*भगवान विष्णु के दस प्रमुख अवतारों में से एक कूर्म अवतार (कछुए का अवतार) क्यों माना जाता है महत्वपूर्ण जाने धर्म के मार्ग में: आलेख और संकलन ऋषि कण्डवाल*, *(विद्वान लेखक उत्तराखण्ड सरकार में राज्यमंत्री हैं) *

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भगवान विष्णु के दस प्रमुख अवतारों में से एक कूर्म अवतार (कछुए का रूप) अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह कथा हमें धैर्य, सहयोग और संतुलन का गहरा संदेश देती है।

एक समय देवताओं और असुरों के बीच युद्ध हुआ, जिसमें देवता कमजोर पड़ गए। अपनी शक्ति वापस पाने के लिए वे भगवान विष्णु की शरण में गए। भगवान ने उन्हें उपाय बताया कि यदि वे असुरों के साथ मिलकर समुद्र मंथन करें, तो अमृत प्राप्त हो सकता है, जिससे वे अमर हो जाएंगे।
देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन की तैयारी की। मंदराचल पर्वत को मंथन की मथनी बनाया गया और वासुकी नाग को रस्सी की तरह उपयोग किया गया। लेकिन जैसे ही मंथन शुरू हुआ, भारी मंदराचल पर्वत समुद्र में डूबने लगा।

तब भगवान विष्णु ने कूर्म (विशाल कछुए) का रूप धारण किया और समुद्र के नीचे जाकर अपनी पीठ पर मंदराचल पर्वत को संभाल लिया। उनकी मजबूत पीठ के सहारे मंथन सफलतापूर्वक जारी रहा।

समुद्र मंथन से अनेक दिव्य वस्तुएं निकलीं—जैसे लक्ष्मी जी, चंद्रमा, पारिजात वृक्ष और अंत में अमृत कलश। इस अमृत को पाने के लिए देवताओं और असुरों में संघर्ष हुआ, लेकिन अंततः भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण करके अमृत देवताओं को दिलाया।
कूर्म अवतार की यह कथा हमें सिखाती है कि किसी भी बड़े कार्य को पूरा करने के लिए धैर्य और सहयोग बहुत जरूरी होता है। जब जीवन में कठिनाइयाँ आती हैं, तब भगवान किसी न किसी रूप में सहारा बनते हैं।
यही कारण है कि कूर्म अवतार को स्थिरता, संतुलन और सहनशीलता का प्रतीक माना जाता है।

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