भूमि खरीद में रखें सावधानी ठग दलालों से बचें, जानकारी ही बचाव: महेन्द्र पाल सिंह रावत अध्यक्ष पूर्व सैनिक संघर्ष समिति कोटद्वार

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भूमि खरीद फरोख्त में जानकारी के अभाव में कानूनी दाव पेचों के बीच पिसता सेवारत, पूर्व सैनिक एवं उनके आश्रित. आखिर कब कानूनी शिकंजो से मुक्ति मिलेगे जानकारी ही बचाव……..

कोटद्वार परिक्षेत्र के अंतर्गत भूमि खरीद फरोख्त में सैनिक, पूर्व सैनिक और उनके आश्रित ठगी और धोखाधड़ी के मामले देखने को मिल रहे है। इसके कई कारण है जिनको सैनिक और उनके आश्रित समझ नहीं पाते है इनमें निम्न लिखित मुख्य कारण है–

फर्जी दस्तावेज और पहचान– अपराधी जाली सेल डीड, जाली हस्ताक्षर या फर्जी आईडी का उपयोग करके जमीन का मालिक होने का नाटक करते हैं।

पुराने और अव्यवस्थित रिकॉर्ड – सरकारी रिकॉर्ड का पुराना होना, डिजिटलीकरण की कमी, और सब-रजिस्ट्रार व राजस्व विभाग के बीच तालमेल की कमी के कारण धोखाधड़ी आसान हो जाती है।
एक ही संपत्ति को कई खरीदारों को बेचना – जालसाज एक ही जमीन को एक से अधिक लोगों को बेचकर पैसा लेकर उसे चक्कर कटवाते रहते हैं। यह मामला कोटद्वार में अधिकतर राजस्व वाद में देखा जाता है।
खाली या लावारिस जमीन पर कब्जा – लंबे समय से खाली पड़ी या बिना निगरानी वाली जमीनों पर भूमाफिया फर्जी कागजात बनाकर कब्जा कर लेते हैं।
शक्ति के मुख्तारनामे (PoA) का दुरुपयोग – मालिक की अनुपस्थिति में या संपत्ति के मालिकों (विशेषकर एनआरआई) के विदेश में होने पर, पावर ऑफ अटॉर्नी का गलत इस्तेमाल कर जमीनें बेच दी जाती हैं।
अवैध कॉलोनी और रील से झांसा – सोशल मीडिया पर सुंदर वीडियो या रील दिखाकर अविकसित गैर- कानूनी कॉलोनियों में प्लाट बेचना। जो आजकल मुख्यतः ठगी कर लिए आजमाया जाता है
विवादित या सरकारी जमीन बेचना – ऐसी जमीन जो विवादित है, वन विभाग की है, या स्कूल/सार्वजनिक उपयोग के लिए है, उसे जानकारी छिपाकर बेचना।
भू दलालो का जाल– कोटद्वार परिक्षेत्र में भी भू दलालों का एक गिरोह या नेक्सस है जो भोले भाले सेवारत सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को मीठी मीठी बातों और लोक लुभावने आकर्षक भू दामों में फंसने का षड़यंत रचते है। जिसके झांसे मे आम नागरिक आसानी से फंस जाते है।

बचाव के उपाय
जमीन खरीदने से पहले, Any ROR ( Any Record of Rights ) उत्तराखंड जैसे सरकारी पोर्टलों के माध्यम से भूमि रिकॉर्ड (जमाबंदी) की ऑनलाइन जांच करें। यह सुनिश्चित करें कि विक्रेता के पास ही संपत्ति का अधिकार हो।
चेक या ऑन लाइन भुगतान करे। याद रहे एग्रीमेंट के शपथ पत्र को नोटराइज आवश्यक रूप से करे। जमीन की पटवारी के माध्यम से क्रय से पहले डिजिटल मैपिंग करवाए।
वर्तमान में पूर्व सैनिक संघर्ष समिति कोटद्वार के संज्ञान में 27 ऐसे केस है जिन में सेवारत, पूर्व सैनिकों और आश्रितों के साथ भू वाद तहसील और कोर्ट में चल रहे हैं। मेरा मानना हैं जानकारी ही बचाव का मूल मंत्र है।

महेंद्र पाल सिंह रावत
अध्यक्ष पूर्व सैनिक संघर्ष समिति।

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