राजस्थान के झालावाड़ में स्कूल भवन के गिरने से मरे मासूमों की मौत का जिम्मेदार कौन?

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राजस्थान के झालावाड़ में स्कूल भवन के गिरने से मरे मासूमों की मौत का जिम्मेदार कौन, सबक लें राज्य सरकार: भारत में शिक्षा व्यवस्था और शिक्षा के मंदिर बताये जा रहे विद्यालय आज किस हालात में हैं इसकी बानगी विगत दिवस राजस्थान राज्य के झालावाड़ से आई है जहाँ विद्यालय भवन के धराशायी होने से विद्यालय में अपना सुनहरा भविष्य गढ़ने की तलाश में आये मासूम बेमौत मारे गये बताया जा रहा है कि पांच मासूम छात्र विद्यालय भवन के गिरने से दुर्घटना स्थल पर ही मारे गये जबकि लगभग अठारह के करीब घायल बताये जा रहे हैं जिनमें से कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है।

घायल और मृतक बच्चों के परिजनों का अस्पताल में करूण रुदन सत्ता में बैठे लोगों के दिलों तक क्या नही पंहुच रही है, क्या शिक्षा के कथित मंदिर कहलाने वाले इन भवनों की हालत की जानकारी सरकार तथा उसके शिक्षा विभाग तथा उनके निकम्मे अफसरों को नही दिखाई दिया,।

गरीब के बच्चे थे कुछ पैसे मदद के नाम पर सरकार दे देगी मामला खत्म लेकिन एक गरीब महिला जिसके दो बच्चे इस दुर्घटना में मरे हैं उसकी पीड़ा उसकी चीत्कार उसकी आह इस दुर्घटना के लिए किसी भी रूप में जिम्मेदार लोगों चाहे वे जनप्रतिनिधि हों या अधिकारी उनके जीवन पर भी बिष वेल बनकर लिपटेगी कि आखिर आपने अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन क्यों नहीं किया कमजोर तथा जर्जर भवनों में बच्चे पढाये क्यों जा रहे थे, इस दुर्घटना की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए सरकार के निकम्मे अधिकारी निश्चित रूप से जिम्मेदार हैं इन मासूम बच्चों की मौत के लिए क्या टूटने की कगार पर पंहचे विद्यालय भवन कक्षा संचालन के लायक थे इन जर्जर भवनों की समय रहते सुध आखिर क्यों नही ली गई।

घटना से देश के सभी राज्यों को सबक लेने की आवश्यकता है: राजस्थान के झालावाड़ में हुई हिर्दय विदारक घटना हर उस व्यक्ति को झकझोर देगी जो मनुष्य कहलाने के लायक है इसके साथ ही यह देश भर के राज्य सरकारों के लिए भी सबक सीखने का समय है जिला प्रशासन शिक्षा विभाग के साथ सरकार उन भवनों का सर्वे कराये जो टूटने के कगार पर पंहचे हैं या जिनकी स्थित कक्षा संचालित करने लायक नही है इस परसमय रहते गंभीर कार्यवाही प्राथमिकता के आधार पर होनी चाहिए जिससे कि भविष्य में इस तरह की त्रासदी ना होने पाये तथा किसी को अपने बच्चों की इस हालात में दशा देखनी पड़ जाये। अजय तिवाड़ी सम्पादक।

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