भारत की राजनीति में ध्रुव तारे की तरह चमकता चेहरा मेजर जनरल (अ. प्रा.) भुवन चन्द्र खण्डूरी

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आधुनिक राजनीति में जब ईमानदारी सुचिता और कर्तव्य निष्ठा असहज बात लगती हो तब राजनीति में ईमानदारी के प्रतीक के रूप में उभरे थे बी सी खण्डूरी गरिमामयी भारतीय सेना से सेवानिवृत्ति के बाद भारतीय जनता पार्टी से जुड़े तथा भाजपा ने उन्हें गढ़वाल संसदीय क्षेत्र से लोकसभा का उम्मीदवार बना दिया, भारी अंतर से अपने पहले ही चुनाव में जीत हासिल करने के बाद वे लगातार गढ़वाल संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते रहे, अपने अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और कार्य संस्कृति के चलते केन्द्र में भूतल परिवहन (रा. म. स्वतंत्र प्रभार) जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय में आकर देश को सड़क मार्ग, राष्ट्रीय राजमार्ग और स्वर्णिम चतुर्भुज योजनाओं से जोड़ कर शानदार उपलब्धि हासिल की, उनकी कार्य कुशलता, ईमानदार और सख्त प्रशासनिक छवि को देखते हुए केन्द्र ने उन्हें उत्तराखंड जैसे नवोदित राज्य का मुख्यमंत्री बनाया।

उत्तराखंड में उन्होंने भ्रष्टाचार पर लगभग पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था, सरकारी योजनाओं में कोई कमीशनखोरी की हिम्मत नही करता था, ठेकेदार ब्लैक लिस्टेड होने के चलते ईमानदारी से काम करते थे अधिकारी वर्ग भी अब सही ढंग से काम करने लगे थे। खण्डूरी जी के कार्य करने की शैली से मै भी रूबरू हुआ था देहरादून से प्रकाशित एक साप्ताहिक समाचार पत्र के सम्पादक के साथ उनके कार्यालय में भेंट की और सामन्य परिचय के बाद वे महत्वपूर्ण फाइलों को निपटा रहे थे इसी बीच हम थोड़ा असहज बैठे थे साथ में आये सम्पादक कुछ पूछते तो साफगोई के साथ स्पष्ट और छोटा जवाब देते थे कहा मै नेताओं और अधिकारियों के प्रति नही जनता के प्रति जवाबदेही रखता हूँ।

तभी शिक्षकों का एक समूह उनसे मिलने आया खड़े होकर उनकी मांगो का पुलिंदा पकड़ कर उन्हें अपने कालेजों में अध्यापन में लग जाने को कहा तथा उनकी सभी न्यायोचित मांगो को प्राथमिकता के आधार पर हल करने की बात की। सीधा बोलना, स्पष्ट बोलना उनकी पहचान थी, आश्वासन से वे परहेज करते थे ईमानदारी उनकी कार्य संसकृति का प्रारंभ माना जाता था, उत्तराखंड ईमानदारी कार्यकुशलता के मार्ग पर चल निकला था लेकिन दुर्योग से सत्ता विरोध शुरू हुआ खण्डूरी जी जिस तरह से भी सत्ता से बाहर हुए, कोटद्वार में विधानसभा चुनाव हार और उसके चलते ईमानदारी का प्रतीक पुरुष आधुनिक सड़क निर्माण में शेरशाह सूरी कहलाने वाले मेजर जनरल (अवकाश प्राप्त) भुवन चन्द्र खण्डूरी राजनीति से दूर हो गये।

यद्यपि सत्ता कभी किसी की सगी नही होती लेकिन सिद्धांत, ईमानदारी कर्तव्य परायणता की जो प्रतिमूर्ति जनरल बी सी खण्डूरी के रूप में भारत की राजनीति में ध्रुव तारे की तरह चमकता है उस प्रकार की राजनीति की आज के दौर में कल्पना ही की जा सकती है, आज जनरल खण्डूरी बहुत बीमारी की हालत में अस्पताल में हैं, देश और उत्तराखंड की जनता उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करती है।।

अजय तिवाड़ी, सम्पादक

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