🌺🙏 कनकधारा स्तोत्र 🙏🌺 आदि शंकराचार्य जी द्वारा यह अद्भुत स्तोत्र माता महालक्ष्मी की स्तुति में रचा गया है।
“कनक” का अर्थ है “स्वर्ण” और “धारा” का अर्थ है “प्रवाह” — अर्थात् स्वर्ण की वर्षा कराने वाला स्तोत्र।
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अंगं हरेः पुलकभूषणमाश्रयन्ती
बृहन्नितम्बभरपीडितमन्दराभाम्।
अशेषविश्वमणिमण्डलमध्यवर्तीं
लक्ष्मीमनालसतां प्रकटिम् करोतु॥ १॥
🪔मुद्रान्विता मुदितमङ्गलसूत्रशोभाम्
उत्तुङ्गपीनकुचकुङ्कुमरागशोणाम्।
आविर्भवन्नवगुणार्णवसंभ्रमाय
मां पातु मङ्गलमयी मम मङ्गलाय॥ २॥
🪔जयत्ययं जगति मंगलदायकः स
मङ्गल्यनं मम जन्तुषु मंगलाय।
श्रीकण्ठदेहरमणीकमणीयरूपा
श्रीलक्ष्मीः शङ्करतनौ वसतु प्रसन्ना॥ ३॥
🪔दद्याद दयानुपवनो द्रविणाम्बुधारा
कास्मिन्नपि क्षण इति चिन्तयतो वि पङ्के।
नान्येऽहमिन्दुमुखि ते कृतकृत्य एव
श्रीकण्ठसंगमनसोपचरेषु दृष्टः॥ ४॥
🛕💫💫✨”प्रकाश पर्व दीपों का उत्सव दीपावली की शुभकामनाएं”
🌷🌷 “ॐ श्रींह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्मी नम:।।”🌷🌷…………जेपी कुकरेती।



