️ “गुजरात के नाडियाड में 31 अक्टूबर साल 1875 को जन्मे सरदार वल्लभभाई पटेल को नए भारत का शिल्पकार कहा जाता है. आजादी के बाद टुकड़ों में बंटी 565 रियासतों का विलय करके सरदार पटेल ने अखंड भारत का निर्माण किया था।”

✍️ “सरदार पटेल झवेरभाई पटेल और लाडबा पटेल की चौथी संतान थे. सरदार पटेल का पूरा नाम वल्लभभाई जावेरभाई पटेल था. आजादी के बाद बनी पहली अंतरिम कैबिनेट में पटेल उपप्रधानमंत्री बने. बतौर गृहमंत्री पूरे भारत का एकीकरण किया.सरदार वल्लभभाई पटेल को साल 1991 में मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया.”

✍️ ” सरदार पटेल के पास खुद का मकान भी नहीं था वह अहमदाबाद में किराए के मकान में रहते थे। कहते हैं-मुंबई में,15 दिसंबर 1950 को जब उनका निधन हुआ, तब उनके बैंक खाते में सिर्फ ₹260 मौजूद थे।”

✍️ “बात सन 1928 की है. ब्रिटिश सरकार ने गुजरात में किसानों पर 22 फीसदी का लगान थोप दिया था. पटेल ने इसके खिलाफ आंदोलन किया. बारदोली में पटेल ने किसानों को साथ लेकर ब्रिटिश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. सरकार को झुकना पड़ा और लगान की दर घटाकर 6.03 फीसदी कर दिया गया. आंदोलन की सफलता से उत्साहित बारदोली की महिलाओं ने नाम दिया सरदार.”*

✍️ “11 जनवरी 1909 को बल्लभभाई पटेल कोर्ट में बहस कर रहे थे. तभी उन्हें एक तार मिला. वल्लभभाई पटेल ने वो तार चुपचाप अपनी कोर्ट की जेब में रख लिया. 2 घंटे की बहस के बाद पटेल वो केस जीत गए. केस जीतने के बाद वकीलों और जज को पता चला कि, तार में दरअसल पटेल की धर्मपत्नी की मृत्यु का समाचार था. जज ने पटेल से पूछा कि,आपने कोर्ट को बताया क्यों नहीं. जवाब में पटेल ने कहा कि, मैं अपना फर्ज निभा रहा था.”*

✍️ “गुजरात में नर्मदा नदी के किनारे सरदार सरोवर बांध से साढ़े 3 किमी दूर भारत रत्न से सम्मानित सरदार पटेल की 182 मीटर ऊंची प्रतिमा बनाई गई है. स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के नाम से लोकप्रिय सरदार पटेल की प्रतिमा विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा है.”

✍️ “हैदराबाद का नवाब विलय के लिए तैयार नहीं हो रहा था. वहां दो गुटों में खूनी संघर्ष छिड़ा था. सरदार पटेल ने कहा कि, हैदराबाद भारत के पेट में मौजूद कैंसर का रूप लेता जा रहा है. इसका इलाज करना होगा. पटेल ने कहा कि वहां सर्जिकल ऑपरेशन किया जाना चाहिए. मीटिंग में शामिल एक सेनाध्यक्ष जनरल रॉबर्ट बूचर इसके लिए तैयार नहीं था. उसने कहा कि यदि मेरी मर्जी के खिलाफ हैदराबाद में सैन्य कार्रवाई की गई तो मैं कल इस्तीफा दे दूंगा. जवाब में सरदार पटेल ने कहा कि बेशक आप आज ही इस्तीफा दे दीजिए, लेकिन कल हर हाल में हैदराबाद में सर्जिकल ऑपरेशन शुरू किया जाएगा. आखिरकार सैन्य हस्तक्षेप के बाद ही हैदराबाद का भारत में विलय करवाया जा सका. ये उनके सख्त फैसला लेने की क्षमता का एक नमूना था.”*

…………………………. शिक्षक जे पी कुकरेती।

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