“ना जाने किस मिट्टी के बने थे,
देश की सेवा में हर दिन तने थे।
जवानियाॅं उन्होनें जेलों में गुजार दी,
देश की खातिर अपनी जान वार दी।।”
“राष्ट्रपिता महात्मा गाॅंधी की पुण्यतिथि के मौके पर पूरे भारत में हर साल 30 जनवरी को शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है।” “शहीद दिवस उन स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए मनाया जाता है, जिन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया है। महात्मा गांधी जिन्हें ‘राष्ट्रपिता” और “बापू” के नाम से भी पुकारा जाता है, 1948 में आज ही के दिन देश के लिए शहीद हो गए थे।”
🎬भारत में ‘शहीद दिवस’ (Martyrs’ Day) उन वीर आत्माओं को श्रद्धांजलि देने के लिए मनाया जाता है, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा और स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।
भारत में मुख्य रूप से शहीद दिवस दो प्रमुख तिथियों पर मनाया जाता है:
📒30 जनवरी (महात्मा गांधी की पुण्यतिथि)- 30 जनवरी 1948 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या कर दी गयी थी। बापू के अहिंसा के सन्देश और स्वतन्त्रता संग्राम में उनके योगदान को याद करते हुए इस दिन को शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है।
✅परंपरा: इस दिन राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमन्त्री राजघाट पर गाॅंधी जी की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित करते हैं। सुबह 11 बजे पूरे देश में दो मिनट का मौन रखा जाता है।
✍️23 मार्च (भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव का बलिदान दिवस)- यह दिन युवाओं और क्रांतिकारियों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का दिन है।
महत्व: 23 मार्च 1931 को ब्रिटिश सरकार ने क्रांतिकारी भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को लाहौर जेल में फाॅंसी दी थी। इन वीरों ने हँसते-हँसते देश के लिए फाॅंसी के फन्दे को चूम लिया था।
उद्देश्य: यह दिन देश के युवाओं को देशभक्ति और साहस की प्रेरणा देता है।
☄️✍️ भारत में कई तिथियाँ शहीद-दिवस के रूप में मनायी जाती हैं, जिनमें मुख्य हैं- 30 जनवरी, 23 मार्च, 21 अक्टूबर, 17 नवम्बर, 19 नवम्बर तथा 27 मई ।
✍️21 अक्टूबर (पुलिस शहीद दिवस): 1959 में लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स में चीनी सैनिकों के साथ लड़ते हुए शहीद हुए पुलिसकर्मियों की याद में मनाया जाता है।
कृतज्ञता: यह दिन हमें याद दिलाता है कि हमारी आजादी की कीमत कितनी भारी थी।
🙏🌹प्रेरणा: आने वाली पीढ़ियों में राष्ट्रप्रेम और त्याग की भावना जागृत करना।
💐एकता: वीर शहीदों की कहानियाँ जाति और धर्म से ऊपर उठकर राष्ट्र को एक सूत्र में पिरोती हैं।
“शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशां होगा।”
आओ, झुक के सलाम करे उनको,
जिनके हिस्से में ये मुकाम आता है।
खुशनसीब होते है वो लोग, जिनका खून देश के काम आता है।।” शिक्षक जे० पी० कुकरेती।



